स्मारक घोटाला: विजिलेंस की जांच में रोड़ा बन रहा एलडीए, विभाग से नहीं मिला ब्योरा

लखनऊ। मायाराज में हुए स्मारक घोटाले की जांच कर रही विजिलेंस को लखनऊ विकास प्राधिकरण(एलडीए) अब कर्मचारियों की संपत्ति का ब्योरा देने में आना-कानी कर रहा है। स्मारक घोटाले की जांच में जुटी विजिलेंस ने जब एलडीए के अधिकारियों से कर्मचारियों की संपत्ति का ब्योरा मांगा, तो अधिकारी हीलाहवाली करने लगे। इस बाबत जब एलडीए अधिकारियों से बात की गयी, तो उन्होने कहा कि जल्द ही कर्मचारियों का ब्योरा विजिलेंस को सौंप दिया जाएगा।

स्मारक घोटाले की शुरुआती जांच  में यह बात सामने आई है कि इस प्रकरण से संबंधित कई दस्तावेज़ एलडीए के पास मौजूद हैं। विजिलेंस ने इस संबंध में एलडीए को लगातार दो बार दस्तावेजों के बारे में जानकारी देने के लिए तलब किया, लेकिन महीने भर बाद भी एलडीए जानकारी देने में हीलाहवाली करता रहा।    

एलडीए सचिव श्रीचंद वर्मा का कहना है कि विजिलेंस ने जानकारी तो मांगी है, लेकिन अभी तक अलग-अलग विभागों से इकट्ठा होकर जानकारी उन तक नहीं पहुंची है। हालांकि विभागों को निर्देश दिया गया है कि जल्द से जल्द डिटेल्स कलेक्ट कर उन्हें दिया जाए।

बता दें कि स्मारक निर्माण में हुए घोटाले का मामला गोमती नगर थाने में दर्ज है। इस घोटाले की जांच विजिलेंस टीम कर रही है। स्मारकों के निर्माण से जुड़ी अन्य अनियमितताओं की जांच को लेकर विजिलेंस ने एलडीए से 15 अप्रैल को छह बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। बताया जा रहा है कि जो प्रारंभिक जांच हुई है, उसमें घोटाले में एलडीए की भी संलिप्तता उजागर हुई है।

इन पर दर्ज हो चुका है मामला

लोकायुक्त की रिपोर्ट मिलने पर इस मामले में शासन ने विजिलेंस जांच के आदेश दिए। पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी और बाबूसिंह कुशवाहा, खनन निदेशालय के पूर्व संयुक्त निदेशक एवं सलाहकार सुहेल अहमद फारूकी और 91 अन्य लोगों के खिलाफ थाना गोमतीनगर में केस दर्ज कराया गया।

इसके अलावा अगस्त 2013 में राजकीय निर्माण निगम के महाप्रबंधक (तकनीकी) एसके त्यागी, महाप्रबंधक (सोडिक) कृष्ण कुमार, महाप्रबंधक एस. कुमार, महाप्रबंधक अवनि कुमार और महाप्रबंधक अरविंद त्रिवेदी के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए।