आइये जानते हैं अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का इतिहास

आइये जानते हैं अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का इतिहास
आइये जानते हैं अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का इतिहास

हर वर्ष 8 मार्च का दिन अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस रूप में मनाया जाता है। कल यानी गुरूवार को हम 43वां ​अंतरराष्ट्रीय दिवस मानाने जा रहे है। इस अवसर पर हम आज आपको इस विशेष दिन से जुड़े इतिहास के बारे में बताने जा रहे हैं।

Know The History Of International Womans Day :

महिलाओं के सशक्तिकरण, संघर्ष और उनकी उपलब्धियों के सम्मान में संयुक्त राष्ट्र संघ ने 8 मार्च 1975 में पहला अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया था। वास्तविकता में यह दिन उन महिलाओं को समर्पित है जिन्होंने अपने संघर्ष के बल पर दुनिया भर में महिलाओं के सामाजिक स्तर को बदलने और पुरूषों के समान आजादी दिलवाने में अहम भूमिका निभाई। सदियों तक दुनिया की आधी आबादी को शोषण और त्रिस्कार के जाल से बाहर निकाल कर पुरुषों के बाराबर लाकर खड़ा करने की ताकत देने वाली महिलाओं की याद में ही संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस तारीख को समर्पित कर दिया।

कैसे हुई शुरुआत

महिला दिवस मनाने का प्रचलन सर्वप्रथम अमेरिका में एक महिला आंदोलन के बाद शुरू हुआ। जहां साल 20वीं सदी के पहले दशक में अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में 15000 महिलाओं ने वोटिंग के अधिकार की मांग के लिए अंदोलन किया था। महिलाओं की ओर से संगठित रूप से किया गया यह पहला बड़ा आन्दोलन था। महिलाओं की अपने अधिकार के प्रति प्रतिबद्धता को देखते हुए अमेरिका की सोशलिस्ट पार्टी ने साल 1909 की 28 फरवरी को पहला राष्ट्रीय दिवस मनाया।

जिसके बाद साल 1910 में जर्मनी की सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी की एक महिला लीडर ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव पर 17 में से 10 देशों की डेमोक्रेटिक पार्टियों के नेताओं ने सहमित जताई थी। पहली बार अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 19 मार्च 1911 को आस्ट्रिया, डेनमार्क, स्विट्जरलैंड, जर्मनी में मनाया गया। साल 1913 में इस की तारीख में संशोधन करते हुए प्रतिवर्ष 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाने लगा। जिसे अधिकारिक मान्यता 1975 में संयुक्त राष्ट्र में पेश किए गए एक प्रस्ताव के बाद मिली और दुनिया भर के देशों ने इस दिन को मनाना शुरू कर दिया।

आज हर क्षेत्र में आगे है भारतीय महिलाएं—

दुनिया भर की महिलाओं की तरह भी भारतीय महिलाओं ने 20वीं सदी में ऊंचे मुकाम हासिल किए हैं। सही मायनों में देखा जाए 20वीं सदी में हुए परिवर्तन के ही कारण 21वीं सदी में भारतीय महिलाओं ने वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान कायम कर दिखाई है। फिर चाहें क्षेत्र कारोबार, राजनीति, कूटनीति, कला, चिकित्सा शिक्षा या कोई भी रहा हो। भारतीय महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी कामयाबी के झंड़े गाढ़ दिखाए हैं।

हर वर्ष 8 मार्च का दिन अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस रूप में मनाया जाता है। कल यानी गुरूवार को हम 43वां ​अंतरराष्ट्रीय दिवस मानाने जा रहे है। इस अवसर पर हम आज आपको इस विशेष दिन से जुड़े इतिहास के बारे में बताने जा रहे हैं।महिलाओं के सशक्तिकरण, संघर्ष और उनकी उपलब्धियों के सम्मान में संयुक्त राष्ट्र संघ ने 8 मार्च 1975 में पहला अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया था। वास्तविकता में यह दिन उन महिलाओं को समर्पित है जिन्होंने अपने संघर्ष के बल पर दुनिया भर में महिलाओं के सामाजिक स्तर को बदलने और पुरूषों के समान आजादी दिलवाने में अहम भूमिका निभाई। सदियों तक दुनिया की आधी आबादी को शोषण और त्रिस्कार के जाल से बाहर निकाल कर पुरुषों के बाराबर लाकर खड़ा करने की ताकत देने वाली महिलाओं की याद में ही संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस तारीख को समर्पित कर दिया।कैसे हुई शुरुआतमहिला दिवस मनाने का प्रचलन सर्वप्रथम अमेरिका में एक महिला आंदोलन के बाद शुरू हुआ। जहां साल 20वीं सदी के पहले दशक में अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में 15000 महिलाओं ने वोटिंग के अधिकार की मांग के लिए अंदोलन किया था। महिलाओं की ओर से संगठित रूप से किया गया यह पहला बड़ा आन्दोलन था। महिलाओं की अपने अधिकार के प्रति प्रतिबद्धता को देखते हुए अमेरिका की सोशलिस्ट पार्टी ने साल 1909 की 28 फरवरी को पहला राष्ट्रीय दिवस मनाया।जिसके बाद साल 1910 में जर्मनी की सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी की एक महिला लीडर ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव पर 17 में से 10 देशों की डेमोक्रेटिक पार्टियों के नेताओं ने सहमित जताई थी। पहली बार अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 19 मार्च 1911 को आस्ट्रिया, डेनमार्क, स्विट्जरलैंड, जर्मनी में मनाया गया। साल 1913 में इस की तारीख में संशोधन करते हुए प्रतिवर्ष 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाने लगा। जिसे अधिकारिक मान्यता 1975 में संयुक्त राष्ट्र में पेश किए गए एक प्रस्ताव के बाद मिली और दुनिया भर के देशों ने इस दिन को मनाना शुरू कर दिया।आज हर क्षेत्र में आगे है भारतीय महिलाएं—दुनिया भर की महिलाओं की तरह भी भारतीय महिलाओं ने 20वीं सदी में ऊंचे मुकाम हासिल किए हैं। सही मायनों में देखा जाए 20वीं सदी में हुए परिवर्तन के ही कारण 21वीं सदी में भारतीय महिलाओं ने वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान कायम कर दिखाई है। फिर चाहें क्षेत्र कारोबार, राजनीति, कूटनीति, कला, चिकित्सा शिक्षा या कोई भी रहा हो। भारतीय महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी कामयाबी के झंड़े गाढ़ दिखाए हैं।