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लता मंगेशकर स्कूल केवल 1 दिन गईं और 6 विश्वविद्यालयों ने उन्हें दी डॉक्टरेट की मानद उपाधि, जानें उपलब्धियां

भारत रत्न, सुरों की महारानी लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) का रवि​वार सुबह मुंबई की ब्रीच कैंडी अस्पताल में निधन से पूरा देश शोक में डूब गया है। लता जी के निधन पर सरकार ने दो दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है। लता मंगेशकर ने 30 से भी ज्यादा भाषाओं में 10 हजार से ज्यादा नग्मे गाए हैं। इसीलिए उन्हें साल 1989 में दादा साहेब फाल्के अवार्ड से सम्मानित किया गया था। और फिर 2001 में लता जी भारत के सबसे बड़े अवार्ड भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया था।

By संतोष सिंह 
Updated Date

नई दिल्ली। भारत रत्न, सुरों की महारानी लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) का रवि​वार सुबह मुंबई की ब्रीच कैंडी अस्पताल में निधन से पूरा देश शोक में डूब गया है। लता जी के निधन पर सरकार ने दो दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है। लता मंगेशकर ने 30 से भी ज्यादा भाषाओं में 10 हजार से ज्यादा नग्मे गाए हैं। इसीलिए उन्हें साल 1989 में दादा साहेब फाल्के अवार्ड से सम्मानित किया गया था। और फिर 2001 में लता जी भारत के सबसे बड़े अवार्ड भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया था।

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लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) का उपलब्धियों भरा रहा है जीवन

मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में जन्म लेने वाली लता मंगेशकर का पूरा जीवन उपलब्धियों से भरा रहा है। बचपन से गाने के शौक और कड़ी मेहनत से उन्होंने जो मुकाम हासिल किए उन्हें एक वाक्य में समेटा नहीं जा सकता।

प्रमुख पुरस्कार और सम्मानों की सूची  देखें

1969 में पद्मभूषण से सम्मान।

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1989 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार प्राप्त करने वाली फिल्म इंडस्ट्री की पहली महिला बनीं।

वर्ष 1974 में लंदन के सुप्रसिद्ध रॉयल अल्बर्ट हॉल में गाने वाली पहली भारतीय गायिका।

सन 1974 में दुनिया में सबसे अधिक गीत गाने का ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड।

1999 में विभूषण सम्मान।

2001 में देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न सम्मान।

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2001 में महाराष्ट्र रत्न से सम्मान।

36 भाषाओं में 30,000 से अधिक गाने गाएं।

1984 में मध्य प्रदेश सरकार ने उनके नाम पर संगीत का पुरस्कार रखा।

इन पुरस्कारों के अलावा उन्हें फिल्म जगत और दुनियाभर के संस्थानों से कई अन्य बड़े पुरस्कार भी प्राप्त हुए थे।

लता जी केवल 1 दिन ही गईं थी स्कूल

लता मंगेशकर का जीवन शुरू से इतना आसान नहीं रहा था। खबरों के अनुसार वह केवल एक दिन के लिए ही स्कूल गईं थी। बता दें कि जब वह स्कूल में अपनी छोटी बहन आशा भोसलें को लेकर पहुंचीं तो स्कूल के हेडमास्टर ने उन्हें (आशा भोसलें) यह कहकर निकाल दिया, कि उन्हें भी स्कूल की फीस जमा करनी होगी। इस दिन के बाद लता मंगेशकर ने कभी स्कूल न जाने का फैसला किया। हालांकि, एक समय ऐसा भी आया जब उनकी पहचान के दम पर न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय समेत 6 विश्वविद्यालयों ने उन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि दी।

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शुरुआती दिनों में रिजेक्ट भी हुईं लता दी

देश की स्वर कोकिला कही जाने वालीं लता मंगेशकर को शुरूआती दिनों में रिजेक्ट भी होना पड़ा था। कई बार उनकी आवाज को पतला बताकर नापसंद कर दिया गया था। हालांकि, उन्होंने हिम्मत न हारते हुए अपनी मेहनत के दम पर कई मुकाम हासिल करते हुए भारत रत्न बनीं।

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