लेमन ग्रास से सुधरेगी किसानों की दशा

हमीरपुर: अकाल से बदहाल बुंदेलखंड के हमीरपुर जिले में ‘लेमन ग्रास’ किसानों के लिए अब वरदान साबित होगी, क्योंकि कम पानी में इसकी खेती से लगातार किसानों को पांच सालों तक आमदनी मिलेगी। फिलहाल जिलाधिकारी के आवास पर 10 एकड़ भूमि पर लेमन ग्रास के पौधे लगाकर इस योजना का शुभारंभ किया गया है। हमीरपुर सहित पूरे बुंदेलखंड में किसानों के लिए अब खेतीबाड़ी करना काफी जद्दोजहद वाला हो गया है, क्योंकि हर साल आपदाएं आती हैं। हाल ही में डीएम आवास में 10 एकड़ जमीन पर लेमन ग्रास के पौधे रोपित कर इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शुभारंभ किया गया।




जिलाधिकारी उदयवीर सिंह यादव ने बताया कि लेमन ग्रास की खेती करने के लिये हमीरपुर जिले में सौ किसान चयनित किए गए हैं। डीएम आवास में 10 एकड़ जमीन पर लेमन ग्रास के पौध तैयार किए जाएंगे और चयनित किसानों को ये पौधे मुफ्त मिलेंगे। प्रत्येक किसान अपने एक एकड़ भूमि पर लेमन ग्रास की खेती करेगा। यह पौधे एक बार लगाने से पांच वर्षों तक पौधा चलता है। डीएम का कहना है कि एक एकड़ भूमि पर लेमन ग्रास की फसल से चालीस हजार से पचास हजार रुपये तक की आमदनी भी होती है।

यदि किसानों ने एक बार इसकी खेती शुरू की तो उसकी माली हालत भी पांच सालों के भीतर बदल जाएगी। गर्मियों के मौसम में लेमन ग्रास की खेती करने को चयनित सभी सौ किसानों को अब वैज्ञानिक खेती करने के लिये प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। जिलाधिकारी ने बताया कि लेमन ग्रास की पत्तियों से तेल निकाला जाता है। इस पौध की पत्तियों को रगड़ कर सूंघने पर नींबू की तरह महक आती है। लेमन ग्रास पौध में पानी बहुत कम मात्रा में लगता है। इस घास के पौधे को अन्ना जानवर भी नहीं खाते हैं और कोई नुकसान भी नहीं होता है।

उदयवीर सिंह ने बताया कि लेमन ग्रास के तेल का उपयोग उच्च कोटि के इत्र बनाने, सौंदर्य प्रसाधन सामग्री के साथ ही साबुन और दवाइयां बनाने में किया जाता है। जैव ऊर्जा विकास बोर्ड के राज्य समन्वयक पी.एस. ओझा ने हमीरपुर आकर लेमन ग्रास की खेती के लिए लोगों में जागरूकता पैदा की। उन्होंने पिछले दिनों यहां ऊर्जा समिति की बैठक में कहा कि लेमन ग्रास, नींबू घास व करोजा, रोशा व महुआ घास से लाभ ही लाभ है।

राज्य समन्वयक ने बताया कि बुंदेलखंड में इसकी खेती करने से अन्ना प्रथा की समस्या समाप्त हो जाएगी, क्योंकि इसे पशु नहीं खाते हैं। उन्होंेने बताया कि अतरैया में सरकारी भूमि पर राज्य जैव ऊर्जा विकास बोर्ड की परियोजनाओं तथा क्षेत्र की अन्ना प्रथा के लिए पायलट परियोजना भी अब शुरू होगी।