हैदराबाद एनकाउंटर: मात्र इन पस्थितियों में अपराधी को गोली मार सकती है पुलिस

हैदराबाद एनकाउंटर: मात्र इन पस्थितियों में अपराधी को गोली मार सकती है पुलिस
हैदराबाद एनकाउंटर: मात्र इन पस्थितियों में अपराधी को गोली मार सकती है पुलिस

नई दिल्ली। तेलंगाना के हैदराबाद में महिला डॉक्टर के साथ हैवानियत करने वाले चारों आरोपियों को हैदराबाद पुलिस ने एनकाउंटर में मार दिया। वहीं अब इस एनकाउंटर पर गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि क्राईम सीन के दौरान आरोपियों ने पिस्टल छीनकर भागने की कोशिश की थी इस वजह से ऐसा किया गया है। हैदराबाद पुलिस ने बताया कि दुष्कर्म और हत्या के आरोपितों का एनकाउंटर इसलिए किया गया है क्योंकि उन्होंने पुलिस पर हमला किया था। ऐसे में अब सवाल यह उठता है कि किसी अपराधी को मारने के लिए पुलिस किन परिस्थितियों में एनकाउंटर कर सकती है?

Know Under Which Conditions The Police Can Shoot The Culprit :

आइए जानते हैं किन पस्थितियों में अपराधी को गोली मार सकती है पुलिस

बता दें कि 9 मार्च, 1997 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजे गए पत्र में उस समय के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एमएन वेंकटचेलैय्या ने बताया था कि केवल दो ही परिस्थितियों में पुलिस घातक बल का उपयोग कर सकती है। आइये जानते हैं क्या हैं वो परिस्थितियां….

पहली स्थिति

आपराधिक मामलों में निजी प्रतिरक्षा का अधिकार एक अहम एवं जरूरी अधिकार है। यह अधिकार व्यक्ति विशेष को अपना बचाव करने के लिए प्रेरित करता है और यह प्रावधान उसे आवश्यक बल का उपयोग करके अपने हमलावर पर अपनी जीत को सुरक्षित करने का अधिकार देता है। देशभर में मुठभेड़ों के अधिकतर मामलों में पुलिस यही दलील देती है।

दूसरी स्थिति

सीआरपीसी की धारा 46 के तहत पुलिस अधिकारी किसी अन्य व्यक्ति की मौत के कारणों को सही ठहरा सकते हैं। यह प्रावधान पुलिस को बल प्रयोग करने के लिए अधिकृत करता है।

किसी प्रकार के खास मामले में मुठभेड़ में मौत का कारण दो स्थितियों में से किसी एक के तहत उचित नहीं ठहराया जा सकता है, उसे सिर्फ जांच से ही सही ठहराया जा सकता है अन्यथा नहीं।

नई दिल्ली। तेलंगाना के हैदराबाद में महिला डॉक्टर के साथ हैवानियत करने वाले चारों आरोपियों को हैदराबाद पुलिस ने एनकाउंटर में मार दिया। वहीं अब इस एनकाउंटर पर गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि क्राईम सीन के दौरान आरोपियों ने पिस्टल छीनकर भागने की कोशिश की थी इस वजह से ऐसा किया गया है। हैदराबाद पुलिस ने बताया कि दुष्कर्म और हत्या के आरोपितों का एनकाउंटर इसलिए किया गया है क्योंकि उन्होंने पुलिस पर हमला किया था। ऐसे में अब सवाल यह उठता है कि किसी अपराधी को मारने के लिए पुलिस किन परिस्थितियों में एनकाउंटर कर सकती है? आइए जानते हैं किन पस्थितियों में अपराधी को गोली मार सकती है पुलिस बता दें कि 9 मार्च, 1997 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजे गए पत्र में उस समय के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एमएन वेंकटचेलैय्या ने बताया था कि केवल दो ही परिस्थितियों में पुलिस घातक बल का उपयोग कर सकती है। आइये जानते हैं क्या हैं वो परिस्थितियां.... पहली स्थिति आपराधिक मामलों में निजी प्रतिरक्षा का अधिकार एक अहम एवं जरूरी अधिकार है। यह अधिकार व्यक्ति विशेष को अपना बचाव करने के लिए प्रेरित करता है और यह प्रावधान उसे आवश्यक बल का उपयोग करके अपने हमलावर पर अपनी जीत को सुरक्षित करने का अधिकार देता है। देशभर में मुठभेड़ों के अधिकतर मामलों में पुलिस यही दलील देती है। दूसरी स्थिति सीआरपीसी की धारा 46 के तहत पुलिस अधिकारी किसी अन्य व्यक्ति की मौत के कारणों को सही ठहरा सकते हैं। यह प्रावधान पुलिस को बल प्रयोग करने के लिए अधिकृत करता है। किसी प्रकार के खास मामले में मुठभेड़ में मौत का कारण दो स्थितियों में से किसी एक के तहत उचित नहीं ठहराया जा सकता है, उसे सिर्फ जांच से ही सही ठहराया जा सकता है अन्यथा नहीं।