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जानिए किस दिन है चैत्र पूर्णिमा, महत्व और पूजा-विधि…

चैत्र पूर्णिमा के दिन प्रभु श्री राम के सबसे बड़े भक्त हनुमान जी का जन्म हुआ था। हनुमान जन्मोत्सव के दिन लोग हनुमान चलीसा, सुंदरकांड पाठ करते हैं। इसलिए इस पूर्णिमा की अहमियत और ज्यादा बढ़ गई है। चैत्र पूर्णिमा के दिन प्रभु श्री विष्णु की आराधना की जाती है। भक्त इस दिन प्रभु श्री विष्णु को खुश करने के लिए व्रत रखते हैं।

By आराधना शर्मा 
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नई दिल्ली: हिंदू धर्म में चैत्र पूर्णिमा की खास अहमियत है। इस बार चैत्र पूर्णिमा 27 अप्रैल 2021 को पड़ रही है। इस दिन को चैत्र पूर्णिमासी या मधु पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन हनुमान जन्मोत्सव भी मनाया जाता है।

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आपको बता दें, चैत्र पूर्णिमा के दिन प्रभु श्री राम के सबसे बड़े भक्त हनुमान जी का जन्म हुआ था। हनुमान जन्मोत्सव के दिन लोग हनुमान चलीसा, सुंदरकांड पाठ करते हैं। इसलिए इस पूर्णिमा की अहमियत और ज्यादा बढ़ गई है। चैत्र पूर्णिमा के दिन प्रभु श्री विष्णु की आराधना की जाती है। भक्त इस दिन प्रभु श्री विष्णु को खुश करने के लिए व्रत रखते हैं।

चैत्र पूर्णिमा शुभ मुहूर्त

  • इस बार हिंदू पंचांग के मुताबिक, नववर्ष की पहली पूर्णिमा 27 अप्रैल 2021 को पड़ रही है।
  • पूर्णिमा तिथि का आरंभ- 26 अप्रैल 2021 सोमवार को दोपहर 12 बजकर 44 मिनट से
  • पूर्णिमा तिथि समाप्त- 27 अप्रैल 2021 मंगलवार प्रातः 09 बजकर 01 मिनट तक रहेगा।

चैत्र पूर्णिमा पूजा विधि

  • चैत्र पूर्णिमा के दिन प्रातः उठकर स्नान करना चाहिए। इसके पश्चात् सूर्य मंत्रों का उच्चारण करते हुए सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए।
  •  भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के पश्चात् व्रत करने का संकल्प लें।
  • इसके पश्चात् विधि- विधान से प्रभु श्री विष्णु की पूजा अर्चना करें तथा उन्हें नैवेद्य चढ़ाएं।
  • इसके अतिरिक्त हनुमान जी की पूजा और चलीसा पढ़ें।
  • हनुमान जी की पूजा करने के पश्चात् भोग लगाएं और आरती करें।

चैत्र पूर्णिमा का महत्व

  • चैत्र पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण का पाठ कराने से घर में सुख- समृद्धि तथा यश आता है। प्रथा है कि पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण का पाठ करने से प्रभु श्री विष्णु खुश होते हैं। इस दिन खास तौर पर प्रभु श्री विष्णु की पूजा होती है।
  • इस दिन हनुमान जन्मोत्सव भी मनाया जाता है। हनुमान जी आपके सभी कष्टों को हर लेते हैं तथा सभी मनोकामानाएं पूर्ण करते हैं।
  • इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

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