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लॉकडाउन 4.0: CRPF के आठ IG को मिली नई पोस्टिंग , महकमे में घमासान

Lockdown 4 0 Eight Igs Of Crpf Get New Posting Arson

By बलराम सिंह 
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नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल ‘सीआरपीएफ’ में आठ वरिष्ठ महानिरीक्षकों (आईजी) को तत्काल प्रभाव से नई पोस्टिंग पर जाने का आदेश जारी होने से अर्धसैनिक बल में हड़कंप मच गया है। इनमें से एक आईपीएस अधिकारी है, जबकि बाकी सभी सीआरपीएफ कैडर के अफसर हैं। यह तबादला सूची 22 फरवरी को जारी हुई थी, लेकिन लॉकडाउन के चलते इनकी नई ज्वानिंग रोक दी गई थी। अब लॉकडाउन 4.0 में ऑपरेशनल जरूरत बताकर इन अफसरों को तत्काल अपनी नई पोस्टिंग पर जाने का आदेश दिया गया है।

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मौजूदा स्थिति में सभी कोर्स और ट्रेनिंग पर रोक लगी है। कॉडर अफसरों और कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वैलफेयर एसोसिएशन का आरोप है कि इन तबादलों में भेदभाव बरता गया है। कई गैर-आईपीएस अधिकारियों को उनका तय कार्यकाल पूरा होने से पहले ही हटा दिया गया है।

जिन कैडर अफसरों को तत्काल प्रभाव से अपनी नई पोस्टिंग पर जाने का आदेश मिला है, उनमें आईजी अरूण कुमार को आरएएफ सेक्टर से आईएसएएम माउंट आबू भेजा गया है। प्रदीप कुमार सिंह, जो हेडक्वार्टर में आईजी इंटेलिजेंस का पदभार संभाल रहे थे, उन्हें पश्चिम बंगाल सेक्टर की कमान सौंपी गई है। इस तबादला सूची में अंशुमन यादव एकमात्र आईपीएस हैं, जिन्हें एमएंडएन सेक्टर से दिल्ली लाकर आईजी इंटेलिजेंस लगाया गया है। खास बात है कि यादव दो माह पहले ही दिल्ली आ चुके हैं। उनके ट्रांसफर आदेश में भी लिखा है कि वे हेडक्वार्टर में ही एमएंडएन सेक्टर के नए आईजी को चार्ज सौंपेंगे।

रणदीप दत्ता को सीआरपीएफ अकादमी कादरपुर से एमएंडएन सेक्टर में लगाया गया है। एवी चौहान को राजस्थान सेक्टर से कादरपुर स्थित सीआरपीएफ अकादमी में भेजा गया है। विक्रम सहगल को आईजी एस्टेब्लिश हेडक्वार्टर से राजस्थान सेक्टर की कमान संभालने के लिए कहा गया है। वहीं विवेक वैद्य को डीटीई जन. से आईजी एस्टेब्लिश की कमान दी गई है। जीवीएच गिरी प्रसाद को केके सेक्टर से बिहार सेक्टर में लगाया गया है।

कैडर अफसरों और कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वैलफेयर एसोसिएशन का आरोप है कि ये तबादले अफसरों को परेशान करने के लिए किए गए हैं। केंद्र सरकार और खुद बल मुख्यालय ने भी ये हिदायत जारी की थी कि लॉकडाउन में कोई भी तबादला न किया जाए। यहां तक कि सभी कोर्स और ट्रेनिंग भी बंद कर दी गई थी। एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह का कहना है कि इन तबादलों में पूरा भेदभाव किया गया है। सच्चाई यह है कि अभी किसी तरह की ऑपरेशनल जरूरत नहीं थी, केवल इसकी आड़ में कैडर अफसरों पर गाज गिराई गई है।

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कई ऐसे आईपीएस अफसर हैं, जिन्हें पसंदीदा पोस्टिंग मिली है। उन्हें मुख्यालय से बाहर गए भले ही एक-दो साल हुए थे, लेकिन वे बेहतर पोस्टिंग लेने में कामयाब हो गए। कैडर अधिकारी, जिन्हें मुख्यालय से बाहर गए हुए चार वर्ष या उससे ज्यादा का समय हो चुका है, लेकिन उन्हें दिल्ली नहीं लाया गया। आईजी रणदीप दत्ता ऐसे कैडर अफसर हैं, जो करीब दो दशक बाद दिल्ली लौटे थे। वे 16 मार्च 2018 को दिल्ली आए, लेकिन अब उन्हें मुख्यालय से बाहर भेज दिया गया है। दत्ता की दलील थी उनके पिता की आयु 90 साल है, उनका इलाज कराना है, लेकिन अब उन्हें यहां से रवाना कर दिया गया।

इसी तरह विक्रम सहगल को दो साल भी पूरे नहीं हुए थे कि उन्हें भी राजस्थान भेज दिया गया है। आईपीएस अंशुमन यादव, जिन्हें मणिपुर में एक ही साल हुआ था, वे दिल्ली आ गए हैं, जबकि गुवाहाटी में आईजी संजय कौशिक को चार साल हो चुके हैं, लेकिन उनका तबादला दिल्ली नहीं किया गया। कैडर अफसर कौशिक ने दिल्ली आने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री से लेकर गृह सचिव तक को तबादले का आवेदन दिया, लेकिन कुछ नहीं हुआ। दिल्ली या मुंबर्ह मांगा तो ग्वालियर दे दिया गया।

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