krishna janmashtami 2018: न रख पाएं व्रत तो इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा

Lord krishna
krishna janmashtami 2018: न रख पाएं व्रत तो इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा

लखनऊ। देशभर के अलग-अलग शहरों के मंदिरों, आश्रमों और अन्य स्थलों पर कृष्ण जन्मोत्सव की तैयारी पूरी हो चुकी हैं। इस बार जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि रोहिणी नक्षत्र व वृषभ लग्न का अद्भुत संयोग बन रहा है सभी भक्तजन भगवान श्रीकृष्ण की कृपा पाने के लिए पूरे दिन उपवास रखते हैं सच्चे मन से भगवान की पूजा-अर्चना करते हैं। कई स्थानों पर रात्रि जागरण और श्रीकृष्ण के नाम पर भजन-कीर्तन होता हैं। लेकिन अगर आप किसी कारणवश व्रत नहीं रख पा रहे हैं तो शाम को पड़ने वाले शुभ मुहूर्त में पूजन करें।

Krishna Janmashtami 2018 3rd September Shubh Muhurat :

ज्योतिषियों का कहना है कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर अद्भुत संयोग बन रहा है। यह कोई आम संयोग नहीं था बल्कि वह संयोग है जैसा द्वापर युग में उनके जन्म के समय बना था। भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि में रात्रि 12 बजे रोहिणी नक्षत्र हो, सूर्य सिंह राशि में हो तथा चंद्रमा वृष राशि में हो तब यह योग बनता है। 3 सितंबर को अष्टमी व रोहिणी नक्षत्र का संयोग शाम 7:20 बजे तक रहेगा और इस समय तक पूजा करना बेहद शुभ माना जाएगा।

अष्टमी तिथि समाप्त – 3 सितंबर को शाम 7:20 बजे तक
रोहिणी नक्षत्र समाप्त – 3 सितंबर को रात्रि 8:05 बजे तक

लखनऊ। देशभर के अलग-अलग शहरों के मंदिरों, आश्रमों और अन्य स्थलों पर कृष्ण जन्मोत्सव की तैयारी पूरी हो चुकी हैं। इस बार जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि रोहिणी नक्षत्र व वृषभ लग्न का अद्भुत संयोग बन रहा है सभी भक्तजन भगवान श्रीकृष्ण की कृपा पाने के लिए पूरे दिन उपवास रखते हैं सच्चे मन से भगवान की पूजा-अर्चना करते हैं। कई स्थानों पर रात्रि जागरण और श्रीकृष्ण के नाम पर भजन-कीर्तन होता हैं। लेकिन अगर आप किसी कारणवश व्रत नहीं रख पा रहे हैं तो शाम को पड़ने वाले शुभ मुहूर्त में पूजन करें। ज्योतिषियों का कहना है कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर अद्भुत संयोग बन रहा है। यह कोई आम संयोग नहीं था बल्कि वह संयोग है जैसा द्वापर युग में उनके जन्म के समय बना था। भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि में रात्रि 12 बजे रोहिणी नक्षत्र हो, सूर्य सिंह राशि में हो तथा चंद्रमा वृष राशि में हो तब यह योग बनता है। 3 सितंबर को अष्टमी व रोहिणी नक्षत्र का संयोग शाम 7:20 बजे तक रहेगा और इस समय तक पूजा करना बेहद शुभ माना जाएगा। अष्टमी तिथि समाप्त - 3 सितंबर को शाम 7:20 बजे तक रोहिणी नक्षत्र समाप्त - 3 सितंबर को रात्रि 8:05 बजे तक