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जानिए भारत में होने वाले ईंधन की कीमतों की बढ़ोतरी और इनकी कीमतों का भारत में कैसे होता है गुना भाग

भारत के कई शहरों में पेट्रोल का आंकड़ा रु 100/लीटर के पार पहुंच चुका है लगातार ईंधन की कीमतें बढ़ाई जा रही है 4 मई 2021 के बाइ ईंधन की कीमतें 23 बार बढ़ाई गई हैं।

By प्रीति कुमारी 
Updated Date

4 मई 2021 से लगातार पेट्रोल-डीज़ल के कीमत में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। मौजूदा कीमत पिछले साल दिसंबर में करीब रु 12 प्रति लीटर कम थी, वहीं डीज़ल के दाम रु 14 प्रति कम थे। अब आप पेट्रोल पंप पर जाकर रु 1000 का पेट्रोल अपने वाहन में डलवाएंगे तो पहले से काफी कम मात्रा में आपको ईंधन मिलेगा। तो इस खबर में हम आपको बता रहे हैं। कि भारत में पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों का गुणा भाग कैसे किया जाता है। भारत के कई शहरों में प्रति लीटर पेट्रोल का आंकड़ा 100 रुपए के पार पहुंच चुका है। क्योंकि आज की तारीख में लगभग हर रोज़ देश में ईंधन के दाम बढ़ाए जा रहे हैं। बेशक यहां पेट्रोल ने शतक लगाया है, लेकिन ये वो शतक नहीं है। जिसका हमें अमूमन इंतज़ार होता है। भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर सरकार का नियंत्रण नहीं है। आयल मार्केटिंग कंपनियां दोनों ईंधन की कीमतें तय करती हैं। मिट्टी के तेल और रसोई गैस की कीमतों पर अभी केंद्र सरकार का नियंत्रण है। और इस पर सरकार सब्सिडी देती है।

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कच्चे तेल की कीमतें और टैक्स

फिलहाल अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमत 72 डॉलर प्रति बैरल है और यह करीब हर दिन बढ़ रही है. भारत में भी प्रतिदिन ईंधन की कीमत बदलते कच्चे तेल की कीमत के हिसाब से बदली जा रही है. जैसे ही कच्चा तेल महंगा होता है, आयात की लागत भी बढ़ जाती है। लेकिन ईंधन की बढ़ती कीमतों का सिर्फ यही एक कारण नहीं है। ईंधन की रिकॉर्ड कीमत का ठीकरा हमारी टैक्स व्यवस्था के सर भी फूटता है भारत में मांग का 80 % पेट्रोल-डीज़ल आयात किया जाता है और कच्चे तेल की कीमत यहां निर्णायक भूमिका निभाती है। फिलहाल अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमत 72 डॉलर प्रति बैरल है और यह करीब हर दिन बढ़ रही है। भारत में भी प्रतिदिन ईंधन की कीमत बदलते कच्चे तेल की कीमत के हिसाब से बदली जा रही है. जैसे ही कच्चा तेल महंगा होता है। आयात की लागत भी बढ़ जाती है। ईंधन की रिकॉर्ड कीमत का ठीकरा हमारी टैक्स व्यवस्था के सर भी फूटता है. भारत दुनियाभर के उन देशों में शामिल है जहां पेट्रोल-डीज़ल पर सबसे ज़्यादा टैक्स वसूला जाता है।

2021 की शुरुआत से ही पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों में लगातार इज़ाफा दर्ज किया जा रहा है। और यह रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी हैं. सरसरी नज़र डालें तो इस साल जनवरी से अब तक वाहन में डलने वाले ईंधन की मुंबई में कीमत पेट्रोल के लिए 10 रुपए प्रति लीटर और डीज़ल के लिए 12 रुपए प्रति लीटर बढ़ी है। भारत में ईंधन की कीमतें रोज़ाना घटती-बढ़ती हैं। जिसकी वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमत है। जैसे-जैसे कच्चा तेल महंगा होगा, वैसे-वैसे पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें भी बढ़ेंगी। कीमतें ग्राहकों पर भारी पड़ रही हैं। इसमें कोई दोराय नहीं है। पड़ोसी देशों से तुलना करें तो भूटान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और रशिया के मुकाबले भारतीय प्रति लीटर ईंधन की सबसे ज़्यादा कीमत चुका रहे हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पड़ोसी देशों के मुकाबले भारत में पेट्रोल-डीज़ल की कीमत लगभग दोगुनी है। भारतीय मुद्रा में देखें तो भूटान में प्रति लीटर पेट्रोल रु 68.4 का बिकता है, वहीं डीज़ल का दाम रु 66.4 प्रति लीटर है। पाकिस्तान में पेट्रोल के दाम रु 50.67 प्रति लीटर हैं, वहीं डीज़ल की कीमत रु 51.79 प्रति लीटर है. रूस में पेट्रोल-डीज़ल की प्रति लीटर कीमतें क्रमशः रु 49.2 और रु 48.4 हैं। आपकी जानकारी के लिए यह भी बता दें कि न्यूयॉर्क के मुकाबले मुंबई में प्रति लीटर पेट्रोल की कीमत लगभग दोगुनी है क्योंकि न्यूयॉर्क में यह कीमत 0.79 डॉलर है जो करीब रु 57 के बराबर है।

1 अप्रैल 2023 तक कुल ईंधन का 20 % हिस्सा इथेनॉल करने का लक्ष्य लेकर चल रही है. राष्ट्रीय बायोफ्यूल नीति 2018 के अनुसार यह आंकड़ा 2030 तक छूने का लक्ष्य रखा गया था। टैक्स में कमी करने से राज्य और केंद्र सरकार के रेवेन्यू पर बहुत बुरा असर पड़ेगा. हालांकि सरकार इसका उपाय निकालने पर काम कर रही है जिससे पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों को कम किया जा सके. सरकार बायोफ्यूल, खासतौर पर इथेनॉल की बिक्री बढ़ाने पर ज़ोर दे सकती है. इसपर सरकार ने कदम भी उठाए हैं । इस कदम से ईंधन के लिए विदेशों पर निर्भरता खत्म होगी और आयात में लगने वाली भारी रकम को बचाया जा सकेगा।

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