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जानें कौन थी वो Miraculous Power? जिनके आगे राजा भैया ही नहीं कभी इंदिरा-अटल भी झुकाते थे सिर

यूपी विधानसभा चुनाव 2022 (UP Assembly Election 2022) में सभी दल अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए सियासी गणित सेट करने में जुटे हुए हैं। यूपी के दबंग विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया (Raghuraj Pratap Singh alias Raja Bhaiya) का जनसत्ता दल (Jansatta Dal) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूरी सक्रियता से लगे हुए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया वोटरों को साधने के लिए संकल्प यात्रा पर निकले हैं।

By संतोष सिंह 
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नई दिल्ली। यूपी विधानसभा चुनाव 2022 (UP Assembly Election 2022) में सभी दल अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए सियासी गणित सेट करने में जुटे हुए हैं। यूपी के दबंग विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया (Raghuraj Pratap Singh alias Raja Bhaiya) का जनसत्ता दल (Jansatta Dal) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूरी सक्रियता से लगे हुए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया वोटरों को साधने के लिए संकल्प यात्रा (Sankalp Yatra) पर निकले हैं।

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‘अगर कोई दल उनके साथ गठबंधन करना चाहता है तो वह इसके लिए भी  हैं तैयार’

रघुराज प्रताप सिंह (Raghuraj Pratap Singh) उर्फ राजा भैया ने कहा कि इस बार के यूपी विधानसभा चुनाव 2022 (UP Assembly Election 2022) में उनकी पार्टी ने प्रदेश की लगभग 100 से ज्यादा सीटें चिन्हित की हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई दल उनके साथ गठबंधन करना चाहता है तो वह इसके लिए भी तैयार हैं। बता दें, राजा भैया खुद भी कुंडा से सात बार चुनाव जीत कर अपनी अलग छवि बना चुके हैं।

राजा भैया (Raja Bhaiya)  की दबंग की छवि हो,लेकिन इकलौती संतान होने के कारण पिता-माताजी ने बहुत ही अनुशासन में रखा

हालांकि इस दौरान राजा भैया (Raja Bhaiya) की जिंदगी में तमाम उतार चढ़ाव भी देखने को मिला है। एक मीडिया इंटरव्यू में अपनी जिंदगी से जुड़े तमाम पहलुओं के बारे में उन्होंने विस्तार से बात करते हुए अपने  पूज्य गुरुजी देवरहा बाबा (Pujya Guruji Devaraha Baba) के बारे में भी बताया । उन्होंने कहा कि यहां हम उनका उल्लेख करना चाहेंगे जिनका आशीर्वाद सदैव हमारे सिर पर रहता है। राजा भैया ने बताया कि हम आज जो भी बन पाएं हैं, वो सिर्फ उनके आशीर्वाद के कारण ही बन पाए हैं। उनकी कृपा से ही हमने जीवन में सब कुछ हासिल किया है। यही वजह है कि हम कुछ भी नए कार्य को शुरू करने से पहले उनका आशीर्वाद जरूर लेते हैं। यूपी में भले ही राजा भैया (Raja Bhaiya)  की दबंग की छवि हो,लेकिन उन्होंने बताया कि इकलौती संतान होने के कारण पिता-माताजी ने बहुत ही अनुशासन में मेरा पालन पोषण किया था।

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पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी थे इनके उपासक

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Former Prime Minister Indira Gandhi) भी देवरहा बाबा के आगे सिर झुकाती थी। इनमें पूर्व पीएम इंदिरा से लेकर पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी (Former PM Atal Bihari Vajpayee) तक शामिल हैं। साल 1977 में जब इंदिरा गांधी चुनाव हार गई थीं, तब वे देवरहा बाबा से आशीर्वाद लेने गई थीं। बाबा ने उन्हें हाथ उठाकर पंजे से आशीर्वाद दिया था।

देवरहा बाबा ने उन्हें हाथ उठाकर पंजे से दिया आशीर्वाद , इसके बाद इंदिरा ने कांग्रेस का निशान पंजा ही तय किया

यही वजह थी कि जब इंदिरा ने चुनाव लड़ा तो उन्होंने कांग्रेस का निशान पंजा ही तय किया था। साल 1980 में हुए चुनावों में इंदिरा गांधी (Indira Gandhi)  को शानदार जीत मिली और एक बार फिर उनकी सत्ता में वापसी हुई थी। इसके अलावा कई अन्य मौकों पर भी इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) को देवरहा बाबा (Devaraha Baba) के साथ देखा गया था।

1984 के चुनाव में BJP की करारी हार के  बाद अटल जी देवरहा बाबा से लिया आशीर्वाद देश के प्रधानमंत्री तक बने

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अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) जब साल 1984 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की करारी हार हुई थी। बता दें कि साल 1986 में अटल जी खोया हुआ जनसमर्थन हासिल करने के उद्देश्य से पूर्वांचल के दौरे पर निकले थे। वह इससे पहले भी देवरिया आते रहते थे। अक्सर देवरहा बाबा (Devaraha Baba)  का आशीर्वाद लेते थे। उन दिनों भी वह यहां आए और देवरहा बाबा (Devaraha Baba)  का आशीर्वाद लिया। इसके बाद पार्टी की स्थिति मजबूत हुई और आगे चलकर अटल जी देश के प्रधानमंत्री तक बने।

जानें कौन थे देवरहा बाबा?

देवरहा बाबा (Devaraha Baba)  का जन्म देवरिया में हुआ था। उन्होंने 19 जून 1990 को शरीर छोड़ दिया था। उनके अनुयायी मानते हैं कि वह करीब 500 साल तक जिंदा थे। उनमें कई चमत्कारी शक्तियां (Miraculous Power) भी थीं। कहा जाता है कि देवरहा बाबा (Devaraha Baba) ने कभी किसी गाड़ी से सफर नहीं किया था। उनके मचान पर कोई प्रसाद नहीं होने के बाद भी वह लोगों को अपने हाथ से प्रसाद दे दिया करते थे। इसके अलावा देवरहा बाबा (Devaraha Baba) मनुष्य के अलावा वह जानवरों और पक्षियों की भाषा को भी समझते थे। यह दावा उनके भक्त करते थे।

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