कृष्णपाल सिंह ऐसे बने स्वामी चिन्मयानंद

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कृष्णपाल सिंह ऐसे बने स्वामी चिन्मयानंद

लखनऊ। अटल बिहारी बाजपेई सरकार में केंद्रीय गृहराज्य मंत्री रहे स्वामी चिन्मयानंद को एसआईटी ने शुक्रवार को छात्रा से दुष्कर्म के आरोपों पर गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला बीते अगस्त से ही चल रहा है। कई दशक के राजनैतिक जीवन के बावजूद बहुत से लोग अभी त​क नहीं जानते कि आखिर में स्वामी चिन्मयानंद कौन हैं?
आज हम आपको बताएंगे कि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के करीबी स्वामी चिन्मयानंद देश के गृहराज्यमंत्री कैसे बने और शाहजहांपुर में अपना इतना विशाल साम्राज्य कैसे खड़ा किया।

Krishnapal Singh Became Swami Chinmayanand :

रेप के आरोप में गिरफ्तार स्वामी चिन्मयानंद मूलरूप से यूपी के गोंडा के रहने वाले हैं। स्वामी चिन्मयानंद का जन्म 3 मार्च 1947 को गोंडा में हुआ था। उनका ताल्लुक अवध के राज परिवार से भी है। अब भले ही इन्हें स्वामी चिन्मयानंद के नाम से जाना जाता है लेकिन इनका असली नाम कृष्णपाल सिंह है। चिन्मयानंद ने लखनऊ विश्वविद्यालय से एमए की पढ़ाई की है। वह भाजपा के कद्दावर नेताओं में शुमार हैं। कहा जाता है कि युवावस्था में उन्होंने बुद्ध और महावीर से प्रभावित होने के बाद राज परिवार से अपना ताल्लुक तोड़ लिया।

बात राजनीति की करें तो चिन्मयानंद भाजपा के टिकट पर पहली बार उत्तर प्रदेश की बदायूं लोकसभा सीट से 1991 में चुनाव जीते थे। इसके सात साल बाद 1998 में वह यूपी के मछलीशहर और 1999 में जौनपुर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। इसके बाद वह अटल सरकार में केंद्रीय गृहराज्य मंत्री भी बने।

सांसद और मंत्री रहने के अलावा चिन्मयानंद ने राम मंदिर आंदोलन में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस आंदोलन में चिन्मयानंद ने गोरखपुर की गोरक्षा पीठ के महंत और पूर्व सांसद अवैद्यनाथ के साथ मिलकर बड़ी भूमिका निभाई थी।
कहा जाता है कि चिन्मयानंद के सांसद बनने में अहम भूमिका निभाने वाले महंत अवैद्यनाथ ही थे। यही वजह है कि वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भी काफी करीब हैं। जब 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा को ऐतिहासिक जीत मिली तो वो चिन्मयानंद ही थे जिन्होंने मुख्यमंत्री के पद के लिए योगी आदित्यनाथ का नाम आगे किया था।

72 वर्षीय चिन्मयानंद शाहजहांपुर में स्थित अपने एसएस लॉ कॉलेज को यूनिवर्सिटी बनाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने योगी सरकार को राजी भी कर लिया था। इस बीच इसी कॉलेज की एक छात्रा ने उनके खिलाफ वीडियो जारी कर यौन शोषण और दुष्कर्म जैसे बड़े आरोप लगा दिए। आपको बता दें कि इससे पहले साल 2011 में भी एक महिला ने उन पर दुष्कर्म के आरोप लगाए थे।

लखनऊ। अटल बिहारी बाजपेई सरकार में केंद्रीय गृहराज्य मंत्री रहे स्वामी चिन्मयानंद को एसआईटी ने शुक्रवार को छात्रा से दुष्कर्म के आरोपों पर गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला बीते अगस्त से ही चल रहा है। कई दशक के राजनैतिक जीवन के बावजूद बहुत से लोग अभी त​क नहीं जानते कि आखिर में स्वामी चिन्मयानंद कौन हैं? आज हम आपको बताएंगे कि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के करीबी स्वामी चिन्मयानंद देश के गृहराज्यमंत्री कैसे बने और शाहजहांपुर में अपना इतना विशाल साम्राज्य कैसे खड़ा किया। रेप के आरोप में गिरफ्तार स्वामी चिन्मयानंद मूलरूप से यूपी के गोंडा के रहने वाले हैं। स्वामी चिन्मयानंद का जन्म 3 मार्च 1947 को गोंडा में हुआ था। उनका ताल्लुक अवध के राज परिवार से भी है। अब भले ही इन्हें स्वामी चिन्मयानंद के नाम से जाना जाता है लेकिन इनका असली नाम कृष्णपाल सिंह है। चिन्मयानंद ने लखनऊ विश्वविद्यालय से एमए की पढ़ाई की है। वह भाजपा के कद्दावर नेताओं में शुमार हैं। कहा जाता है कि युवावस्था में उन्होंने बुद्ध और महावीर से प्रभावित होने के बाद राज परिवार से अपना ताल्लुक तोड़ लिया। बात राजनीति की करें तो चिन्मयानंद भाजपा के टिकट पर पहली बार उत्तर प्रदेश की बदायूं लोकसभा सीट से 1991 में चुनाव जीते थे। इसके सात साल बाद 1998 में वह यूपी के मछलीशहर और 1999 में जौनपुर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। इसके बाद वह अटल सरकार में केंद्रीय गृहराज्य मंत्री भी बने। सांसद और मंत्री रहने के अलावा चिन्मयानंद ने राम मंदिर आंदोलन में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस आंदोलन में चिन्मयानंद ने गोरखपुर की गोरक्षा पीठ के महंत और पूर्व सांसद अवैद्यनाथ के साथ मिलकर बड़ी भूमिका निभाई थी। कहा जाता है कि चिन्मयानंद के सांसद बनने में अहम भूमिका निभाने वाले महंत अवैद्यनाथ ही थे। यही वजह है कि वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भी काफी करीब हैं। जब 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा को ऐतिहासिक जीत मिली तो वो चिन्मयानंद ही थे जिन्होंने मुख्यमंत्री के पद के लिए योगी आदित्यनाथ का नाम आगे किया था। 72 वर्षीय चिन्मयानंद शाहजहांपुर में स्थित अपने एसएस लॉ कॉलेज को यूनिवर्सिटी बनाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने योगी सरकार को राजी भी कर लिया था। इस बीच इसी कॉलेज की एक छात्रा ने उनके खिलाफ वीडियो जारी कर यौन शोषण और दुष्कर्म जैसे बड़े आरोप लगा दिए। आपको बता दें कि इससे पहले साल 2011 में भी एक महिला ने उन पर दुष्कर्म के आरोप लगाए थे।