लंदन कोर्ट ने WikiLeaks संस्थापक की गिरफ्तारी वारंट रद्द करने की याचिका खारिज की

लंदन कोर्ट ने WikiLeaks संस्थापक की गिरफ्तारी वारंट रद्द करने की याचिका खारिज
लंदन कोर्ट ने WikiLeaks संस्थापक की गिरफ्तारी वारंट रद्द करने की याचिका खारिज
लंदन। विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन असांज की आजादी की उम्मीदें मंगलवार को उस समय टूट गईं, जब लंदन की एक अदालत ने गिरफ्तारी वारंट रद्द करने की उनकी याचिका को रद्द कर दिया। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, 46 वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई नागरिक असांज ने 2012 से लंदन स्थित इक्वाडोर के दूतावास में शरण ले रखी है। उन्हें डर है कि अगर वह इमारत से बाहर निकले तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा जिससे उन्हें अमेरिका प्रत्यर्पित करने का रास्ता खुल…

लंदन। विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन असांज की आजादी की उम्मीदें मंगलवार को उस समय टूट गईं, जब लंदन की एक अदालत ने गिरफ्तारी वारंट रद्द करने की उनकी याचिका को रद्द कर दिया। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, 46 वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई नागरिक असांज ने 2012 से लंदन स्थित इक्वाडोर के दूतावास में शरण ले रखी है। उन्हें डर है कि अगर वह इमारत से बाहर निकले तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा जिससे उन्हें अमेरिका प्रत्यर्पित करने का रास्ता खुल सकता है।

वरिष्ठ जिला न्यायाधीश एमा अर्बथनॉट ने लंदन के वेस्टमिंस्टर मैजिस्ट्रेट कोर्ट में मंगलवार को अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि जमानत पर आत्मसमर्पण न करने पर उन्हें गिरफ्तार किया जाना जनहित में है। न्यायाधीश ने कहा, मुझे लगता है कि गिरफ्तारी एक आनुपातिक प्रतिक्रिया है। हालांकि, असांज ने कई वर्षों से खुद ही अपनी आजादी पर अंकुश लगा रखा है।

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न्यायाधीश ने कहा, “ऐसा प्रतीत हो रहा है कि वह खुद को कानून से ऊपर मानते हैं और उसी स्थिति में न्याय चाहते हैं जब फैसला उनके हक में सुनाया जाए। असांज ने स्वीडन प्रत्यर्पित होने से बचने के लिए दूतावास में शरण ली थी, जहां वह यौन उत्पीड़न के आरोप के बारे में पूछताछ के लिए वांछित थे। असांज हमेशा से इस आरोप से इनकार करते रहे हैं। स्वीडन ने हालांकि अब उनके खिलाफ जांच का मामला बंद कर दिया है।

असांज के वकील मार्क समर्स का तर्क है कि अब उनकी गिरफ्तारी अनुपातिक या जनहित में नहीं है क्योंकि वह पहले ही दूतावास के भीतर कई साल बिता चुके हैं।

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