नियंत्रण रेखा तनाव चरम पर, गलवान पैंगोंग लेक के करीब 7000 चीनी सैनिक तैनात

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नई दिल्ली: लद्दाख में चीन ने अपने सदाबहार दोस्त पाकिस्तान की तरह चालबाजी की है। दरअसल, सेना के कुछ जवानों के कोरोना संक्रमित होने के बाद भारत ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के करीब मार्च के शुरू में होने वाले अपने अभ्यास को कुछ समय के लिए टाल दिया था। इसी का फायदा उठाते हुए चीनी सेना ने रणनीतिक दृष्टि से अहम भारतीय सेना के पेट्रोलिंग वाले इलाके में आगे बढ़ते हुए वहां अपनी पोजीशन मजबूत कर ली। इसके बाद से दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है।

Loc Tension Heightens Around 7000 Chinese Troops Stationed At Galvan Pangong Lake :

सेना और भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस का सब सेक्टर नॉर्थ (SSN) में मार्च में होने वाला अभ्यास सेना के कुछ जवानों के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद टाल दिया था। यह अभ्यास जवाबी अभ्यास होता है और इसमें हिमाचल बेस के जवान शामिल होते हैं। मार्च के दूसरे सप्ताह में एक जवान कोरोना संक्रमित पाया गया था इसके बाद कई तरह के ऐहतियाती कदम उठाए गए थे। इसमें सुरक्षाबलों के जमावड़े पर रोक लगा दी गई थी। अधिकारियों ने बताया कि कोरोना महामारी को फैलने से रोकने के लिए लद्दाख में किया जाने वाला अभ्यास को भी स्थगित करने का फैसला इसमें शामिल था।

चीन ने भी अपने अभ्यास को एक महीने के लिए स्थगित कर दिया था लेकिन चीन ने चालाकी दिखाते हुए गलवान घाटी और पैंगोंग शो झील के करीब फिंगर एरिया में तुरंत सैनिकों की तैनाती कर दी। गलवान तनाव के बारे में सबसे पहले जानकारी दी थी। चीनी सैनिकों के पहुंचने के कारण दौलद बेग ओलिड और काराकोरम पास से लेह तक जाने के लिए पिछले साल बनाए गए सड़क से संपर्क टूट जाने का खतरा मंडराने लगा है।

चीन की चाल को देखते हुए भारत ने सभी कोविड-19 प्रोटोकॉल तोड़ते हुए लेह में तैनात अपने सैनिकों तो तुरंत इलाके में भेज दिया। हालांकि पहले ही चालाकी कर चुके चीन को भारतीय इलाके गलवान और फिंगर इलाके में अहम रणनीतिक बढ़त हासिल हो चुकी थी। सूत्रों ने बताया कि गलवान में चीन के करीब 3,400 सैनिक तैनात हैं जबकि पैंगोंग लेक के करीब 3,600 चीनी सैनिक हैं।

ई-मेल से भेजे सवाल पर गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि ADGPI, रक्षा मंत्रालय और भारत सरकार भारत-चीन सीमा पर जानकारी देगी। ITBP के प्रवक्ता की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। सेना ने स्थिति पर कोई टिप्पणी नहीं की लेकिन इतना जरूर कहा कि अभी सीमा पर किसी प्रकार की कोई हिंसा नहीं हुई है। सूत्रों ने बताया कि Lockdown के दूसरे चरण के दौरान भारत ने अप्रैल के अंत में सीम पर चीनी सैनिकों का मूवमेंट को नोटिस किया था। लद्दाख में भारत और चीनी सैनिकों के बीच पहली झड़प की खबर 5-6 मई को आई थी। झड़प में कई भारतीय जवानों के घायल होने की खबरें भी आई थीं।

सैटलाइट तस्वीरों के हवाले से सरकारी सूत्रों ने बताया कि चीनी सैनिक भारतीय सेना के पेट्रोलिंग वाले इलाकों पोजीशन बना ली है और कुछ रणनीतिक दृष्टि से अहम क्षेत्र में भी आ गए हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पहले बताया था कि भारत चीन के साथ इस मसले को सुलझाने की कोशिश कर रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी एक इंटरव्यू में कहा था कि चीन ने सीमा पर सेनाएं बढ़ाई हैं और मसले को सुलझाने के लिए बातचीत चल रही है।

