लॉकडाउन: कोरोना के चलते 28 सालों में दूसरी बार रामलला को मिला इतना कम चढ़ावा

shri ram lala
लॉकडाउन: कोरोना के चलते 28 सालों में दूसरी बार रामलला को मिला इतना कम चढ़ावा

अयोध्या। अयोध्या में विराजमान भगवान श्रीरामलला को बीते 15 दिनों में न्यूनतम चढ़ावा मिला है। बीते 28 सालों में यह दूसरी बार हुआ है जब श्रीरामलला को इतना कम चढ़ावा मिला है। बीते पखवारे में चढ़ावे की कुल राशि महज 13 हजार ही थी जबकि इसके पहले पखवारे में साढ़े आठ लाख का चढ़ावा रामलला को प्राप्त हुआ था।

Lockdown For The Second Time In 28 Years Due To Corona Ramlala Got Such A Low Offer :

बताया जा रहा है कि इसके पहले साल 2002 में शिलादान के दौरान यहां महीनो चले अघोषित कर्फ्यू के दौरान भी ऐसी ही स्थिति आई, जब अयोध्या में श्रद्धालुओं के आने पर रोक लग गई थी। उस समय राम नगरी के मंदिरों के व्यवस्थापकों को भारी घाटा उठाना पड़ा। इस बार भी कोरोना की वैश्विक महामारी के कारण देश भर में घोषित लॉकडाउन के चलते विश्व प्रसिद्ध रामनवमी मेला ही नहीं हो सका।

यही कारण है कि इस पखवारे रामजन्मभूमि में विराजमान रामलला को न्यूनतम चढ़ावा ही प्राप्त हुआ। वह भी यह चढ़ावा तब आ सका जबकि लाकडाउन के बाद भी श्रीरामजन्मभूमि में दर्शन पर कोई रोक नही लगाई गई। इसके विपरीत शेष मंदिरों को जिला प्रशासन के निर्देश पर आम श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया गया। इसके चलते इन सभी मंदिरों में आमदनी शून्य हो गई। उधर श्रीरामजन्मभूमि में चढ़ावा राशि की गिनती प्रत्येक माह की पांचवी और बीसवीं तारीख को की जाती है।

इस कड़ी में चढ़ावा की गिनती श्रीरामजन्मभूमि ट्रस्ट के ट्रस्टी डा. अनिल मिश्र की मौजूदगी में भारतीय स्टेट बैंक की अयोध्या शाखा के कर्मचारियों ने मशीन के माध्यम से की लेकिन चढ़ावे की राशि इतनी कम थी कि मशीन की जरुरत ही नहीं रही। फिर भी कोरोना महामारी से सावधानी को लेकर कर्मचारियों ने मैनुवल गिनती से परहेथ किया। बताया गया कि चढ़ावे की कुल राशि महज 13 हजार ही थी जबकि इसके पहले पखवारे में साढ़े आठ लाख का चढ़ावा रामलला को प्राप्त हुआ था।

 

अयोध्या। अयोध्या में विराजमान भगवान श्रीरामलला को बीते 15 दिनों में न्यूनतम चढ़ावा मिला है। बीते 28 सालों में यह दूसरी बार हुआ है जब श्रीरामलला को इतना कम चढ़ावा मिला है। बीते पखवारे में चढ़ावे की कुल राशि महज 13 हजार ही थी जबकि इसके पहले पखवारे में साढ़े आठ लाख का चढ़ावा रामलला को प्राप्त हुआ था। बताया जा रहा है कि इसके पहले साल 2002 में शिलादान के दौरान यहां महीनो चले अघोषित कर्फ्यू के दौरान भी ऐसी ही स्थिति आई, जब अयोध्या में श्रद्धालुओं के आने पर रोक लग गई थी। उस समय राम नगरी के मंदिरों के व्यवस्थापकों को भारी घाटा उठाना पड़ा। इस बार भी कोरोना की वैश्विक महामारी के कारण देश भर में घोषित लॉकडाउन के चलते विश्व प्रसिद्ध रामनवमी मेला ही नहीं हो सका। यही कारण है कि इस पखवारे रामजन्मभूमि में विराजमान रामलला को न्यूनतम चढ़ावा ही प्राप्त हुआ। वह भी यह चढ़ावा तब आ सका जबकि लाकडाउन के बाद भी श्रीरामजन्मभूमि में दर्शन पर कोई रोक नही लगाई गई। इसके विपरीत शेष मंदिरों को जिला प्रशासन के निर्देश पर आम श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया गया। इसके चलते इन सभी मंदिरों में आमदनी शून्य हो गई। उधर श्रीरामजन्मभूमि में चढ़ावा राशि की गिनती प्रत्येक माह की पांचवी और बीसवीं तारीख को की जाती है। इस कड़ी में चढ़ावा की गिनती श्रीरामजन्मभूमि ट्रस्ट के ट्रस्टी डा. अनिल मिश्र की मौजूदगी में भारतीय स्टेट बैंक की अयोध्या शाखा के कर्मचारियों ने मशीन के माध्यम से की लेकिन चढ़ावे की राशि इतनी कम थी कि मशीन की जरुरत ही नहीं रही। फिर भी कोरोना महामारी से सावधानी को लेकर कर्मचारियों ने मैनुवल गिनती से परहेथ किया। बताया गया कि चढ़ावे की कुल राशि महज 13 हजार ही थी जबकि इसके पहले पखवारे में साढ़े आठ लाख का चढ़ावा रामलला को प्राप्त हुआ था।