नेशनल हाईवे पर शराब की दुकानों का लाइसेंस क्यों?

इलाहाबाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राजमागरे पर शराब की दुकानें हटाने के मामले में प्रदेश के मुख्य सचिव से हलफनामा मांगा है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने शराब की दुकानों के चलते बढ़ती दुर्घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्य सचिव को मई में पत्र भेजकर उनसे अनुरोध किया था कि नेशनल हाईवे पर शराब की नयी दुकानों को लाइसेंस न दें।



कोर्ट ने सोमवार को जानना चाहा कि मुख्य सचिव ने प्राधिकरण के इस पत्र पर क्या कार्रवाई की गयी है। अपर आबकारी आयुक्त ने कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि 17 फीसदी दुकानें राजमागरे पर हैं, यदि इन्हें शिफ्ट किया गया तो 5 हजार करोड़ के राजस्व हानि की आशंका है। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार का पक्ष स्पष्ट करने को कहा है। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश डीबी भोसले तथा न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खण्डपीठ ने श्रेष्ठ प्रताप सिंह की जनहित याचिका पर दिया है।

याची का कहना है कि प्राधिकरण के पत्र पर राज्य सरकार को विचार कर नये लाइसेंस न देने तथा वर्तमान शराब की दुकानों को हाईवे से शिफ्ट किया जाए क्योंकि राष्ट्रीय राजमागरे पर स्थित शराब की दुकानें होने के कारण ड्राइवर शराब पीकर वाहन चलाते हैं और दुर्घटनाएं हो रही हैं। कोर्ट ने प्राधिकरण के पत्र को गंभीरता से लिया और राज्य सरकार को अपना पक्ष स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। याचिका पर अगली सुनवाई 2 नवम्बर को होगी।