कृष्णानंद राय हत्याकांड में आये निचली अदालत के फैसले को दी गयी दिल्ली HC में चुनौती

Krishnanand Rai
कृष्णानंद राय हत्याकांड में आये निचली अदालत के फैसले को दी गयी दिल्ली HC में चुनौती

नई दिल्ली। बीजेपी के पूर्व विधायक कृष्णानन्द राय की 2005 में गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गयी थी। जिसके बाद मुख्तार अंसारी, मुन्ना बजरंगी समेत कई लोगों पर हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था। लेकिन कुछ दिनो पहले आये निचली अदालत के फैंसले में दोषियों को बरी कर दिया गया। अ​ब निचली अदालत के आये फैसले को कृष्णानन्द राय की पत्नी अलका राय ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले को स्वीकार करते हुए 28 नवम्बर तक सभी पक्षों से जवाब मांगा है।

Krishnanand Rai Murder Case Trial Court Verdict Challenged In Delhi Hc :

आपको बता दें कि 29 नवम्बर 2005 में हुए कृष्णानंद राय हत्याकाण्ड में संजीव माहेश्वरी, एजाजुल हक़, मुख्तार अंसारी, अफ़ज़ाल अंसारी, राकेश पांडेय, रामु मल्लाह, मंसूर अंसारी और मुन्ना बजरंगी के खिलाफ मुकमदा दर्ज किया गया था। इस मामले को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से दिल्ली कोर्ट में स्थानांतरण कर दिया गया था। लेकिन दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया था जबकि मुन्ना बजरंगी की बीते दिनों जेल में हत्या कर दी गई थी।

मोहम्मदाबाद की विधायक अलका राय ने कहा, ” मैं न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा करती हूं। न्याय पाने के लिए मामले को न्यायालय में दाखिल किया गया है। भरोसा है कि न्याय मिलेगा और हत्यारों को सजा अवश्य मिलेगी।”

ये था मामला
आपको बता दें भाजपा नेता कृष्णानंद राय गाजीपुर के मोहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र में आने वाले गोंडूर गांव के रहने वाले थे। 2002 में मोहम्मदाबाद सीट पर हुए चुनाव में उन्होने मुख्तार के भाई अफजाल को हरा दिया। इसी से अंसारी बंधुओं और उनके बीच वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो गयी। 13 जनवरी, 2004 को मुख्तार अंसारी और कृष्णानंद राय के बीच जब लखनऊ के कैंट इलाके में मुटभेड़ हुई तब राय को अंसारी बंधुआ से जान का खतरा होने लगा। उन्होने उत्तर प्रदेश सरकार से सुरक्षा भी मांगी लेकिन सरकार ने नजरंदाज कर दिया। और इसका नतीजा ये हुआ कि 29 नवंबर, 2005 को गाजीपुर में राय की हत्या कर दी गयी।

नई दिल्ली। बीजेपी के पूर्व विधायक कृष्णानन्द राय की 2005 में गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गयी थी। जिसके बाद मुख्तार अंसारी, मुन्ना बजरंगी समेत कई लोगों पर हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था। लेकिन कुछ दिनो पहले आये निचली अदालत के फैंसले में दोषियों को बरी कर दिया गया। अ​ब निचली अदालत के आये फैसले को कृष्णानन्द राय की पत्नी अलका राय ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले को स्वीकार करते हुए 28 नवम्बर तक सभी पक्षों से जवाब मांगा है। आपको बता दें कि 29 नवम्बर 2005 में हुए कृष्णानंद राय हत्याकाण्ड में संजीव माहेश्वरी, एजाजुल हक़, मुख्तार अंसारी, अफ़ज़ाल अंसारी, राकेश पांडेय, रामु मल्लाह, मंसूर अंसारी और मुन्ना बजरंगी के खिलाफ मुकमदा दर्ज किया गया था। इस मामले को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से दिल्ली कोर्ट में स्थानांतरण कर दिया गया था। लेकिन दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया था जबकि मुन्ना बजरंगी की बीते दिनों जेल में हत्या कर दी गई थी। मोहम्मदाबाद की विधायक अलका राय ने कहा, '' मैं न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा करती हूं। न्याय पाने के लिए मामले को न्यायालय में दाखिल किया गया है। भरोसा है कि न्याय मिलेगा और हत्यारों को सजा अवश्य मिलेगी।'' ये था मामला आपको बता दें भाजपा नेता कृष्णानंद राय गाजीपुर के मोहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र में आने वाले गोंडूर गांव के रहने वाले थे। 2002 में मोहम्मदाबाद सीट पर हुए चुनाव में उन्होने मुख्तार के भाई अफजाल को हरा दिया। इसी से अंसारी बंधुओं और उनके बीच वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो गयी। 13 जनवरी, 2004 को मुख्तार अंसारी और कृष्णानंद राय के बीच जब लखनऊ के कैंट इलाके में मुटभेड़ हुई तब राय को अंसारी बंधुआ से जान का खतरा होने लगा। उन्होने उत्तर प्रदेश सरकार से सुरक्षा भी मांगी लेकिन सरकार ने नजरंदाज कर दिया। और इसका नतीजा ये हुआ कि 29 नवंबर, 2005 को गाजीपुर में राय की हत्या कर दी गयी।