1. हिन्दी समाचार
  2. ब्‍यूटी
  3. जानिए प्रतिदिन वजन कम करने के कुछ आसान और शानदार तरीके, दिल्ली के डॉक्टरो द्वारा बताया गया वजन कम करने का सबसे पहला-प्राकृतिक उपाय

जानिए प्रतिदिन वजन कम करने के कुछ आसान और शानदार तरीके, दिल्ली के डॉक्टरो द्वारा बताया गया वजन कम करने का सबसे पहला-प्राकृतिक उपाय

आव्सकता से अधिक वजन का बढ़ना हमारे लिए एक बहुत बड़ी समस्या बन जाती है। वजन को कम करने के लिए दिल्ली के डॉक्टरो द्वारा बताया गया वजन कम करने का सबसे पहला-प्राकृतिक उपाय, डॉ. कुमैल के द्वारा खोजै गया यह अचूक उपाए

By प्रीति कुमारी 
Updated Date

Know Some Easy And Great Ways To Lose Weight Every Day The First Natural Way To Lose Weight Told By The Doctors Of Delhi

आव्सकता से अधिक वजन का बढ़ना हमारे लिए एक बहुत बड़ी समस्या बन जाती है। वजन को कम करने के लिए डॉ. कुमैल के द्वारा खोजा गया एक अचूक उपाए

पढ़ें :- अपनी पलकों को नुकसान पहुंचाए बिना हर रोज काजल कैसे लगाए

डॉ. कुमैल की आश्चर्यजनक खोज…

डॉ. कुमैल कहते है की हर दिन की तरह ही वो भी एक आम दिन था जिस दिन मेरी जिंदगी पूरी तरह से बदल गयी। मेरे लिए मेरी भाई की मृत्यु गहरा सदमा था, यह कोई रहस्य नहीं था। कपिल की मृत्यु का बड़ा कारण उसका मोटापा था। उसकी धमनियां भर चुकी थी उसे बस एक स्टेंट की जरुरत थी जिससे उसकी जान बच सकती थी। पहले मुझे लगता था कि हम 8 मिनट देर थे। अगर वो 8 मिनट पहले पहुंचता तो हम उसकी जान बचा सकते थे। लेकिन वास्तव में हम लोग कई साल पीछे थे। अगर केवल कपिल ने अपने मोटापे को गंभीरता से लिया होता। अगर उसे केवल यह अहसास होता कि अपने वजन की वजह से वह कितना अस्वस्थ और बीमार है। आखिरकार मैंने सैकड़ों मरीजों को सिर्फ मोटापे से होने वाली परेशानियों की वजह से जैसे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और कैंसर की वजह से अपने बाहों में दम तोड़ते देखा है। उस दिन के बाद मैं फिर से सर्जरी नहीं कर पाया, जब भी कभी मैं कोशिश करता तो मेरे हाथ कांपने लगते। जब भी कभी मैं ऑपरेशन टेबल पर किसी शरीर को देखता तो उसमें मुझे मेरा भाई कपिल नजर आता। मुझे पता था मैं सर्ज़री करने के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं हूं। कैसे भी, मुझे मोटापे के बारे में कुछ तो करना था और इसका उपाय ढूंढना था जिससे जो अनगिनत लोग अत्यधिक मोटापे के कारण मर रहे है उन्हें बचाया जा सके। मैंने अपनी मेडिकल प्रैक्टिस छोड़ने का फैसला लिया और मैं एक फुलटाइम प्रोफेसर और शोध विद्यार्थी बन गया।

मैंने अपने आपको वसा कोशिकाओं के उत्पादन की विभिन्न प्राकृतिक निष्कर्षो के प्रभावों को पढ़ने में लगा दिया। मेरा लक्ष्य था कि मोटे पुरुषों और महिलाओं की जिंदगियों को बचाने का आसान रास्ता तलाश करूं। दुनिया में लाखों लोग अपने मोटापे से परेशान रहते हैं लेकिन अधिकतर के लिए खाने-पीने में परहेज का तरीका अनुसरण करना काफी कठिन रहता है। और तो और, अधिकतर वजन कम करने वाले कार्यक्रम, जिसे स्पा-क्लीनिक की से प्रसारित किया जाता है उनका खर्च 40,000-50,000 रुपये होता है, और इतने ज्यादा खर्च के बावजूद, जो परिणाम होते हैं वो बहुत ही दुखदायी होते हैं। वे सिर्फ आपके शरीर में पानी का भार काम करवाते हैं इसलिये एक महीने के अंदर आपका वजन फिर बढ़ जाता है। यही वजह है कि वजन कम करना प्रायः एक असंभव सा काम लगता है। कपिल के अंतिम संस्कार के बाद मैं सीधे अपने प्रयोगशाला गया। मैंने खुद से वादा किया कि मैं अपने जीवविज्ञान में विशेष ज्ञान का इस्तेमाल मोटापे का उपाय ढूंढने के लिए करुंगा, और बाकियों को बेवजह मौत से उन्हें बचाऊंगा। रोजाना मैं 6 बजे प्रयोगशाला में पहुंच जाता और इससे पहले कि मैंने कुछ करूं मैं अपने भाई की तस्वीर देखता और मुझे याद आता कि मैं वहां क्यों था।

