लॉकडाउन: यूपी बना देश देश का नंबर–1 चीनी उत्पादक, इस दौरान चलीं 119 चीनी मिलें

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लॉकडाउन: यूपी बना देश देश का नंबर–1 चीनी उत्पादक, इस दौरान चलीं 119 चीनी मिलें

लखनऊ। हालांकि बीते 22 मार्च से 31 मई तक यूपी पूरी तरह से लॉकडाउन था लेकिन योगी सरकार ने इस दौरान किसानो और मजदूरों अर्थव्यवस्था का ख्याल रखते हुए कई बड़े कदम उठाये। उत्तर प्रदेश में कोरोना लॉकडाउन के दौरान किसानों को किए जा रहे भुगतान की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को समीक्षा की. टीम-11 की बैठक में सामने आया है कि कोरोना संकट के दौरान योगी सरकार ने किसानों की काफी मदद की है.

Lockdown Up Becomes Countrys No 1 Sugar Producer 119 Sugar Mills Moved During This Period :

फसलों की कटाई के लिए लॉकडाउन के दौरान यूपी सरकार ने कृषि यंत्रों को खेतों तक जाने की सबसे पहले छूट दी थी. इस अवधि में यूपी सरकार ने सभी 119 चीनी मिलें चलाईं.

जानकारी के अनुसार लॉकडाउन के दौरान योगी सरकार ने इस सत्र का गन्ना किसानों को 20 हजार करोड़ का भुगतान किया है. फसल खरीद के तत्काल बाद सीधे खातों में पैसे भेजे गए हैं. इस सत्र में 11 हजार 500 लाख कुंतल गन्ने की पेराई हुई. लॉकडाउन के बावजूद यूपी में रिकार्ड 1251 लाख कुंतल चीनी का उत्पादन हुआ है. इसके साथ ही यूपी देश का नंबर–1 चीनी उत्पादक प्रदेश बन गया है. चीनी उत्पादन में महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर है.

पिछले तीन सालों में योगी सरकार ने गन्ना किसानों को 99 हजार करोड़ का भुगतान किया है. 72 हजार 424 श्रमिकों को भी पूरे लॉकडाउन के दौरान 119 चीनी मिलों में रोजगार मिला. 35 से 40 हजार किसान इन 119 चीनी मिलों से सीधे जुड़े. वहीं गन्ना छिलाई में भी 10 लाख श्रमिकों को प्रतिदिन रोजगार दिया गया. यही नहीं प्रदेश के 2 करोड़ 4 लाख किसानों को कोरोना आपदा के दौरान दो बार 2- 2 हजार की किसान सम्मान निधि दी गई.

अफसरों ने सीएम को बताया कि कोरोना आपदा के दौरान गेहूं किसानों को योगी सरकार ने 3 हजार 890 करोड़ का भुगतान किया है. लॉकडाउन के बावजूद फसल खरीद के बाद तत्काल किसानों के खातों में रकम भेजी गई. यही नहीं सरकार युद्धस्तर पर गेहूं खरीद कराती रही. एफपीसी के माध्यम से किसानों के खेतों पर जाकर भी गेहूं खरीद की गई. लॉकडाउन के दौरान भी योगी सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कुल 3.477 लाख कुंतल गेहूं खरीदा है. इसी दौरान किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 8887 मीट्रिक टन चने की भी खरीद हुई और भुगतान किया गया है.

लखनऊ। हालांकि बीते 22 मार्च से 31 मई तक यूपी पूरी तरह से लॉकडाउन था लेकिन योगी सरकार ने इस दौरान किसानो और मजदूरों अर्थव्यवस्था का ख्याल रखते हुए कई बड़े कदम उठाये। उत्तर प्रदेश में कोरोना लॉकडाउन के दौरान किसानों को किए जा रहे भुगतान की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को समीक्षा की. टीम-11 की बैठक में सामने आया है कि कोरोना संकट के दौरान योगी सरकार ने किसानों की काफी मदद की है. फसलों की कटाई के लिए लॉकडाउन के दौरान यूपी सरकार ने कृषि यंत्रों को खेतों तक जाने की सबसे पहले छूट दी थी. इस अवधि में यूपी सरकार ने सभी 119 चीनी मिलें चलाईं. जानकारी के अनुसार लॉकडाउन के दौरान योगी सरकार ने इस सत्र का गन्ना किसानों को 20 हजार करोड़ का भुगतान किया है. फसल खरीद के तत्काल बाद सीधे खातों में पैसे भेजे गए हैं. इस सत्र में 11 हजार 500 लाख कुंतल गन्ने की पेराई हुई. लॉकडाउन के बावजूद यूपी में रिकार्ड 1251 लाख कुंतल चीनी का उत्पादन हुआ है. इसके साथ ही यूपी देश का नंबर–1 चीनी उत्पादक प्रदेश बन गया है. चीनी उत्पादन में महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर है. पिछले तीन सालों में योगी सरकार ने गन्ना किसानों को 99 हजार करोड़ का भुगतान किया है. 72 हजार 424 श्रमिकों को भी पूरे लॉकडाउन के दौरान 119 चीनी मिलों में रोजगार मिला. 35 से 40 हजार किसान इन 119 चीनी मिलों से सीधे जुड़े. वहीं गन्ना छिलाई में भी 10 लाख श्रमिकों को प्रतिदिन रोजगार दिया गया. यही नहीं प्रदेश के 2 करोड़ 4 लाख किसानों को कोरोना आपदा के दौरान दो बार 2- 2 हजार की किसान सम्मान निधि दी गई. अफसरों ने सीएम को बताया कि कोरोना आपदा के दौरान गेहूं किसानों को योगी सरकार ने 3 हजार 890 करोड़ का भुगतान किया है. लॉकडाउन के बावजूद फसल खरीद के बाद तत्काल किसानों के खातों में रकम भेजी गई. यही नहीं सरकार युद्धस्तर पर गेहूं खरीद कराती रही. एफपीसी के माध्यम से किसानों के खेतों पर जाकर भी गेहूं खरीद की गई. लॉकडाउन के दौरान भी योगी सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कुल 3.477 लाख कुंतल गेहूं खरीदा है. इसी दौरान किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 8887 मीट्रिक टन चने की भी खरीद हुई और भुगतान किया गया है.