जानिए कैसे हुई थी तालाब में जिंदगी की शुरुआत

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जानिए कैसे हुई थी तालाब में जिंदगी की शुरुआत

नई दिल्ली। विश्व में पृथ्वी पर सबसे पहले जीवन का अंश पाया गया। उसके बाद से पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत कब और कैसे हुई, यह हमेशा से जिज्ञासा का विषय रहा है। वैज्ञानिकों ने इसको लेकर कई सिद्धांत भी दिए हैं। सामान्य धारणा है कि जीवन सबसे पहले समुद्र में पनपा होगा। वहीं से धीरे-धीरे विकास होता रहा और पृथ्वी बसती गई।

Know How Was The Beginning Of Life In The Pond :

दरअसल, अब एक अध्ययन में इस धारणा को चुनौती दी गई है। विज्ञान पत्रिका ‘जियोकेमिस्ट्री, जियोफिजिक्स, जियोसिस्टम्स’ में प्रकाशित अध्ययन में दावा किया गया है कि जीवन के अनुकूल परिस्थितियां सर्वप्रथम समुद्र में नहीं बल्कि किसी तालाब में बनी होंगी।

वहीं ये भी माना जाता है कि पृथ्वी पर सबसे पहले जीवन की शुरुआत हुई जिसमें नाइट्रोजन की अहम भूमिका रही होगी। नए अध्ययन में कहा गया है कि इस सिद्धांत को मानते हुए पानी के छिछले स्रोतों में जीवन पनपने की संभावना ज्यादा है।

बता दें कि अमेरिका के मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआइटी) के शोधकर्ता सुकृत रंजन ने कहा, ‘अगर आप मानते हैं कि जीवन की शुरुआत होने में नाइट्रोजन की भूमिका थी, तो यह मुश्किल है कि जीवन किसी समुद्र में पनपा होगा। इस सिद्धांत के आधार पर किसी तालाब में जीवन शुरू होना ज्यादा आसान है।’

वैज्ञानिकों का मानना हैं कि पृथ्वी के वातावरण में व्याप्त नाइट्रोजन के टूटने से अवशेष के रूप में नाइट्रोजन के विभिन्न ऑक्साइड जलस्रोतों में जमा हो गए। यही ऑक्साइड आगे चलकर समुद्र में जीवन की शुरुआत का कारण बने। नए अध्ययन में इस अवधारणा को खारिज किया गया है।

यही नहीं शोधकर्ताओं ने जानकारी दी है कि सूर्य की पराबैंगनी किरणों व समुद्री चट्टानों में व्याप्त लोहे के कारण वहां जमा हुए नाइट्रोजन के ऑक्साइड फिर विघटित हुए होंगे और नाइट्रोजन गैस वापस वातावरण में चली गई होगी। ऐसे में समुद्र में नाइट्रोजन के विभिन्न ऑक्साइड की इतनी अधिक मात्रा नहीं बची होगी कि जीवन पनप सके।

वहीं छोटे तालाबों में स्थिति इससे विपरीत रही होगी। वातावरण के नाइट्रोजन से बनने वाले विभिन्न ऑक्साइड निसंदेह समुद्रों के साथ-साथ छोटे तालाबों में भी जमा हुए होंगे। उन तालाबों में ऐसी कोई परिस्थिति बनना या ऐसी क्रिया होना मुश्किल है कि ऑक्साइड टूटने से नाइट्रोजन फिर वातावरण में चली जाए। इसलिए तालाबों में संभवत: नाइट्रोजन के ऑक्साइड की बड़ी मात्रा जमा हुई होगी और वहीं धीरे-धीरे जीवन पनपा होगा।

नई दिल्ली। विश्व में पृथ्वी पर सबसे पहले जीवन का अंश पाया गया। उसके बाद से पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत कब और कैसे हुई, यह हमेशा से जिज्ञासा का विषय रहा है। वैज्ञानिकों ने इसको लेकर कई सिद्धांत भी दिए हैं। सामान्य धारणा है कि जीवन सबसे पहले समुद्र में पनपा होगा। वहीं से धीरे-धीरे विकास होता रहा और पृथ्वी बसती गई।

दरअसल, अब एक अध्ययन में इस धारणा को चुनौती दी गई है। विज्ञान पत्रिका 'जियोकेमिस्ट्री, जियोफिजिक्स, जियोसिस्टम्स' में प्रकाशित अध्ययन में दावा किया गया है कि जीवन के अनुकूल परिस्थितियां सर्वप्रथम समुद्र में नहीं बल्कि किसी तालाब में बनी होंगी।

वहीं ये भी माना जाता है कि पृथ्वी पर सबसे पहले जीवन की शुरुआत हुई जिसमें नाइट्रोजन की अहम भूमिका रही होगी। नए अध्ययन में कहा गया है कि इस सिद्धांत को मानते हुए पानी के छिछले स्रोतों में जीवन पनपने की संभावना ज्यादा है।

बता दें कि अमेरिका के मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआइटी) के शोधकर्ता सुकृत रंजन ने कहा, 'अगर आप मानते हैं कि जीवन की शुरुआत होने में नाइट्रोजन की भूमिका थी, तो यह मुश्किल है कि जीवन किसी समुद्र में पनपा होगा। इस सिद्धांत के आधार पर किसी तालाब में जीवन शुरू होना ज्यादा आसान है।'

वैज्ञानिकों का मानना हैं कि पृथ्वी के वातावरण में व्याप्त नाइट्रोजन के टूटने से अवशेष के रूप में नाइट्रोजन के विभिन्न ऑक्साइड जलस्रोतों में जमा हो गए। यही ऑक्साइड आगे चलकर समुद्र में जीवन की शुरुआत का कारण बने। नए अध्ययन में इस अवधारणा को खारिज किया गया है।

यही नहीं शोधकर्ताओं ने जानकारी दी है कि सूर्य की पराबैंगनी किरणों व समुद्री चट्टानों में व्याप्त लोहे के कारण वहां जमा हुए नाइट्रोजन के ऑक्साइड फिर विघटित हुए होंगे और नाइट्रोजन गैस वापस वातावरण में चली गई होगी। ऐसे में समुद्र में नाइट्रोजन के विभिन्न ऑक्साइड की इतनी अधिक मात्रा नहीं बची होगी कि जीवन पनप सके।

वहीं छोटे तालाबों में स्थिति इससे विपरीत रही होगी। वातावरण के नाइट्रोजन से बनने वाले विभिन्न ऑक्साइड निसंदेह समुद्रों के साथ-साथ छोटे तालाबों में भी जमा हुए होंगे। उन तालाबों में ऐसी कोई परिस्थिति बनना या ऐसी क्रिया होना मुश्किल है कि ऑक्साइड टूटने से नाइट्रोजन फिर वातावरण में चली जाए। इसलिए तालाबों में संभवत: नाइट्रोजन के ऑक्साइड की बड़ी मात्रा जमा हुई होगी और वहीं धीरे-धीरे जीवन पनपा होगा।