जानिए बड़ा रहस्य, समुद्र का पानी खारा क्यों होता है जबकि नदियों का मीठा

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नई दिल्ली: आखिर समुद्र का पानी ही खारा (नमकीन) क्यों होता है, नदियों का पानी क्यों नहीं। नदियों और झरनों में भी समुद्र का ही पानी रहता है। दरअसल, समुद्र से भाप उठती है, जिससे बादलों का निर्माण होता है और इसी से बारिश होती है। यही पानी नदियों और झरनों में जाता है। इसमें लवण भी घुले होते हैं, लेकिन उनकी मात्रा कम होती है, इसलिए नदी और झरनों का पानी अक्सर मीठा होता है।

Know The Big Secret Why Sea Water Is Salty While Rivers Are Sweet :

जब बारिश का पानी वापस समुद्र में पहुंचता है तो वहां थोड़े-थोड़े करके लवण जमा होते जाते हैं। हजारों-लाखों साल तक समुद्र में लवणों के जमा होने के कारण उसका पानी खारा हो जाता है। ये लवण हैं सोडियम और क्लोराइड, जिससे नमक का निर्माण होता है।

पौराणिक कहानी:

एक बार समुद्र देव ने देवी पार्वती से विवाह करने का प्रस्ताव रखा, लेकिन चूंकि माता पार्वती पहले ही भगवान शिव को अपना पति मान चुकी थीं, इसलिए उन्होंने समुद्र देव के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। इससे समुद्र देव क्रोधित हो गए और माता पार्वती के सामने ही भगवान शिव को भला-बुरा कहने लगे। इसपर माता पार्वती गुस्सा हो गईं और उन्होंने उन्हें श्राप दिया कि जिस मीठे पानी पर तुम्हें इतना अभिमान है और दूसरों की बुराई करते हो, वही पानी आज से खारा (नमकीन) हो जाए, जिससे कोई पी न पाए।

नई दिल्ली: आखिर समुद्र का पानी ही खारा (नमकीन) क्यों होता है, नदियों का पानी क्यों नहीं। नदियों और झरनों में भी समुद्र का ही पानी रहता है। दरअसल, समुद्र से भाप उठती है, जिससे बादलों का निर्माण होता है और इसी से बारिश होती है। यही पानी नदियों और झरनों में जाता है। इसमें लवण भी घुले होते हैं, लेकिन उनकी मात्रा कम होती है, इसलिए नदी और झरनों का पानी अक्सर मीठा होता है। जब बारिश का पानी वापस समुद्र में पहुंचता है तो वहां थोड़े-थोड़े करके लवण जमा होते जाते हैं। हजारों-लाखों साल तक समुद्र में लवणों के जमा होने के कारण उसका पानी खारा हो जाता है। ये लवण हैं सोडियम और क्लोराइड, जिससे नमक का निर्माण होता है। पौराणिक कहानी: एक बार समुद्र देव ने देवी पार्वती से विवाह करने का प्रस्ताव रखा, लेकिन चूंकि माता पार्वती पहले ही भगवान शिव को अपना पति मान चुकी थीं, इसलिए उन्होंने समुद्र देव के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। इससे समुद्र देव क्रोधित हो गए और माता पार्वती के सामने ही भगवान शिव को भला-बुरा कहने लगे। इसपर माता पार्वती गुस्सा हो गईं और उन्होंने उन्हें श्राप दिया कि जिस मीठे पानी पर तुम्हें इतना अभिमान है और दूसरों की बुराई करते हो, वही पानी आज से खारा (नमकीन) हो जाए, जिससे कोई पी न पाए।