मेरा प्रयोग खास तौर से पेट, कूल्हों और कमर में होने वाली असामान्य चर्बी पर केंद्रित था। मुझे पता था कि सालों से वजन बढ़ने की वजह से पाचन क्रिया धीमी गति से होती है, जिस वजह से लोगों के लिए चर्बी को प्रभावी रूप से कम करना कठिन हो जाता है। मैं एक ऐसा जैविक घोल बनाना चाहता था जो इस सख्त चर्बी को निशाना बनाए और साथ ही उसी समय शरीर की पाचन क्रिया को भी बढ़ाए। मैंने प्रयोग पर प्रयोग किये, मैंने वसा कोशिकाओं का घोलनीकरण, छंटनीकरण, क्रिस्टलीकरण और पुनःक्रिस्टलीकरण करके इस रहस्य को सुलझाने की कोशिश की। यह काम बहुत ही ज्यादा और शारीरिक रूप से थका देने वाला था। मैं पूरा दिन वजन कम करने के तरीकों के प्रयोगों की खोज करता था और सारी रात उन्हें प्रयोगशाला में परखता रहता था। मेरा सबसे बड़ा प्रेणास्त्रोत मेरे भाई की तस्वीर थी। ये मुझे हमेशा याद दिलाती रहती थी कि दांव पर क्या लगा है। दो साल के प्रयोग के बाद भी मेरे पास कोई ठोस समाधान नहीं था और मैं हताश होने लगा था। मेरे सहयोगी मेरी काबिलियत पर शक करने लगे थे, और मैं चिंतित था कि अगर मुझे इसका समाधान नहीं मिला तो मेरे भाई की तरह ही लाखों और लोगों मौत हो जाएगी। मैंने दुनियाभर की सैकड़ों असामान्य टॉनिक, फंगल उपभेदों और जड़ी-बूटियों की जांच की, हालांकि इससे मैं किसी परिणाम तक नहीं पहुंच सका। अब जांच करने के लिए मेरे पास आखिर फल ही बचा था और इसी के साथ मैंने योजना बनाई कि मैं इस प्रयोग को छोड़ दूंगा और किसी आसान अध्ययन क्षेत्र की ओर रुख करूंगा।

पढ़ें :- जानिए संवेदनशील त्वचा की देखभाल कैसे करें

जो अंतिम फल था वह एक स्वादिष्ट अफ्रीकन बेरी था जो कांगो के सुदूर क्षेत्र में पाया जाता है। मेडिकल स्कूल में मैंने प्राचीन दवाइयों के बारे में सिखा था और मुझे याद है मेरे प्रोफेसर ने मुझे बताया था कि कैसे एक अफ्रीकन जनजाति शिकार में जाने से पहले अपनी पाचन शक्ति बढ़ाने के लिए इन फलों का सेवन करती है जिससे कि वो अधिक चुस्ती और ऊर्जा बनाए रखें। यह जनजाति अपनी शिकार की क्षमता के लिए जानी जाती थी और हजारों साल तक दूसरी जनजाति की धमकी के बिना जीवित बचे रहे। मैं जानता था किसी भी जनजाति के लिए इतने लंबे समय तक जीवित रहने के लिये उन्होंने अपार मेहनत की होगी और सबसे बेहतर बने होंगे। जब मैंने इस प्रयोग का जिक्र किया तो मेरे सहयोगियों ने सोचा कि मैं पागल हो गया हूं। “तुम सच में मोटापे को एक जादुई फल से ठीक करना चाहते हो ?” वे सब हंसते थे, “तुम कल्पनाओं में जी रहे हो! जब यह विलक्षण फल मेरे पास आया तो मैं घबराया हुआ था लेकिन मुझे मालूम था कि मेरे पास खोने को कुछ नहीं है। मैंने फल को ओवन की मदद से सुखा दिया, उसे पीस दिया फिर सेलाइन सॉल्यूशन में मिला दिया। फिर मैंने सॉल्यूशन प्रयोगशाला में उगाए मोटे टिश्यू पर डाल दिया और सबसे बेहतर की कामना करते हुए घर चला गया।

