सरोज खान ने क्यों अपनाया था इस्लाम, ऐसा रहा निर्मला नागपाल से सरोज खान तक का सफर…

SAROJ KQ

बीती रात सरोज खान के निधन से इंडस्ट्री के में शोक फ़ैल गया, हर स्टार ने सरोज श्रद्धांजलि दी. लेकिन सरोज खान को सबसे ज्यादा माधुरी के करीब बताया जा रहा है, लेकिन अब हम एक ऐसी बात का खुलासा करने जा रहें है जो शायद आपको भी न पता हो.

Know Why Saroj Khan Had Adopted Islam This Question Was Often Asked :

सरोज खान का असली नाम निर्मला नागपाल था। सरोज के पिता का नाम किशनचंद और मां का नाम नोनी सद्धू सिंह है। विभाजन के बाद सरोज खान का परिवार पाकिस्तान से भारत आ गया था। कई लोगों इस पर आश्चर्य करते हैं कि वे सरोज ‘खान’ कैसे बन गईं? दरअसल सरोज ने इस्लाम धर्म भी कबूल किया था।

सरोज खान के अनुसार मैंने अपनी मर्जी से इस्लाम धर्म कबूल किया था। उस वक्त मुझसे कई लोगों ने पूछा कि मुझ पर कोई दबाव तो नहीं है लेकिन ऐसा नहीं था। मुझे इस्लाम धर्म से प्रेरणा मिलती है।

कोरियोग्राफर बी.सोहनलाल से की शादी

50 के दशक में सरोज ने बतौर बैकग्राउंड डांसर काम करना शुरू कर दिया था। उन्होंने कोरियोग्राफर बी. सोहनलाल के साथ ट्रेनिंग ली थी। इसी दौरान उनके बीच प्यार हुआ और सिर्फ 13 साल की उम्र में सरोज ने 43 साल के बी. सोहनलाल से शादी कर ली थी। दोनों की उम्र में 30 साल का फासला था।

सोहनलाल की ये दूसरी शादी थी। पहली शादी से उनके चार बच्चे थे। वहीं सरोज से शादी के वक्त सोहनलाल ने अपनी पहली शादी की बात नहीं बताई थी। सरोज खान ने एक इंटरव्यू में बताया था कि मैं उन दिनों स्कूल में पढ़ती थी तभी एक दिन मेरे डांस मास्टर सोहनलाल ने गले में काला धागा बांध दिया था और मेरे शादी हो गई थी।

 इस वजह से बढ़ी थी पति से दूरी  

1963 में सरोज खान के बेटे हामिद (जो अब राजू के नाम से प्रसिद्ध है) का जन्म हुआ तब उन्हें सोहनलाल की शादीशुदा जिंदगी के बारे में पता चला। बच्चों के जन्म के बाद सोहनलाल ने उन्हें अपना नाम देने से इनकार कर दिया। इसके बाद सरोज खान और सोहनलाल के बीच दूरियां आ गईं।

बीती रात सरोज खान के निधन से इंडस्ट्री के में शोक फ़ैल गया, हर स्टार ने सरोज श्रद्धांजलि दी. लेकिन सरोज खान को सबसे ज्यादा माधुरी के करीब बताया जा रहा है, लेकिन अब हम एक ऐसी बात का खुलासा करने जा रहें है जो शायद आपको भी न पता हो. सरोज खान का असली नाम निर्मला नागपाल था। सरोज के पिता का नाम किशनचंद और मां का नाम नोनी सद्धू सिंह है। विभाजन के बाद सरोज खान का परिवार पाकिस्तान से भारत आ गया था। कई लोगों इस पर आश्चर्य करते हैं कि वे सरोज 'खान' कैसे बन गईं? दरअसल सरोज ने इस्लाम धर्म भी कबूल किया था। सरोज खान के अनुसार मैंने अपनी मर्जी से इस्लाम धर्म कबूल किया था। उस वक्त मुझसे कई लोगों ने पूछा कि मुझ पर कोई दबाव तो नहीं है लेकिन ऐसा नहीं था। मुझे इस्लाम धर्म से प्रेरणा मिलती है।

कोरियोग्राफर बी.सोहनलाल से की शादी

50 के दशक में सरोज ने बतौर बैकग्राउंड डांसर काम करना शुरू कर दिया था। उन्होंने कोरियोग्राफर बी. सोहनलाल के साथ ट्रेनिंग ली थी। इसी दौरान उनके बीच प्यार हुआ और सिर्फ 13 साल की उम्र में सरोज ने 43 साल के बी. सोहनलाल से शादी कर ली थी। दोनों की उम्र में 30 साल का फासला था। सोहनलाल की ये दूसरी शादी थी। पहली शादी से उनके चार बच्चे थे। वहीं सरोज से शादी के वक्त सोहनलाल ने अपनी पहली शादी की बात नहीं बताई थी। सरोज खान ने एक इंटरव्यू में बताया था कि मैं उन दिनों स्कूल में पढ़ती थी तभी एक दिन मेरे डांस मास्टर सोहनलाल ने गले में काला धागा बांध दिया था और मेरे शादी हो गई थी।

 इस वजह से बढ़ी थी पति से दूरी  

1963 में सरोज खान के बेटे हामिद (जो अब राजू के नाम से प्रसिद्ध है) का जन्म हुआ तब उन्हें सोहनलाल की शादीशुदा जिंदगी के बारे में पता चला। बच्चों के जन्म के बाद सोहनलाल ने उन्हें अपना नाम देने से इनकार कर दिया। इसके बाद सरोज खान और सोहनलाल के बीच दूरियां आ गईं।