लापरवाह निकले सड़क सुरक्षा जीवन रक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले अफसर, खर्च नहीं कर पाए केंद्र से मिला पैसा

लखनऊ: सड़क सुरक्षा जीवन रक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले अफसरों की लापरवाही सामने आई है। वित्त वर्ष 2016- 17 में सड़क सुरक्षा के मद में केंद्र सरकार से मिली राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा भी परिवहन विभाग नहीं खर्च कर पाया। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से जारी किए गए 50 करोड़ रुपए के बजट में से 26 करोड़ रुपए खर्च नहीं कर सके और ये पैसा वापस केंद्र सरकार के खाते में चला गया। इस बात को लेकर केंद्रीय परिवहन मंत्रालय ने यूपी परिवहन विभाग पर अपनी नाराजगी भी जताई है।




शहर से लेकर गांव तक रोजाना हो रही सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए परिवहन विभाग को 50 करोड़ से अधिक की राशि केंद्र सरकार ने दी थी। इसमें राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के कई शहर में ऑटोमैटिक टेस्ट ट्रैक बनाने थे। सिम्युलेटर संयत्र खरीद व कानपुर में निरिक्षण केंद्र प्रस्तावित था लेकिन परिवहन विभाग समय रहते इस फंड का उपयोग नहीं कर सका। अब बचे 26 करोड़ रुपये केंद्र सरकार को वापस करना होगा।

उप परिवहन आयुक्त सड़क सुरक्षा गंगाफल का कहना है कि एक साल के भीतर जितना पैसा खर्च करना था वह खर्च नहीं हो पाया। वजह साफ है परिवहन विभाग के पास संसाधन की भारी कमी है। इस कमी को जल्द पूरा किया जाएगा। ताकि जो पैसा गया है वह इसी वित्तिय वर्ष में वापस आए। जिस काम के लिए पैसा मिला था। उस काम को करने के लिए कार्यदायी संस्थाओं की कमी थी। इसी वजह से पैसा खर्च नहीं हो सका। इसी वित्तीय वर्ष में यूपी परिवहन विभाग को पैसा वापस मिल जाएगा। इन सबके बावजूद अगर पैसा तय समय के अंदर खर्च किया गया होता तो हो सकता है कि सड़क दुर्घटनाओं के आकड़ों में थोड़ी कमी जरूर आती।




परिवहन आयुक्त के रविंद्र नायक बतातें है कि कहीं न कहीं काम में लापरवाही बरती गई है। यदि तय समय के अंदर सड़क सुरक्षा के लिहाज से काम किया गया होता तो यह पैसा वापस नहीं जाता। वित्तीय वर्ष 2016-17 में परिवहन विभाग के सड़क सुरक्षा बजट में 50 करोड़ मिले थे। जोकि खर्च नहीं हो सके। अब इन पैसे को वापस मंगाने के लिए ढेरों कागजी कार्रवाई करनी पड़ेगी।

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