लालू यादव 11वीं बार बने राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष,किसी और ने नहीं किया नामांकन

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लालू यादव 11वीं बार बने राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष,किसी और ने नहीं किया नामांकन

पटना। राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष के रूप में एक बार फिर ​लालू प्रसाद यादव को चुना गया है। मंगलवार को पार्टी कार्यालय में चार सेट में लालू यादव का नामांकन पत्र दाखिल किया गया। एकमात्र नामांकन होने के कारण लालू 11वीं बार राजद अध्यक्ष चुने गए हैं। वहीं, इससे पहले अटकलें थीं ​कि तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय जनता पार्टी का अध्यक्ष चुना जा सकता है। लेकिन ऐन वक्त पर लालू यादव को फिर से अध्यक्ष बनाने का फैसला किया गया।

Lalu Yadav Became The President Of Rashtriya Janata Dal For The 11th Time No One Else Nominated :

मंगलवार को लालू यादव के छोटे बेटे तेजस्वी यादव ने पार्टी कार्यालय पहुंचकर पिता लालू का नामांकन पत्र दाखिल किया। फिलहाल, लालू यादव चारा घोटाले में रांची की बिरसा मुंडा जेल में बंद हैं। बता दें कि, लालू के जेल में होने के बाद तेजस्वी यादव ने राजद की कमान पूरी तरह से संभाल रखी है। उनके स्तर पर ही सारी नीतियां तय की जाती हैं।

यह बात और है कि वह लालू की सहमति लेना कभी नहीं भूलते। वहीं लालू लंबे समय से सक्रिय राजनीति से दूर हैं। इसी को लेकर ही कयास लगाये जा रहे थे कि उन्हें पार्टी की कमान सौंपी जा सकती है। मगर लालू प्रसाद के नाम से नामांकन पत्र दाखिल किया गया वैसे ही तय हो गया था कि एक बार फिर पार्टी की कमान उसके संस्थापक के हाथ में जाएगी।

पटना। राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष के रूप में एक बार फिर ​लालू प्रसाद यादव को चुना गया है। मंगलवार को पार्टी कार्यालय में चार सेट में लालू यादव का नामांकन पत्र दाखिल किया गया। एकमात्र नामांकन होने के कारण लालू 11वीं बार राजद अध्यक्ष चुने गए हैं। वहीं, इससे पहले अटकलें थीं ​कि तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय जनता पार्टी का अध्यक्ष चुना जा सकता है। लेकिन ऐन वक्त पर लालू यादव को फिर से अध्यक्ष बनाने का फैसला किया गया। मंगलवार को लालू यादव के छोटे बेटे तेजस्वी यादव ने पार्टी कार्यालय पहुंचकर पिता लालू का नामांकन पत्र दाखिल किया। फिलहाल, लालू यादव चारा घोटाले में रांची की बिरसा मुंडा जेल में बंद हैं। बता दें कि, लालू के जेल में होने के बाद तेजस्वी यादव ने राजद की कमान पूरी तरह से संभाल रखी है। उनके स्तर पर ही सारी नीतियां तय की जाती हैं। यह बात और है कि वह लालू की सहमति लेना कभी नहीं भूलते। वहीं लालू लंबे समय से सक्रिय राजनीति से दूर हैं। इसी को लेकर ही कयास लगाये जा रहे थे कि उन्हें पार्टी की कमान सौंपी जा सकती है। मगर लालू प्रसाद के नाम से नामांकन पत्र दाखिल किया गया वैसे ही तय हो गया था कि एक बार फिर पार्टी की कमान उसके संस्थापक के हाथ में जाएगी।