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कुम्भ 2019: ओडीएफ के दावों की उड़ी धज्जियां, अधूरे शौचालयों की वजह से खुले में जाने को मजबूर श्रद्धालु

By टीम पर्दाफाश 
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लखनऊ। एक तरफ यूपी सरकार प्रदेश भर में खुले में शौच मुक्त(ओडीएफ़) होने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ देश के सबसे बड़े पर्व कुम्भ में इन दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। कुंभ मेला क्षेत्र में करीब सवा लाख शौचालयों की स्थापना की जानी थी, जो अभी भी अधूरी है। समुचित शौचालयों का निर्माण ना होने की वजह से श्रद्धालु हाथ में लोटा लेकर बाहर जाने को मजबूर हैं। खुले में शौच किए जाने से ओडीएफ दावों की धज्जियां उड़ रही हैं।

स्वच्छता के ये दावे मोदी सरकार के स्वच्छ भारत अभियान की अहमियत के मद्देनजर किए गए हैं और विज्ञापनों के माध्यम से इसका खूब प्रचार किया गया। लेकिन, मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर मंगलवार को कुंभ के प्रथम शाही स्नान के दौरान बड़ी संख्या में लोग खुले में शौच करते देखे गए। वहीं यहां आने वाले श्रद्धालु कह रहे हैं कि मेला लगा है लेकिन खाने को नही, पंडाल लगा है लेकिन कंबल नहीं और टॉयलेट बने हैं लेकिन पानी नहीं है।

शौचालय के लिए परेशान घूम रहे संस्थाओं में निंबार्काचार्य मुकुंददेवाचार्य पीठ के हरिव्यासी मिथिला अव्यवस्था से काफी क्षुब्ध हैं। सेक्टर 14 में दस शीटर शौचालय अधूरा है। यहां आसपास पांच सौ से अधिक धर्मार्थी रह रहे हैं। दुर्गंध के कारण वहां खड़ा होना मुश्किल है। कुंभ मेले के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सरकारी खजाने से 4,200 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद (अब तक का सर्वाधिक खर्च) भी स्वच्छता के ऐसे हालात पर सवाल उठते हैं।

शहर की गलियों और घाटों के पास शौचालयों को देखकर लगता है कि तैयारी की गई है, लेकिन पानी की कमी के कारण कई शौचालय काम नहीं कर रहे हैं।

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