नई दिल्ली: लद्दाख में चीन ने अपने सदाबहार दोस्त पाकिस्तान की तरह चालबाजी की है। दरअसल, सेना के कुछ जवानों के कोरोना संक्रमित होने के बाद भारत ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के करीब मार्च के शुरू में होने वाले अपने अभ्यास को कुछ समय के लिए टाल दिया था। इसी का फायदा उठाते हुए चीनी सेना ने रणनीतिक दृष्टि से अहम भारतीय सेना के पेट्रोलिंग वाले इलाके में आगे बढ़ते हुए वहां अपनी पोजीशन मजबूत कर ली। इसके बाद से दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है। सेना और भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस का सब सेक्टर नॉर्थ (SSN) में मार्च में होने वाला अभ्यास सेना के कुछ जवानों के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद टाल दिया था। यह अभ्यास जवाबी अभ्यास होता है और इसमें हिमाचल बेस के जवान शामिल होते हैं। मार्च के दूसरे सप्ताह में एक जवान कोरोना संक्रमित पाया गया था इसके बाद कई तरह के ऐहतियाती कदम उठाए गए थे। इसमें सुरक्षाबलों के जमावड़े पर रोक लगा दी गई थी। अधिकारियों ने बताया कि कोरोना महामारी को फैलने से रोकने के लिए लद्दाख में किया जाने वाला अभ्यास को भी स्थगित करने का फैसला इसमें शामिल था। चीन ने भी अपने अभ्यास को एक महीने के लिए स्थगित कर दिया था लेकिन चीन ने चालाकी दिखाते हुए गलवान घाटी और पैंगोंग शो झील के करीब फिंगर एरिया में तुरंत सैनिकों की तैनाती कर दी। गलवान तनाव के बारे में सबसे पहले जानकारी दी थी। चीनी सैनिकों के पहुंचने के कारण दौलद बेग ओलिड और काराकोरम पास से लेह तक जाने के लिए पिछले साल बनाए गए सड़क से संपर्क टूट जाने का खतरा मंडराने लगा है। चीन की चाल को देखते हुए भारत ने सभी कोविड-19 प्रोटोकॉल तोड़ते हुए लेह में तैनात अपने सैनिकों तो तुरंत इलाके में भेज दिया। हालांकि पहले ही चालाकी कर चुके चीन को भारतीय इलाके गलवान और फिंगर इलाके में अहम रणनीतिक बढ़त हासिल हो चुकी थी। सूत्रों ने बताया कि गलवान में चीन के करीब 3,400 सैनिक तैनात हैं जबकि पैंगोंग लेक के करीब 3,600 चीनी सैनिक हैं। ई-मेल से भेजे सवाल पर गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि ADGPI, रक्षा मंत्रालय और भारत सरकार भारत-चीन सीमा पर जानकारी देगी। ITBP के प्रवक्ता की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। सेना ने स्थिति पर कोई टिप्पणी नहीं की लेकिन इतना जरूर कहा कि अभी सीमा पर किसी प्रकार की कोई हिंसा नहीं हुई है। सूत्रों ने बताया कि Lockdown के दूसरे चरण के दौरान भारत ने अप्रैल के अंत में सीम पर चीनी सैनिकों का मूवमेंट को नोटिस किया था। लद्दाख में भारत और चीनी सैनिकों के बीच पहली झड़प की खबर 5-6 मई को आई थी। झड़प में कई भारतीय जवानों के घायल होने की खबरें भी आई थीं। सैटलाइट तस्वीरों के हवाले से सरकारी सूत्रों ने बताया कि चीनी सैनिक भारतीय सेना के पेट्रोलिंग वाले इलाकों पोजीशन बना ली है और कुछ रणनीतिक दृष्टि से अहम क्षेत्र में भी आ गए हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पहले बताया था कि भारत चीन के साथ इस मसले को सुलझाने की कोशिश कर रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी एक इंटरव्यू में कहा था कि चीन ने सीमा पर सेनाएं बढ़ाई हैं और मसले को सुलझाने के लिए बातचीत चल रही है।