सुप्रीम कोर्ट ने सभी VVPAT पर्चियों की जांच करने की मांग वाली याचिका खारिज की

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सुप्रीम कोर्ट ने सभी VVPAT पर्चियों की जांच करने की मांग वाली याचिका खारिज की

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने EVM और VVPAT के 100% पर्चियों के मिलान के मामले में दायर की गई याचिका खरिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा यह क्या बकवास है। अदालत ने कहा कि हम ऐसी याचिकाओं को बार-बार समय नहीं दे सकते। कोर्ट ने कहा कि वह जनप्रतिनिधियों को चुनने की राह में हम आड़े नहीं आएगा। यह याचिका कुछ टेक्नोक्रेट्स ने लगाई थी।

Lok Sabha Elections 2019 Supreme Court Dismisses Pil Seeking 100 Percent Counting Of Vvpat Slips Says Democracy Will Suffer :

उधर, कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने ऐन मौके पर दिल्ली दौरा रद्द कर दिया है। पहले वे भी विपक्षी नेताओं के साथ चुनाव आयोग से मिलने वाले थे। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उनकी पार्टी जेडीएस की ओर से विपक्षी नेताओं के समूह में कोई शामिल होगा या नहीं।

बता दें चेन्नई के टेक फॉर ऑल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जिसमें उन्होंने कहा था कि तकनीकी तौर पर वीवीपैट से जुडी़ ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) ठीक नहीं हैं। याचिकाकर्ता ने ईवीएम मशीनों में गड़बड़ी का हवाला देते हुए कोर्ट से सभी ईवीएम का वीवीपैट से मिलान करने की मांग की थी।

इससे पहले सात मई को सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम और वीवीपैट की पर्चियों के मिलान वाली विपक्ष की याचिका खारिज कर दी है। इसके लिए कुल 21 विपक्षी दलों ने याचिका दायर की थी। ये दल चाहते थे कि चुनाव आयोग 50 फीसदी वीवीपैट पर्चियों के ईवीएम से मिलान का आदेश दे।

कोर्ट के फैसले के बाद याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि 21 दलों में पूर्व और आज के मुख्यमंत्री शामिल थे। हम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। हमारी मांग की वजह से एक की बजाय पांच बूथ पर वीवीपैट मिलान की बात स्वीकारी गई है।

वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें इस मामले में दखलअंदाजी नहीं करनी है। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई का कहना है कि एक ही मामले को बार-बार क्यों सुनें?

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने EVM और VVPAT के 100% पर्चियों के मिलान के मामले में दायर की गई याचिका खरिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा यह क्या बकवास है। अदालत ने कहा कि हम ऐसी याचिकाओं को बार-बार समय नहीं दे सकते। कोर्ट ने कहा कि वह जनप्रतिनिधियों को चुनने की राह में हम आड़े नहीं आएगा। यह याचिका कुछ टेक्नोक्रेट्स ने लगाई थी। उधर, कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने ऐन मौके पर दिल्ली दौरा रद्द कर दिया है। पहले वे भी विपक्षी नेताओं के साथ चुनाव आयोग से मिलने वाले थे। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उनकी पार्टी जेडीएस की ओर से विपक्षी नेताओं के समूह में कोई शामिल होगा या नहीं। बता दें चेन्नई के टेक फॉर ऑल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जिसमें उन्होंने कहा था कि तकनीकी तौर पर वीवीपैट से जुडी़ ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) ठीक नहीं हैं। याचिकाकर्ता ने ईवीएम मशीनों में गड़बड़ी का हवाला देते हुए कोर्ट से सभी ईवीएम का वीवीपैट से मिलान करने की मांग की थी। इससे पहले सात मई को सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम और वीवीपैट की पर्चियों के मिलान वाली विपक्ष की याचिका खारिज कर दी है। इसके लिए कुल 21 विपक्षी दलों ने याचिका दायर की थी। ये दल चाहते थे कि चुनाव आयोग 50 फीसदी वीवीपैट पर्चियों के ईवीएम से मिलान का आदेश दे। कोर्ट के फैसले के बाद याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि 21 दलों में पूर्व और आज के मुख्यमंत्री शामिल थे। हम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। हमारी मांग की वजह से एक की बजाय पांच बूथ पर वीवीपैट मिलान की बात स्वीकारी गई है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें इस मामले में दखलअंदाजी नहीं करनी है। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई का कहना है कि एक ही मामले को बार-बार क्यों सुनें?