क्या अखिलेश राज में ठगे गए गन्ना किसानों को इंसाफ दिला सकेंगे सीएम योगी

Kya Akhilesh Raaj Me Thage Gaye Ganna Kisano Ko Insaf Dila Sakege Cm Yogi

लखनऊ। यूपी में योगी सरकार बनने के बाद पिछली सरकार के ऐसे कारनामे सामने आ रहे हैं जो पूर्व सीएम अखिलेश यादव के निर्णय लेने की क्षमता पर सवालिया निशान खड़ा कर रहे हैं। ताजा मामला सामने आया गन्ना किसानों को मिलने वाले 2016 करोड़ के ब्याज को माफ कर शुगर मिल मालिकों को लाभ पहुंचाने का। अखिलेश यादव की सरकार के इस निर्णय पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी सवालिया निशान खड़ा करते हुए किसानों के हित के खिलाफ करार दिया है।




एक किसान नेता वीएम सिंह द्वारा गन्ना किसानों को देर से मिलने वाली गन्ने की कीमत पर मिलने वाले ब्याज को मांफ करने वाले यूपी सरकार के निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस याचिका में स्पष्ट किया गया था कि यूपी के गन्ना खरीद कानून के तहत शुगर मिल मालिकों को 14 दिनों के भीतर गन्ने की कीमत का भुगतान किसान को करना जरूरी है। अगर शुगर मिल समय पर भुगतान नहीं करती है तो उसे किसान को ब्याज समेंत भुगतान करना होगा।




इस याचिका में यूपी की तत्कालीन सरकार पर आरोप था कि उसने गन्ना किसानों के हितों की अनदेखी कर, शुगर मिल मालिकों को सीधे तौर पर लाभ पहुंचाने की नियत से तीन पिराई सत्रों का ब्याज मांफ कर दिया। इन तीन सालों में गन्ना किसानों को मिलने वाला यह ब्याज कुल 2016 करोड़ होता है।

याचिका में किसानों के पक्ष को स्पष्ट करते हुए कहा गया था कि यूपी सरकार ने शुगर मिल मालिकों के हित का ध्यान तो रखा लेकिन इस बात की अनदेखी कर दी कि गन्ना किसान किन परिस्थितियों में बैंकों और सहकारी संस्थाओं से किस दर से ब्याज पर ऋण लेकर फसल की लागत जुटाते हैं। ऐसे में गन्ना किसान अपना ऋण चुकाने के लिए शुगर मिलों से मिलने वाले भुगतान पर निर्भर रहता है, भुगतान न मिलने पर किसान को अपने ऋण पर ब्याज देना पड़ता है।




इसी बात को ध्यान में रखते हुए किसानों के लंबित भुगतानों पर ब्याज समेंत भुगतान किए जाने का प्रावधान कानून में किया गया था, लेकिन अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सरकार ने किसानों के हितों का गला घोंटते हुए शुगर मिल मालिकों को सीधा लाभ पहुंचाया। इसके साथ ही याचिकाकर्ता ने शुगर मिलों के मुनाफे के आंकड़े पेश कर यूपी सरकार के सामने बड़ा प्रश्न खड़ा कर दिया। हाईकोर्ट के सामने रखे गए आंकड़ों के मुताबिक यूपी सरकार ने 2013—14, 2014—15 और 2015—16 के ​लिए ​2016 करोड़ का ब्याज मांफ किया था।

शुगर मिलों को इन कालखंडों में भले ही चीनी उत्पादन में हानि हुई हो लेकिन बिजली उत्पादन, इथेनॉल और एल्कोहल के माध्यम से हर मिल ने कई सौ करोड़ का मुनाफा कमाया है। इस लाभ का बड़ा हिस्सा शुगर मिलों ने अपने शेयरधारकों के बीच बांटा भी है। एक मामले में तो ​शुगर मिल मालिक ने मुनाफे के आधार पर कई नई मिलें भी शुरू कर दीं हैं, जबकि कुछ ने नए निवेश किए हैं।




तमाम पहलुओं को ध्यान में रखने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 9 मार्च 2016 को तत्कालीन सरकार के इस फैसले को किसान हितों का हनन करने वाला करार देते हुए रोक लगा दी। इसके साथ ही अदालत ने इस फैसले के लिए उन अधिकारियों की मंशा पर भी सवाल उठाए जिन्होंने ऐसा करने में कुछ गलत नहीं लगा।

किसान हितों के लिए काम करने वाले एक संगठन के वरिष्ठ कार्यकर्ता का कहना है कि शुगर सिंडीकेट इतना बड़ा है और ताकतवर है कि सरकारी विभागों में बैठे अधिकारी और सरकार में बैठे नेता उनके इशारों पर चलते हैं। चन्द लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए लाखों किसानों के हित पर चोट की जाती है। किसान तो समझ भी नहीं पाता कि सरकार ने कौन सा नया कानून बना दिया और कौन सा पुराना कानून बदल दिया। किसान को केवल बहलाया और ठगा जाता है, उसकी तरक्की के लिए नहीं सोचा जाता।

वर्तमान समय की बात करें तो परिस्थितियां अलग हैं, यूपी में एक नई सरकार है जिसका दावा है कि वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के किसान विकास के मुद्दे के साथ काम कर रही है। अब यूपी में किसानों के हितों के लिए कई बड़े फैसले ले चुके योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री हैं। अदालत के आदेश से लेकर नई सरकार की मंशा दोनों ही किसानों के साहयोग वाली नजर आती है, शायद यही वजह है कि गन्ना किसान अपने 2016 करोड़ मिलने की बाट जोह रहा है।

लखनऊ। यूपी में योगी सरकार बनने के बाद पिछली सरकार के ऐसे कारनामे सामने आ रहे हैं जो पूर्व सीएम अखिलेश यादव के निर्णय लेने की क्षमता पर सवालिया निशान खड़ा कर रहे हैं। ताजा मामला सामने आया गन्ना किसानों को मिलने वाले 2016 करोड़ के ब्याज को माफ कर शुगर मिल मालिकों को लाभ पहुंचाने का। अखिलेश यादव की सरकार के इस निर्णय पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी सवालिया निशान खड़ा करते हुए किसानों के हित के खिलाफ करार…