दुष्कर्म के आरोपी सपा विधायक मनोज पारस पर 10 साल से नहीं हुई कार्रवाई, क्या इस पीड़िता को भी मिलेगा न्याय?

बिजनौर। जहां प्रदेश के कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति के मामले में आला अधिकारी और सरकार सक्रियता दिखाकर गिरफ्तारी की कोशिश में लगी हैं वहीं बिजनौर में नगीना विधानसभा के सपा विधायक और पूर्व मंत्री मनोज पारस के गैंगरेप के मामले में दस साल से पीडि़ता इन्साफ के लिये प्रधानमंत्री कार्यालय तक में गुहार लगा चुकी है पर अभी तक कुछ नहीं हुआ अब देखना यह है कि सत्ता के नशे में चूर विधायक की करतूत पर पीडि़ता को इस सरकार से या आने वली अगली सरकार से इन्साफ मिल पाता है या नहीं।




गौरतलब है कि जनपद बिजनौर की नगीना सुरक्षित सीट से सपा विधायक मनोज पारस व उनके चार साथियों पर उन्ही के गांव की एक दलित महिला ने वर्ष 2006 में राशन की दुकान दिलाने का झांसा देकर अपने घर बुलाकर सामुहिक दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। जिस समय दलित महिला के साथ गैंगरेप की घटना घटी थी उस समय प्रदेश में बसपा सरकार थी और मनोज पारस बसपा के प्रभारी थे। उस समय आरोपी मनोज पारस ने बसपा का फायदा उठाते हुए इस बहुचर्चित मामले का अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर कानूनी दांव पेचों में फंसाकर मामले को दबाने का पूरा पूरा प्रयास किया था। जबकि पीडित महिला ने हिम्मत न हारते हुए कोर्ट की शरण ली और 13 जून 2007 को न्यायालय के आदेश पर नगीना थाने में मनोज पारस समेत चारों आरोपियों के खिलाफ धारा 376 जी, 506 आईपीसी व धारा 3(1) (12) एससी एसटी एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत हुआ था। बाद में घटना सही पाये जाने पर पीडि़त महिला को अनुसूचति जाति/अनुसूचित जनजाति विभाग ने छह हजार रुपए का मुआवजा दिया था।

काफी लम्बे समय तक कोर्ट में पेश न होने पर 21 नवम्बर 2011 को एसीजेएम ने इस मामले में मुख्य अरोपी सपा के पूर्व राज्यमंत्री व विधायक मनोज पारस व उसके साथियों के विरूद्ध गैर जमानती वारंट जारी कर दिये थे। लेकिन सत्ता के नशे में चूर विधायक मनोज पारस ने इन सबके बावजूद भी कोर्ट में पेश होना गवारा नही समझा। कोर्ट में पेश न होने पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने गैर जमानती वारंट के साथ साथ 82 सीआरपीसी की कार्रवाही के तहत पूर्व राज्यमंत्री को भगौड़ा घोषित कर दिया। न्यायालय द्वारा कड़ा रूख अपनाने से जहां राज्य मंत्री मनोज पारस का जेल जाना तय माना जा रहा था। वहीं सपा सरकार की मजाक बनाने वाले विधायक मनोज पारस पर इससे पहले कोर्ट कोड़ा पडता उसने जेल जाने से बचने के लिए हाईकोर्ट को गुमराह करते हुए एक झूठा प्रार्थना पत्र दिया जिसमें उन्होने कहा कि गैंगरेप का मुख्य आरोपी राज्यमंत्री मनोज पारस व जयपाल आपस में सगे चाचा-भतीजे है और अन्य आरोपी चचेरे भाई है। जिस कारण ऐसे कृत्य कार्य को नहीं किया जा सकता।

प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने 6 नवम्बर 2013 को मुकदमें की कार्रवाही पर अंतरिम रोक लगा दी। जब मांमला सुर्खियों में आया तो विरोधी पार्टियों ने भी पूर्व राज्यमंत्री मनोज पारस की करतूतों की वजह से सपा सरकार पर लांछन लगाने शुरु कर दिये और वह सपा सरकार पर पूरी तरह हावी हो गए। काफी मंथन के बाद सपा सुप्रीमों मुलायम सिंह यादव व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपनी साख बचाने के लिए तत्काल राज्यमंत्री मनोज पारस को मंत्रीमंडल से बर्खास्त कर दिया। गैंगरेप के इस बहुचर्चित प्रकरण में सपा के विधायक मनोज पारस के शामिल होने से सपा सरकार की काफी किरकिरी हुई थी। पीडिता की गुहार व स्थानीय नेताओं के विरोध के बावजूद 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा ने फिर दागी मनोज पारस को टिकट दे दिया।




जबकि महिला ने हिम्मत न हारते हुए 2 सितम्बर 2015 को प्रधनमंत्री नरेन्द्र मोदी से इन्साफ की गुहार लगाते हुए पत्र भेजा और प्रधानमंत्री कार्यालय ने इसका संज्ञान लेते हुए पीडि़ता को इंसाफ दिलाने के लिये उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव को पत्र लिखा जिसपर उप सचिव हरमोहन झा ने यथोचित कार्रवाही करने के निर्देश 5 नवम्बर 2015 को दिये लेकिन उसके बावजूद अभी भी मामला ठंडे बस्ते में पडा है जबकि पीडि़ता दूसरे प्रदेश में अपनी जान बचाती घूम रही है वहीं सपा सरकार की नीतियों की भी पोल खुल गई है अब देखना यह है कि प्रधानमंत्री पीडि़ता को इंसाफ दिला पाते हैं या नहीं।

जहां प्रदेश के कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति के मामले में आला अधिकारी और सरकार सक्रियता दिखाकर गिरफ्तारी की कोशिश में लगी हैं वहीं इस बहुचर्चित मामले में हमेश सपा ने पल्ला झाड़ लिया। वही दूसरी तरफ गायत्री प्रसाद प्रजापति पर हुई कार्रवही की खबर सुनकर पीडिता ने अफसोस जताते हुए कहा कि आरोपी गायत्री प्रसाद प्रजापति की तरह काश सपा सरकार मेरे साथ हुई घटना को भी गंभीरता से लेती तो उसके साथ दरिंदगी करने वाला मनोज पारस व उसके साथी सलाखों के पीछे होते लेकिन ऐसा नही हुआ क्योंकि वह एक दलित महिला थी जिसकी आवाज आज तक सरकार तक नही पहुंची।

बिजनौर से शहजाद अंसारी की रिपोर्ट