नई दिल्ली। त्रिपुरा के बेलोनिया क्षेत्र में रूसी क्रांति के जनक ब्लादिमीर लेनिन की मूर्ति गिराए जाने के बाद, कोलकाता में बामपंथी छात्र संगठन के सदस्यों ने मंगलवार को भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया और प्रतिमा पर कालिख पोत दी। पुलिस ने केओराटोला कब्रिस्तान में हुई इस घटना के मामले में समूह के छह सदस्यों को हिरासत में ले लिया है।

घटना की सूचना पाते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और मूर्ति को साफ करने में लग गई है। यहां से एक पोस्टर भी मिला है जिस पर एक संदेश भी लिखा मिला है।

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पश्चिम बंगाल भाजपा के महासचिव सयांतन बसु ने एक बयान में कहा, “हम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने के कृत्य की निंदा करते हैं और अपराधियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग करते हैं और साथ ही यह संदेश भी देना चाहते हैं कि आप इस शर्मनाक कृत्य से पश्चिम बंगाल के निर्माण में मुखर्जी के योगदान को मिटा नहीं सकते।” बसु ने मुखर्जी की प्रतिमा की पुर्नस्थापना की बात करने की बात भी कही है।

गौरतलब है कि प्रतिमाओं को गिराने का यह सिलसिला सोमवार को त्रिपुरा में लेनिन की प्रतिमा ढहाए जाने के बाद शुरू हुआ, जिसके बाद तमिलनाडु में द्रविड़ आंदोलन के संस्थापक ई.वी.आर.रामासामी की प्रतिमा ढहा दी गई और अब कोलकाता में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा को नष्ट किया गया।

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वहीं गृह मंत्रालय ने भी राज्‍यों को एडवायजरी जारी करते हुए ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने को कहा गया। गृह मंत्रालय ने कहा कि ऐसे कृत्‍यों में शामिल लोगों के खिलाफ कानून की उचित धाराओं के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। गृह मंत्रालय ने कहा कि मूर्तियों को क्षतिग्रस्त करने वालों को किसी भी सूरत में छोड़ा नहीं जाएगा।