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भाजपा के 75 पार नेता भी लड़ सकते हैं चुनाव, बुजुर्ग नेताओं को मिल सकता है बड़ा मौका

By टीम पर्दाफाश 
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नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) के बुजुर्ग नेताओं के लिए ये खबर राहत की है। लोकसभा चुनाव में अपने वरिष्ठ नेताओं को चुनावी मैदान में उतारने के लिए भाजपा ने अपने नियमों में बदलाव किया है। उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि यदि कोई मौजूदा सांसद फिर से चुनाव लड़ना चाहता है, तो उसे मौका देने में पार्टी को कोई एतराज नहीं होगा। उम्र के कारण पार्टी टिकट नहीं काटेगी।

भाजपा में ऐसे सांसदों की संख्या करीब डेढ़-दो दर्जन से ज्यादा है, जो 75 साल की उम्र पार कर चुके हैं। सबसे वयोवृद्ध लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी एवं शांता कुमार हैं। आडवाणी 91 वर्ष, जोशी 85 वर्ष तो शांता कुमार 84 वर्ष के हैं।

पार्टी सूत्रों की मानें तो 75 साल की उम्र सीमा सिर्फ मंत्री बनाने के लिए है, लोकसभा का चुनाव लड़ने के लिए नहीं। इसलिए जो बुजुर्ग नेता हैं, उन्हें खुद ही निर्णय लेना होगा कि वह चुनाव लड़ना चाहते हैं या नहीं। पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेता और गांधीनगर से सांसद लालकृष्ण आडवाणी चुनाव लड़ेंगे या नहीं, यह फैसला उन्हीं पर छोड़ दिया गया है। हालांकि उन्होंने अभी तक नेतृत्व को अपनी इच्छा से अवगत नहीं कराया है।

हाल ही में स्वास्थ्य कारणों से अगला लोकसभा चुनाव न लड़ने की घोषणा करनी वाली सुषमा स्वराज को चुनाव मैदान में उतरना पड़ सकता है। एक शीर्ष नेता के मुताबिक, भले ही सुषमा ने खुद चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा की है, मगर यह पार्टी का फैसला नहीं है।

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