लॉकडाउन: रमजान के दिनो में गरीबों के मसीहा बने नातिक हक

Natiq Haque
लॉकडाउन: रमजान के दिनो में गरीबों के मसीहा बने नातिक हक

लखनऊ। ‘मैं राह का चराग़ हूँ, सूरज तो नहीं हूँ, जितनी मेरी बिसात है, काम आ रहा हूँ मैं ||’ जी हां ये कहना है उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रहने वाले समाजसेवी नातिक हक का। नातिक हक कई सालों से निस्वार्थ भावना से बिना किसी एनजीओ के समाज के दबे कुचले, गरीबों व जरूरतमंदो की मदद करते रहते हैं। ईद के मौके पर उन्होने घर में नमाज अदा करते हुए अल्लाह से इबादत की कि इस महामारी में कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे।

Lockdown Naitik Haq Became The Messiah Of The Poor During Ramadan :

बता दें कि कोरोना महामारी की वजह से पिछले दो महीने से लॉकडाउन चल रहा है, इसी दौरान रमजान का त्योहार भी पड़ गया। नातिक हक ने रमजान के दिनो में अल्लाह की इबादत के साथ साथ गरीबों की मदद करना अपना पहला कर्तव्य समझा। दिन रात उन्होने अपने दो दोस्तों की मदद से गरीबों व जरूरतमंदो को राशन मुहैया करवाया। यही नही जरूरत की सामान के साथ साथ आर्थिक मदद भी की।

पहले से भी करते रहे हैं मदद

इस लॉकडाउन में गरीबों के साथ साथ उन्होने तमाम पुलिस वालों, होमगार्डो और सफाई कर्मचारियों को भी फेस मास्क दिये। इससे पहले भी वो लगभग 28 से 30 मृत लोगों का दाह संंस्कार अपने खर्च से करवा चुके हैं। एसिड अटैक विक्टिम की भी आर्थिक मदद कर चुके हैं। उनके लिए कोई हिंदू हो या मुस्लिम, ये मायने नही रखता, अगर किसी को जरूरत होती है तो वो हमेशा उसके साथ खड़े रहते हैं।

लखनऊ। 'मैं राह का चराग़ हूँ, सूरज तो नहीं हूँ, जितनी मेरी बिसात है, काम आ रहा हूँ मैं ||' जी हां ये कहना है उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रहने वाले समाजसेवी नातिक हक का। नातिक हक कई सालों से निस्वार्थ भावना से बिना किसी एनजीओ के समाज के दबे कुचले, गरीबों व जरूरतमंदो की मदद करते रहते हैं। ईद के मौके पर उन्होने घर में नमाज अदा करते हुए अल्लाह से इबादत की कि इस महामारी में कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे। बता दें कि कोरोना महामारी की वजह से पिछले दो महीने से लॉकडाउन चल रहा है, इसी दौरान रमजान का त्योहार भी पड़ गया। नातिक हक ने रमजान के दिनो में अल्लाह की इबादत के साथ साथ गरीबों की मदद करना अपना पहला कर्तव्य समझा। दिन रात उन्होने अपने दो दोस्तों की मदद से गरीबों व जरूरतमंदो को राशन मुहैया करवाया। यही नही जरूरत की सामान के साथ साथ आर्थिक मदद भी की। पहले से भी करते रहे हैं मदद इस लॉकडाउन में गरीबों के साथ साथ उन्होने तमाम पुलिस वालों, होमगार्डो और सफाई कर्मचारियों को भी फेस मास्क दिये। इससे पहले भी वो लगभग 28 से 30 मृत लोगों का दाह संंस्कार अपने खर्च से करवा चुके हैं। एसिड अटैक विक्टिम की भी आर्थिक मदद कर चुके हैं। उनके लिए कोई हिंदू हो या मुस्लिम, ये मायने नही रखता, अगर किसी को जरूरत होती है तो वो हमेशा उसके साथ खड़े रहते हैं।