राजकोट में भी राजस्थान के कोटा जैसा कहर, सिविल अस्पताल में 134 बच्चों ने दिसंबर में तोड़ा दम

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गुजरात के राजकोट में भी कोटा जैसा कहर, सिविल अस्पताल में 134 बच्चों ने दिसंबर में तोड़ा दम

नई दिल्ली। राजस्थान के कोटा में मासूम बच्चों की मौत का सिलसिला अभी थमा नहीं है। वहां पर 110 बच्चे दम तोड़ चुके हैं। इस बीच गुजरात के राजकोट से भी एक चौकाने वाला आकंडा सामने आया है। बताया जा रहा है कि पिछले महीने यानी दिसंबर माह में वहां पर 134 बच्चों ने दम तोड़ दिया है। हालांकि, इसके पीछे की वजह कुपोषण, जन्म से ही बीमारी, वक्त से पहले जन्म और मां का खुद कुपोषित होना बताया गया है।

Kota Like Havoc In Rajkot Gujarat 134 Children Died In Civil Hospital In December :

बताया गया है कि राजकोट के सिविल अस्पताल में में मृत हुए सभी बच्चे नवजात थे। अस्पताल के एनआईसीयू में ढाई किलो से कम वजन वाले बच्चों को बचाने की व्यवस्थाएं और क्षमता ही नहीं है। गौरतलब है कि, राजस्थान के कोटा में अभी तक करीब 110 बच्चों ने दम तोड़ दिया है।

कोटा स्थित जेके लोन अस्पताल में लगाता यह आकंड़ा बढ़ता ही जा रहा है। विशेषज्ञों की टीम ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि हाइपोथर्मिया (शरीर का तापमान असंतुलित हो जाना) के कारण बच्चों की मौत हुई है। अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं की कमी भी इसकी वजह हो सकती है।

राजस्थान सरकार द्वारा बच्चों की मौतों के कारण का पता लगाने के लिए गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट में पुष्टि की है कि हाइपोथर्मिया के कारण शिशुओं की मौत हुई है। वहीं, राजस्था में बच्चों की मौत पर विपक्ष गहलोत सरकार पर हमलावर है। वह सरकार पर लगातार सवाल खड़े कर रहे हैं।

नई दिल्ली। राजस्थान के कोटा में मासूम बच्चों की मौत का सिलसिला अभी थमा नहीं है। वहां पर 110 बच्चे दम तोड़ चुके हैं। इस बीच गुजरात के राजकोट से भी एक चौकाने वाला आकंडा सामने आया है। बताया जा रहा है कि पिछले महीने यानी दिसंबर माह में वहां पर 134 बच्चों ने दम तोड़ दिया है। हालांकि, इसके पीछे की वजह कुपोषण, जन्म से ही बीमारी, वक्त से पहले जन्म और मां का खुद कुपोषित होना बताया गया है। बताया गया है कि राजकोट के सिविल अस्पताल में में मृत हुए सभी बच्चे नवजात थे। अस्पताल के एनआईसीयू में ढाई किलो से कम वजन वाले बच्चों को बचाने की व्यवस्थाएं और क्षमता ही नहीं है। गौरतलब है कि, राजस्थान के कोटा में अभी तक करीब 110 बच्चों ने दम तोड़ दिया है। कोटा स्थित जेके लोन अस्पताल में लगाता यह आकंड़ा बढ़ता ही जा रहा है। विशेषज्ञों की टीम ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि हाइपोथर्मिया (शरीर का तापमान असंतुलित हो जाना) के कारण बच्चों की मौत हुई है। अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं की कमी भी इसकी वजह हो सकती है। राजस्थान सरकार द्वारा बच्चों की मौतों के कारण का पता लगाने के लिए गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट में पुष्टि की है कि हाइपोथर्मिया के कारण शिशुओं की मौत हुई है। वहीं, राजस्था में बच्चों की मौत पर विपक्ष गहलोत सरकार पर हमलावर है। वह सरकार पर लगातार सवाल खड़े कर रहे हैं।