लॉकडाउन: स्‍कूटी पर गुड़गांव से पश्चिम बंगाल के लिए निकली मां-बेटी, वाराणसी में प्यार तो छलक आये आंसू

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लॉकडाउन: स्‍कूटी पर गुड़गांव से पश्चिम बंगाल के लिए निकली मां-बेटी, वाराणसी में प्यार तो छलक आये आंसू

वाराणसी। वाराणसी के रोहनिया में गुरुवार को अखरी बाईपास के समीप 17 साल की श्रीलेखा अपनी मां के साथ स्‍कूटी से पहुंची। हरियाणा नम्बर की स्कूटी देखकर लोगों ने पूछा तो श्रीलेखा ने बताया कि वह तीन दिन पहले गुड़गांव से निकली थी। मूल रूप से पश्चिम बंगाल की रहने वाली श्रीलेखा ने बताया कि लॉकडाउन की वजह से मेरा पूरा परिवार गुड़गांव में फंसा हुआ था। श्रीलेखा गुड़गांव में बच्चों के केयर टेकर का कार्य करती है और उनकी मां काजल लोगों के घर में झाड़ू पोछा लगाने का काम कर परिवार का पालन पोषण करती हैं ।

Lockdown Mother Daughter Set Out From Gurgaon To West Bengal On Scooty Tears Fall In Love In Varanasi :

श्रीलेखा 25 तारीख की शाम में स्कूटी पर अपनी मां काजल को बैठाकर घर के कुछ सामान के साथ पश्चिम बंगाल के लिए रवाना हुई। 3 दिन की दूरी तयकर बनारस पहुचीं तो रास्ते भर की आपबीती को जाहिर करते हुए बताया कि हम लोगों को इन 3 दिनों के सफर में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। खाने की समस्या और रात में सोने की दिक्‍कत सबसे कष्‍टदायक रही। हम लोग जहां पर भी सोने की जगह खोजते तो वह के स्थानीय लोग गाली गलौज कर पुलिस को बुलाने की धमकी देते थे।

बताया कि जीवन के इस कठिन सफर के दौरान पहली बार कुछ समय के लिए बनारस में रुकी और यहां के लोगों का प्रेम भाव देखकर मुझे अपने परिवार के लोगों की याद सताने लगी। इसी क्रम में काशीवासियों द्वारा श्रीलेखा और उनकी मां काजल को भर पेट भोजन कराया गया और रास्ते के लिए भी पर्याप्त भोजन ले जाने के लिए दिए। बनारस वासियों के इस प्रेम भाव को देखकर मां-बेटी के आंखों में आंसू छलक उठे। कहा कि मैं इस दिन को कभी नहीं भूलंगी जब बाबा की नगरी में हमें इतना प्रेम और सहयोग मिला। कहना था कि जब यहां तक पहुंच गए तो घर भी पहुंच जाएंगे क्‍योंकि अब हमें बाबा का आशीर्वाद प्राप्‍त हो गया है।

वाराणसी। वाराणसी के रोहनिया में गुरुवार को अखरी बाईपास के समीप 17 साल की श्रीलेखा अपनी मां के साथ स्‍कूटी से पहुंची। हरियाणा नम्बर की स्कूटी देखकर लोगों ने पूछा तो श्रीलेखा ने बताया कि वह तीन दिन पहले गुड़गांव से निकली थी। मूल रूप से पश्चिम बंगाल की रहने वाली श्रीलेखा ने बताया कि लॉकडाउन की वजह से मेरा पूरा परिवार गुड़गांव में फंसा हुआ था। श्रीलेखा गुड़गांव में बच्चों के केयर टेकर का कार्य करती है और उनकी मां काजल लोगों के घर में झाड़ू पोछा लगाने का काम कर परिवार का पालन पोषण करती हैं । श्रीलेखा 25 तारीख की शाम में स्कूटी पर अपनी मां काजल को बैठाकर घर के कुछ सामान के साथ पश्चिम बंगाल के लिए रवाना हुई। 3 दिन की दूरी तयकर बनारस पहुचीं तो रास्ते भर की आपबीती को जाहिर करते हुए बताया कि हम लोगों को इन 3 दिनों के सफर में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। खाने की समस्या और रात में सोने की दिक्‍कत सबसे कष्‍टदायक रही। हम लोग जहां पर भी सोने की जगह खोजते तो वह के स्थानीय लोग गाली गलौज कर पुलिस को बुलाने की धमकी देते थे। बताया कि जीवन के इस कठिन सफर के दौरान पहली बार कुछ समय के लिए बनारस में रुकी और यहां के लोगों का प्रेम भाव देखकर मुझे अपने परिवार के लोगों की याद सताने लगी। इसी क्रम में काशीवासियों द्वारा श्रीलेखा और उनकी मां काजल को भर पेट भोजन कराया गया और रास्ते के लिए भी पर्याप्त भोजन ले जाने के लिए दिए। बनारस वासियों के इस प्रेम भाव को देखकर मां-बेटी के आंखों में आंसू छलक उठे। कहा कि मैं इस दिन को कभी नहीं भूलंगी जब बाबा की नगरी में हमें इतना प्रेम और सहयोग मिला। कहना था कि जब यहां तक पहुंच गए तो घर भी पहुंच जाएंगे क्‍योंकि अब हमें बाबा का आशीर्वाद प्राप्‍त हो गया है।