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सकंट में संकटमोचन LIC: पांच सालों में दोगुना हुआ NPA, कहीं डूब न जाएं आपकी गाढ़ी कमाई के पैसे!

By शिव मौर्या 
Updated Date

Lic In Crisis Npa Doubles In Five Years Increasing Risk On Your Deposits

नई दिल्ली। सरकारी क्षेत्र की बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) पर संकट मंडराने लगा है। आंख मूंदकर अपनी गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा एनआईसी में लगाने वाले लोगों के रुपयों पर भी ​जोखिम बढ़ता जा रहा है। दरअसल, एलआईसी पर नॉन परफॉर्मिंग ऐसेट (एनपीए) की मार पड़ी है। पांच सालों में कंपनी का एनपीए दोगुना हो गया है।

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करीब 30,000 करोड़ रुपये ऐसे हैं, जो एनपीए में चले गए हैं। ऐसे में एलआईसी की स्थिति बिगड़ती जा रही है। यह हाल तब है जब आम आदमी से लेकर बिजनेसमैन तक की प्राथमिकता एलआईसी में निवेश करने की सबसे पहले है। कंपनी के पास 100 से भी ज्यादा तरह के लाइफ इंश्योरेंस के प्लान हैं, इन प्लांस से जुड़े करोड़ों लोग हैं और इन प्लांस में निवेश किए गए अरबों रुपये हैं। लेकिन अब इस एलआईसी पर खतरा मंडरा रहा है।

बता दें कि, नकदी भंडर की वजह से एलआईसी सरकार के लिए संकटमोचन की तरह काम करती है। एलआईसी सार्वजनिक कंपनियों और बैंकों के शेयर खरीद कर उनको बचाने का भी काम किया है। लेकिन एलआईसी के नवीनतम बहीखाता देखने से कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आई हैं। 2019-20 के पहले छह महीनों (अप्रैल-सितंबर) में एलआईसी के एनपीए में 6.10 फीसदी की बढ़त हुई है।

एलआईसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 30 सितंबर 2019 तक कुल 30000 करोड़ रुपये का सकल एनपीए है। रिपोर्ट में बताया गया है कि सितबंर 2019 में कंपनी का सकल एनपीए 6.10 प्रतिशत रहा जो पिछले पांच सालों में लगभग दोगुना हो गया है।

यह एनपीए निजी क्षेत्र के यस बैंक, आईसीआईसीआई, एक्सिस बैंक के करीब ही है। बता दें कि, डेक्कन क्रॉनिकल, एस्सार पोर्ट, गैमन, आईएलएंडएफएस, भूषण पावर, वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज, आलोक इंडस्ट्रीज, एमट्रैक ऑटो, एबीजी शिपयार्ड, यूनिटेक, जीवीके पावर और जीटीएल आदि में एलआईसी का 25 हजार करोड़ रुपये एनपीए के तौर पर अटका हुआ है।

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