Varuthini Ekadashi : आज है वरुथनी एकादशी, जानें इस दिन चावल न खाने के पीछे क्या है वजह

vishnu dev

लखनऊ। भगवान विष्णु की पूजा अर्चना के लिए समर्पित वरुथनी एकादशी का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है। वैशाख माह के कृष्ण पक्ष को पड़ने वाली एकादशी को वरुथिनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस व्रत को करने से जीवन में सफलता मिलती है और मनोकामना पूर्ण होती है। धर्मशास्त्रों में एकादशी तिथि को विष्णु स्वरुप माना गया है। आज वरुथनी एकादशी के मौके पर जाने इससे जुड़ी कुछ खास बाते…

Know The Reason Of Not Eating Rice On Ekadashi :

एकादशी के दिन ऐसे करें भगवान विष्णु की पूजा

  • वरुथनी एकादशी व्रत के पूजनीय देवता श्रीहरि हैं। शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति विधि-विधान से भगवान विष्णु की साधना करते हुए एकादशी का व्रत और रात्रि जागरण करता है, उसे वर्षों की तपस्या का पुण्य प्राप्त होता है।
  • एकादशी के दिन साधक या व्रती को एक बार दशमी तिथि को सात्विक भोजन करना चाहिए।
  • मन से भोग-विलास की भावना त्यागकर भगवान विष्णु का स्मरण करना चाहिए।
  • एकादशी के दिन सूर्योदय काल में स्नान करके व्रत का संकल्प करना चाहिए।
  • संकल्प के उपरांत षोडषोपचार सहित श्री विष्णु की पूजा करनी चाहिए। भगवान के समक्ष बैठकर भगवद् कथा का पाठ अथवा श्रवण करना चाहिए।

जाने क्यों एकादशी पर नहीं खाते चावल

पौराणिक मान्यता के अनुसार माता शक्ति के क्रोध से बचने के लिए महर्षि मेधा ने शरीर का त्याग कर दिया और उनका अंश पृथ्वी में समा गया। चावल और जौ के रूप में महर्षि मेधा उत्पन्न हुए, इसलिए चावल और जौ को जीव माना जाता है। जिस दिन महर्षि मेधा का अंश पृथ्वी में समाया, उस दिन एकादशी तिथि थी, इसलिए इनको जीव रूप मानते हुए एकादशी को भोजन के रूप में ग्रहण करने से परहेज किया गया है, ताकि सात्विक रूप से विष्णु प्रिया एकादशी का व्रत संपन्न हो सके।

एकादशी के दिन चावल न खाने के पीछे सिर्फ धार्मिक ही नहीं बल्कि ज्योतिषीय कारण भी है। ज्योतिष के अनुसार चावल में जल तत्व की मात्रा अधिक होती है। जल पर चन्द्रमा का प्रभाव अधिक पड़ता है। ऐसे में चावल खाने से शरीर में जल की मात्रा बढ़ती है और इससे मन विचलित और चंचल होता है। मन के चंचल होने से व्रत के नियमों का पालन करने में बाधा आती है। चूंकि एकादशी व्रत में मन का पवित्र और सात्विक भाव का पालन अति आवश्यक होता है, इसलिए एकादशी के दिन चावल से बनी चीजें खाने की मनाही है।

लखनऊ। भगवान विष्णु की पूजा अर्चना के लिए समर्पित वरुथनी एकादशी का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है। वैशाख माह के कृष्ण पक्ष को पड़ने वाली एकादशी को वरुथिनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस व्रत को करने से जीवन में सफलता मिलती है और मनोकामना पूर्ण होती है। धर्मशास्त्रों में एकादशी तिथि को विष्णु स्वरुप माना गया है। आज वरुथनी एकादशी के मौके पर जाने इससे जुड़ी कुछ खास बाते... एकादशी के दिन ऐसे करें भगवान विष्णु की पूजा
  • वरुथनी एकादशी व्रत के पूजनीय देवता श्रीहरि हैं। शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति विधि-विधान से भगवान विष्णु की साधना करते हुए एकादशी का व्रत और रात्रि जागरण करता है, उसे वर्षों की तपस्या का पुण्य प्राप्त होता है।
  • एकादशी के दिन साधक या व्रती को एक बार दशमी तिथि को सात्विक भोजन करना चाहिए।
  • मन से भोग-विलास की भावना त्यागकर भगवान विष्णु का स्मरण करना चाहिए।
  • एकादशी के दिन सूर्योदय काल में स्नान करके व्रत का संकल्प करना चाहिए।
  • संकल्प के उपरांत षोडषोपचार सहित श्री विष्णु की पूजा करनी चाहिए। भगवान के समक्ष बैठकर भगवद् कथा का पाठ अथवा श्रवण करना चाहिए।
जाने क्यों एकादशी पर नहीं खाते चावल पौराणिक मान्यता के अनुसार माता शक्ति के क्रोध से बचने के लिए महर्षि मेधा ने शरीर का त्याग कर दिया और उनका अंश पृथ्वी में समा गया। चावल और जौ के रूप में महर्षि मेधा उत्पन्न हुए, इसलिए चावल और जौ को जीव माना जाता है। जिस दिन महर्षि मेधा का अंश पृथ्वी में समाया, उस दिन एकादशी तिथि थी, इसलिए इनको जीव रूप मानते हुए एकादशी को भोजन के रूप में ग्रहण करने से परहेज किया गया है, ताकि सात्विक रूप से विष्णु प्रिया एकादशी का व्रत संपन्न हो सके। एकादशी के दिन चावल न खाने के पीछे सिर्फ धार्मिक ही नहीं बल्कि ज्योतिषीय कारण भी है। ज्योतिष के अनुसार चावल में जल तत्व की मात्रा अधिक होती है। जल पर चन्द्रमा का प्रभाव अधिक पड़ता है। ऐसे में चावल खाने से शरीर में जल की मात्रा बढ़ती है और इससे मन विचलित और चंचल होता है। मन के चंचल होने से व्रत के नियमों का पालन करने में बाधा आती है। चूंकि एकादशी व्रत में मन का पवित्र और सात्विक भाव का पालन अति आवश्यक होता है, इसलिए एकादशी के दिन चावल से बनी चीजें खाने की मनाही है।