अगली सुबह जब मैं प्रयोगशाला में आया तो मैं निराश होने के लिए तैयार था लेकिन मैं देखकर दंग रह गया कि आधी चर्बी पिघल गई थी। मैं अपनी आंखों पर भरोसा नहीं कर पा रहा था। मैंने अपने रिसर्च और औषधि के इतने सालों में ऐसा कभी नहीं देखा था कि एक सामान्य से फल ने सच में चर्बी को कम कर दिया था। वही चर्बी जिसे कम करना कभी असंभव कहा जाता था। रासायनिक स्तर पर फल ने चर्बी को कम करने में रफ्तार दी थी और वसा ऊतकों में कोशिकाओं की पाचन क्षमता को बढ़ा दिया था जिस वजह से जब जनजातीय पुरुष शिकार में जाते थे तो ऊर्जा से भरपूर रहते थे। उनकी वसा ऊतक तुरंत ही ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती थी। मैं खुशी के मारे झूमने लगा था। ये वही उपाय था जिसकी मैं खोज कर रहा था। मुझे पता था अगर मैं मानव परीक्षण के लिये विश्वविद्यालय गया तो मुझे अनुमति लेने में महीनों लग जाएंगे लेकिन मैं इतना लंबा इंतजार नहीं कर सकता था इसलिए मैंने फैसला किया कि इसे मैं अपने ऊपर और गिनी पिग के ऊपर प्रयोग करके देखूंगा। मुझे पता था मेरे पास वक्त बिल्कुल भी नहीं था इसलिए मैं रोजाना अपना खाना बढ़ाने लगा और नतीजे रिकॉर्ड करने लगा। एक हफ्ते बाद, मैं पूरी तरह अचंभित था। मेरी ऊर्जा का स्तर बढ़ गया था और मुझे भूख भी नहीं लगा था। मुझे अपने आंखों पर भरोसा ही नहीं हो रहा था। मैंने 3 किलो वजन घटा लिया था। मैं प्रभावित तो हुआ था लेकिन आश्वस्त नहीं था। हो सकता है मैं केवल शरीर में पानी का वजन ही घटा रहा होऊंगा जैसा कि आप किसी डाइट के प्रारम्भ में घटाते हैं। मैंने फल लेना लगातार जारी रखा और हर दिन मैं पहले से ज्यादा ऊर्जा के साथ उठता था। मैं पहले से ज्यादा गहरी नींद में सोने लगा। मैं अब रात में ज्यादा देर तक नहीं जगता था क्योंकि मेरा शरीर अब सच में आराम करने के लायक हो गया था जब मैंने पाया कि मेरा सॉल्यूशन सच में कारगर साबित हो रहा है तो मैं जान गया कि मुझे इसे दुनिया के सामने लाना चाहिए।

यह तरीका कैसे मोटापा कम करता है?

इस जादुई फल को प्राकृतिक आक्सीकरणरोधी, गारसिनिया कम्बोजिया के साथ मिश्रण करके बनाया जाता है, यह बेहतरीन घोल आपकी पाचन शक्ति को बढ़ा देता है, शरीर को स्वस्थ कर देता है, ऊर्जा को दस गुना बढ़ा देता है और सचमुच में चर्बी को रात भर में कम कर देता है। साथ ही साथ ये नैचुरल एजेंट्स आपको हानिकारक टॉक्सिन्स से छुटकारा दिलाता है और आपके शरीर को लंबे समय के लिए कैलोरी घटाने में मदद करता है। टॉक्सिन्स से शरीर को साफ करने और पाचन क्रिया को सही रखने से शरीर में सही तालमेल बना रहता है जिससे चर्बी आसानी से कम हो जाती है। लेकिन चिंता ना करे कई साल के मोटापे को कम करने का पहला कदम है कि पाचन क्रिया की धीमी प्रक्रिया को शुरू करना। मेरे वजन घटाने की जादुई कोशिश की तकनीक बिल्कुल ऐसे ही काम करती है! पोषक तत्वों का सही माप करके, कोशिका स्तर पर पाचन शक्ति को गति प्रदान करता है, और सालों को जमी चर्बी को कम कर देता है-जिससे कि आप पतले हो जाएं और वैसे ही बने रहें।

अफ्रीकी फल के अलावा, के साथ गारनिसिया कम्बोजिया भी मिला होता था जो कि वजन कम करने को बढ़ावा देता था और आपकी ऊर्जा को दस गुना बढ़ा देता था। दोनों प्राकृतिक सफाई कारक तत्व मिलकर शरीर से हानिकारक तत्वों को मिटा देते थे और लंबे समय के लिए काम करने और शरीर में कैलोरी कम करने में मदद करते थे। इसे सबसे अच्छे वैज्ञानिक तरीकों और प्राकृतिक चीजों का उपयोग करके बनाया जाता था। फेनक्यू वैज्ञानिक रूप से वसा कोशिकाओं को निशाना बना के उन्हें कम करने में सिद्ध हो चुका है। इसका मतलब आप वजन जल्दी से, आसानी से और हमेशा के लिए कम कर सकते है। गारंटी के साथ। यह एक तथ्य है- फेनक्यू रासायनिक रूप से महिला और पुरुष को वजन कम करने तथा एक खुशहाल जिंदगी जीने में मदद करता है।

 

पढ़ें :- जानिए नींबू के फायदे, कैसे ये हमारी त्वचा और बालो के लिए है गुणकारी

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...
X