जानिए कौन हैं संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को टेररिस्तान कहने वाली इनम गंभीर

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तानी पीएम के आरोपों पर भारत का पलटवार

नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र की जनरल असेंबली के 72वें अधिवेशन में पाकिस्तानी के प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी के आरोपों का करारा जवाब देने वाली भारत की फर्स्ट सिक्रेटरी इनम गंभीर सुर्खियों में हैं। इनम ने अपने जवाब में पाकिस्तान को आतंकवादियों की जमीन बताते हुए टेररिस्तान करार दिया। यह पहला मौका नहीं है कि जब इनम ने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिए हो। 2016 में संयुक्त राष्ट्र के मंच से पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ द्वारा आतंकी बुरहान बानी के एनकाउंटर को लेकर मानवाधिकार का हवाला देते हुए भारत पर हमला बोला था तब पहला मौका था जब इनम गंभीर ने नवाज शरीफ के करीब 30 मिनट के भाषण का जवाब मात्र तीन मिनट के जवाब में देकर दुनिया भर की मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था।

सबसे पहले हम आपको बताते हैं कि 2015 में संयुक्त राष्ट्र में भारत के मिशन की पहली सचिव के रूप में नियुक्ति पाने वाली इनम गंभीर ने 2016 में यूएन जनरल आसेंबली में भारत की ओर से पहली बार राइट टू रिपलाय का प्रयोग किया था। जिसके तहत नवाज शरीफ के लगाए आरोपों का जवाब में इनम ने कहा था कि पाकिस्तान की जो भूमि प्राचीन भारत में तक्षशिला के रूप में सारे विश्व के सामने शिक्षा के केन्द्र के रूप में अपनी प्रतिष्ठा रखती थी, वह आज आतंकवादियों की पनाहगाह के रूप में पहचाना जाता है। पाकिस्तान से प्रायोजित होने वाले आतंकवाद से भारत ही नहीं अन्य देशों को भी परेशानी हो रही है। अपने जवाब में गंभीर ने उसी समय कश्मीर के उरी आर्मी बेस पर हुए आतंकी हमले और 18 भारतीय जवानों की मौत के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार करार देते हुए नवाज शरीफ के भाषण को झूठे आरापों का पुलिंदा करार दिया था।

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उन्होंने अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए 9/11 के आतंकी हमले और ओसामा बिन लादेन के एनकाउंटर की ओर खींचते हुए कहा था, कि लादेन का पाकिस्तान के एटवाबाद में मारा जाना साबित करता है कि पाकिस्तान आतंकवाद को स्पॉन्सर करता है। पाकिस्तान को यह समझने की जरूरत है कि वह जिस मानवाधिकार की दुहाई दुनिया के सामने दे रहा है उसे सबसे ज्यादा खतरा आतंकवाद से है।

इनम के इस जवाब को दुनिया भर में सराहना मिली थी, उनके द्वारा बोले गए शब्दों के चुनाव के लिए वैश्विक मीडिया ने उनकी सराहना करते हुए कहा था कि इनम ने कम से कम शब्दों में पाकिस्तान को कठोर जवाब देने का काम किया है।

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कौन है इनम गंभीर —

2005 बैच की आईएफएस अधिकारी इनम गंभीर मूल रूप से दिल्ली की रहने वालीं हैं। इनम की स्कूलिंग दिल्ली में ही हुई है, और उन्होने दिल्ली के हिंदू कालेज से बीएससी हॉनर्स की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सिविल सर्विसेज के लिए तैयारी शुरू की। इनम ने अपने पहले ही प्रयास में सिविल सर्विसेज की परीक्षा पास कर ली। देश की सबसे सम्मानित माने जाने वाली सेवा में चुने जाने के बाद बतौर आईएएस प्राथमिक पसंद चुनाव किया लेकिन उन्हें आईएफएस ट्रेनिंग पर भेजा गया।

इनम को शुरुआत से ही एक राजनायिक के रूप में ट्रेनिंग दी गई। उन्होंने विदेशी भाषा के रूप में स्पेनिश को चुना और इसी के चलते उन्हें पहली तैनाती मैड्रिड में मिली। उसके बाद अर्जनटीना और फिर भारत वापस लौट कर उन्हें विदेशी मामलों के मंत्रालय (MEA) में बतौर अंडर सि​क्रेटरी तैनाती मिली। जहां से उन्हें पढ़ाई के लिए छुट्टी लेकर जेनेवा में पढ़ाई पूरी की और लौटकर उन्हें संयुक्त राष्ट्र में पहले सचिव के रूप में भारत का प्रतिनित्व करने के लिए चुना गया।

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बताया जाता है कि इनम गंभीर एक्सटर्नल अफेयर्स मंत्रालय (एमईए) में तैनाती के समय से पाकिस्तान से जुड़े मामलों को देखतीं आईं हैं। इसी दौरान एमईए के पूर्व प्रवक्ता अकबरुद्दीन की नजर इनम गंभीर पर पड़ी। इनम की काबलियत को देखते हुए उन्होने इनम के मेंटोर की भूमिका निभाई। इनम की यूएन में तैनाती के पीछे भी अकबरुद्दीन की अहम भूमिका मानी जाती है। इनम द्वारा 2016 में यूएन संसद में पहली बार राइट टू रिपलाई का प्रयोग किया जाने न सिर्फ अकबरुद्दीन की तय की गई रणनीति का हिस्सा था, बल्कि इनम गंभीर द्वारा दिया गया जवाब भी अकबरुद्दीन ने तैयार करवाया था।

 

 

 

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