बाराबंकी: महिला सिपाही ने लगाई फांसी, सुसाइड नोट में थाना इंचार्ज व मुंशी पर लगाए ये आरोप

lady police suicide
बाराबंकी: महिला सिपाही ने लगाई फांसी, सुसाइड नोट में थाना इंचार्ज व मुंशी पर लगाए ये आरोप

बाराबंकी। बाराबंकी के हैदरगढ़ कोतवाली में तैनात महिला सिपाही ने शनिवार रात फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उसका शव रविवार को किराए के कमरा लटका मिलने पर हड़कंप मच गया। महिला सिपाही द्वारा खुदकुशी करने की खबर जैसे ही पुलिस को मिली तो उसके हाथ—पांव फूल गए। आनन—फानन में वो मौके पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

Lady Police Suicide In Barabanki Due To Misbehave Of Statinon Officer :

कमरे की छानबीन के दौरान पुलिस को वहां से महिला सिपाही मोनिका के हांथों खिला गया सुसाइड नोट भी मिला है। जिसमें उसने थाना प्रभारी व अन्य पर प्रताड़ना का आरोप लगाया। स्थानीय पुलिस कई घंटे तक सुसाइट नोट को छुपाने का प्रयास करती रही। घटना की सूचना पाकर मौके पर एएसपी समेत अन्य अधिकारी पहुंचे। मामले में एसपी ने प्रभारी निरीक्षक परशुराम ओझा और मुंशी रुखसार अहमद को लाइनहाजिर कर दिया है।

बता दें कि हरदोई जनपद की रहने वाली महिला सिपाही मोनिका हैदरगढ़ कोतवाली में तैनात थी। वह हैदरगढ़ कस्बे के मितईपुरवा वार्ड में अक्षय कुमार के मकान में किराए पर रहती थी। रविवार को मोनिका का फोन ना मिलने पर पड़ोस में रहने वाला दूसरा सिपाही उसे खोजते हुए घर पर आया। कई बार आवाज लगाने के बाद भी जब फोन नही उठा तो उसने धक्का मारकर दरवाजा खोला। कमरे में मोनिका का शव पंखे में रस्सी के फंदे पर लटका हुआ था।

सुसाइड नोट में लिखी ये बातें

महिला सिपाही के कमरे से बरामद किया गया सुसाइड नोट पहले तो पुलिस ने छिपा लिया, लेकिन उसके बाद वो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। सुसाइड नोट में मोनिका ने लिखा है कि वह थाने में क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम (सीसीटीएनएस) में तैनात है। इसके बावजूद लगातार उसकी ड्यूटी बाहर नियम विरुद्ध लगाई जाती है। इसका जब मैंने विरोध किया तो थाने पर तैनात कांस्टेबल मोहर्रिर रुखसार अहमद व एसएचओ परशुराम ओझा द्वारा मुझे प्रताड़ित किया जाने लगा। मेरी गैरहाजिरी की रपट भी लिख दी। 29 सितंबर को जब मैं छुट्टी का प्रार्थना पत्र लेकर एसएचओ परशुराम ओझा के पास गई तो उन्होंने रजिस्टर फेंक दिया और कहा कि मैं छुट्टी नहीं दूंगा, सीओ से जाकर मिलो। मोनिका ने अपने पत्र में लिखा कि छुट्टी सभी का अधिकार होता है उसके लिए भी अगर उच्चाधिकारियों के सामने भीख मांगने पड़े तो यह ठीक नहीं है। अगर मुझे छुट्टी दे दी जाती तो यह कदम मैं ना उठाती। अंत में उसने अपने मम्मी पापा को सॉरी बोलते हुए माफी मांगी है। फिलहाल इस मामले में वरिष्ठ अधिकारी कुछ भी बोलने से इंकार कर ​रहे है।

बाराबंकी। बाराबंकी के हैदरगढ़ कोतवाली में तैनात महिला सिपाही ने शनिवार रात फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उसका शव रविवार को किराए के कमरा लटका मिलने पर हड़कंप मच गया। महिला सिपाही द्वारा खुदकुशी करने की खबर जैसे ही पुलिस को मिली तो उसके हाथ—पांव फूल गए। आनन—फानन में वो मौके पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। कमरे की छानबीन के दौरान पुलिस को वहां से महिला सिपाही मोनिका के हांथों खिला गया सुसाइड नोट भी मिला है। जिसमें उसने थाना प्रभारी व अन्य पर प्रताड़ना का आरोप लगाया। स्थानीय पुलिस कई घंटे तक सुसाइट नोट को छुपाने का प्रयास करती रही। घटना की सूचना पाकर मौके पर एएसपी समेत अन्य अधिकारी पहुंचे। मामले में एसपी ने प्रभारी निरीक्षक परशुराम ओझा और मुंशी रुखसार अहमद को लाइनहाजिर कर दिया है। बता दें कि हरदोई जनपद की रहने वाली महिला सिपाही मोनिका हैदरगढ़ कोतवाली में तैनात थी। वह हैदरगढ़ कस्बे के मितईपुरवा वार्ड में अक्षय कुमार के मकान में किराए पर रहती थी। रविवार को मोनिका का फोन ना मिलने पर पड़ोस में रहने वाला दूसरा सिपाही उसे खोजते हुए घर पर आया। कई बार आवाज लगाने के बाद भी जब फोन नही उठा तो उसने धक्का मारकर दरवाजा खोला। कमरे में मोनिका का शव पंखे में रस्सी के फंदे पर लटका हुआ था।

सुसाइड नोट में लिखी ये बातें

महिला सिपाही के कमरे से बरामद किया गया सुसाइड नोट पहले तो पुलिस ने छिपा लिया, लेकिन उसके बाद वो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। सुसाइड नोट में मोनिका ने लिखा है कि वह थाने में क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम (सीसीटीएनएस) में तैनात है। इसके बावजूद लगातार उसकी ड्यूटी बाहर नियम विरुद्ध लगाई जाती है। इसका जब मैंने विरोध किया तो थाने पर तैनात कांस्टेबल मोहर्रिर रुखसार अहमद व एसएचओ परशुराम ओझा द्वारा मुझे प्रताड़ित किया जाने लगा। मेरी गैरहाजिरी की रपट भी लिख दी। 29 सितंबर को जब मैं छुट्टी का प्रार्थना पत्र लेकर एसएचओ परशुराम ओझा के पास गई तो उन्होंने रजिस्टर फेंक दिया और कहा कि मैं छुट्टी नहीं दूंगा, सीओ से जाकर मिलो। मोनिका ने अपने पत्र में लिखा कि छुट्टी सभी का अधिकार होता है उसके लिए भी अगर उच्चाधिकारियों के सामने भीख मांगने पड़े तो यह ठीक नहीं है। अगर मुझे छुट्टी दे दी जाती तो यह कदम मैं ना उठाती। अंत में उसने अपने मम्मी पापा को सॉरी बोलते हुए माफी मांगी है। फिलहाल इस मामले में वरिष्ठ अधिकारी कुछ भी बोलने से इंकार कर ​रहे है।