जानिए सुबह जल्दी ना जाग पाने का कारण

जानिए सुबह जल्दी ना जाग पाने का कारण

बचपन से हमें बताया जाता है कि सबुह जल्दी जागना फायदेमंद होता है। सुबह के समय की गई पढ़ाई और याद किए गए पाठ ज्यादा समय तक हमें याद रहते हैं। उम्र बढ़ने के साथ सुबह जल्दी उठने के फायदे बदल जाते हैं, लेकिन सबकुछ जानने के बावजूद हम जल्दी उठने की आदत नहीं डाल पाते। वैसे कई अध्ययन हुए हैं जो हमें सुबह उठने के फायदे बताते हैं लेकिन कोई ऐसा फार्मूला आज तक नहीं बना जो हमें जल्दी जागाने में कामयाब हो सके।

आज हम सब अपने मोबाइल के अलार्म फीचर का प्रयोग करते हैं, लेकिन सुबह वाली नींद हमें जागने नहीं देती। जिस मोबाइल को हम दिनभर बड़े प्यार से अपने करीब रखते हैं सुबह के समय जब वही मोबाइल अलार्म बजाता है तब उससे नफरत हो जाती है। अलार्म बंद करके मोबाइल को दूर फेंक देते हैं। शायद हम और आप सभी ऐसा करते रहे हैं, शायद इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद ऐसा नहीं करेंगे। क्योंकि आज हम आपको एक ऐसा तरीका बताने जा रहे हैं जो आपको जल्दी जागने में मदद करेगा, बस ठोड़ी सी ईच्छा शक्ति की जरूरत होगी।

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हम जो फार्मूला आपको बताने जा रहे हैं वह पूरी तरह से वैज्ञानिक है और परखा हुआ है। लेकिन यह उन्हीं लोगों के लिए कारगर है, जो वास्तविकता में सुबह जल्दी उठने की आदत डालकर अपने जीवन में बदलाव लाना चाहते हैं।

पहले काम की बात —

देर तक सोने की आदत के दौरान आपने महसूस किया होगा कि जब आप जागते हैं तब वास्तविकता में हमारा दिमाग हमें जगाता है। हमारा शरीर दिन भर के लक्ष्यों को पूरा करने के डर के साथ उठता है और फिर पूरे दिन वही दिमाग हमें नचाता है। देर से उठने के बाद हमारे सामने बहुत सारे विकल्प होते हैं लेकिन दिमाग चुनता वही है जो सबसे आसान और जल्दी संभव हो।

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इसके उलट देखें तो जब हमारा दिमाग शांत हो और हम जाग जाएं तो दिमाग पूरी तरह से हमारे बस में होता है। यानी हम जिस तरह से उसे चलाना चाहें हमारा दिमाग उस तरह से चलेगा। हमें सुबह जिम जाना है या टहलने हम तय करेंगे। हमें चाय पीना है या दूध या​ फिर दोनों ये हम तय करेंगे। क्योंकि इस स्थिति में दिमाग हमारे नियंत्रण में होगा।

पहली स्थिति हमें आधुनिक जरूर बनाती है, लेकिन हम पर हमारे दिमाग का नियंत्रण होता है, रोबोट की तरह। दूसरी स्थिति में हमारा दिमाग हमारे हिसाब से चलता है। जिसकी हर क्रिया या प्रतिक्रिया पर हमारा नियंत्रण होता है, हम जो करते हैं वही सोचते है। यानी एकाग्रता रहती है।

अब जानिए क्या है फार्मूला —

वैज्ञानिक शोध के अनुसार जब हम सोते हैं तो हमारा दिमाग 75 फीसदी नि​ष्क्रीय होता है, विशेषकर सुबह के समय। यानी हम 25 प्रतिशत दिमाग के साथ अपने बिस्तर पर मौजूद होते हैं। दिमाग की यही 25 फीसदी सक्रियता अलार्म बजने के बाद हमसे अलार्म तो बंद करवा देती है लेकिन जागने से रोकती है। इसलिए जरूरी है कि हम अलार्म बजने के बाद अपने दिमाग की सक्रियता को 50 फीसदी तक बढ़ाएं। जिसके लिए हमें अपने शरीर को सक्रिय करना होता है।

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इसके लिए हमें सबसे पहले उठकर बैठना चाहिए और आंखे खोलकर अपने आस पास के माहौल को ध्यान से देखना चाहिए। जिसके लिए आसान सा तरीका है कि मोबाइल को खुद से दूर रखें ताकि आप लेटे लेट उस तक न पहुंच सकें। ताकि जब अलार्म बजे तो आप को बिस्तर से निकल कर अपने अलार्म को बंद करने के लिए जाना पड़े।

जब आप अपना अलार्म बंद कर लें उसके बाद बिस्तर में वापस न जाएं। अपने कमरे का बल्ब आॅन करें और संभव हो तो अपने घर का एक चक्कर मारें और मुंह को धोकर। वॉलकनी या खिड़की से बाहर के दृश्य को देखें मौसम का जायजा लें।

यदि आप स्कूल गोइंग स्टूडेंट हैं तो आपको चाहिए कि आप सुबह उठकर अपनी किताबों पर रात भर में जमी धूल को झाड़ लें और पढ़ाई के स्थान को व्यवस्थित कर लें। ताकि नित्यकर्म से निपटने के दौरान जोकि सोचने का सबसे अच्छा समय होता है में अपनी दिनभर की योजना तैयार कर लें।

वहीं अगर आप कालेज गोईंग या वर्किंग हैं तो सबसे बेहतर है कि आप सुबह 2 से 3 किमी की एक सैर पर निकल जाएं। लेकिन याद रहे यह सैर बाइक या कार से नहीं होनी चाहिए। इस दौरान आप अपने दिन भर की रणनीति तैयार कर सकते हैं, जैसे कितने बजे आॅफिस या कालेज निकलना है, किससे मिलना है, कौन सा जरूरी काम है जो प्राथमिकता पर निपटाना है।

जल्दी उठाने के फायदे—

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1— सुबह की ताजी हवा आपके स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होती है, जो घर के बंद खिड़की दरवाजों की वजह से सोते समय आपको नहीं मिल पाती।
2— आपके पास अपना दिन शुरू करने से पहले प्लानिंग के लिए भरपूर समय होता है।
3— आप अपने परिवार को समय दे पाते हैं और सुबह की भागम भाग से बच जाते हैं।
4— सारे दिन आपको एनर्जी लेविल हाई रहता है।
5— मानसिक अवसाद यानी डिप्रेसन नहीं होता या फिर डिप्रेसन दूर होता है।

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