राफेल डील पर बोले फ्रांस के राजदूत, कहा- लोगों को तथ्य देखना चाहिए, ट्वीट्स नहीं

राफेल डील पर बोले फ्रांस के राजदूत, कहा- लोगों को तथ्य देखना चाहिए, ट्वीट्स नहीं
राफेल डील पर बोले फ्रांस के राजदूत, कहा- लोगों को तथ्य देखना चाहिए, ट्वीट्स नहीं

नई दिल्ली। राफेल डील को लेकर फ्रांस के राजदूत एलेक्जेंडर जीग्लर ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और उनकी पार्टी पर निशाना साधा। जिगलर ने गुरुवार रात कहा कि लोगों को चाहिए कि वह ट्वीट्स की जगह तथ्यों पर भरोसा करना चाहिए. उन्होंने दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान यह बात कही। ध्यान हो कि राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने मोदी सरकार पर राफेल डील (Rafale Deal) में बड़ा घोटाला करने का आरोप लगाया है। उन्होंने आरोप लगाया था कि भाजपा सरकार ने जानबूझकर रिलायंस को यह ठेका दिया था।

Look At Facts Not Tweets France Ambassador On Rafale Deal :

राहुल गांधी ने कुछ दिन पहले ही छत्तीसगढ़ में कहा कि राफेल सौदे से जनता का तीस हजार करोड़ रुपये का घोटाले की भेंट चढ़ गया। उन्होने कहा कि हमारी(यूपीए) सरकार ने 136 राफेल जहाज खरीदने का सौदा किया था। तय हुआ था कि एक जहाज की कीमत 526 करोड़ होगी और यह विमान हिंदुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड (HAL) से बनवाएंगे।

मगर सत्ता में आने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं सौदे के रेट बदल दिए.526 करोड़ का हवाई जहाज 1600 करोड़ में खरीदा.राहुल गांधी ने सभा में मौजूद जनता से सवाल करते हुए कहा था कि आप पूछोगे कि भईया 526 करोड़ का जहाज 1600 करोड़ में क्यों खरीदा ? इसलिए क्योंकि एचएएल से कांट्रैक्ट छीनकर अनिल अंबानी को दिला दिया।

डील को लेकर जवाब दे चुके हैं दैसो के सीईओ

राफेल बनाने वाली कंपनी दैसो के सीईओ एरिक ट्रेपिए डील में गड़बड़ी के आरोपों को पहले ही नकार चुके हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू में ट्रेपिए ने कहा था कि रिलायंस डिफेंस को दैसो ने खुद ही पार्टनर चुना। उन्होंने बताया था कि रिलायंस के अलावा हमारे 30 दूसरे पार्टनर भी हैं।

राहुल ने आरोप लगाया था कि राफेल सौदे के लिए दैसो और रिलायंस के ज्वाइंट वेंचर के बारे में ट्रेपिए ने झूठ बोला था। राहुल ने कहा था, “मोदी सरकार ने पक्षपात कर अनिल अंबानी की घाटे में चल रही कंपनी को राफेल डील दिलवाई। उन्होंने कंपनी पर मोदी सरकार के साथ मिलीभगत का आरोप भी लगाया था।” ट्रेपिए ने इन आरोपों पर दुख जताते हुए कहा था कि उनकी कंपनी किसी पार्टी के लिए काम नहीं करती।

भारत-फ्रांस के बीच 36 राफेल की डील

भारत-फ्रांस सरकार के बीच सितंबर 2016 में राफेल डील हुई थी। इसके तहत फ्रांस भारत को 36 अत्याधुनिक लड़ाकू विमान देगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह सौदा 7.8 करोड़ यूरो (करीब 58 हजार करोड़ रु.) का है। पहला राफेल सितंबर 2019 में मिलेगा।

नई दिल्ली। राफेल डील को लेकर फ्रांस के राजदूत एलेक्जेंडर जीग्लर ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और उनकी पार्टी पर निशाना साधा। जिगलर ने गुरुवार रात कहा कि लोगों को चाहिए कि वह ट्वीट्स की जगह तथ्यों पर भरोसा करना चाहिए. उन्होंने दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान यह बात कही। ध्यान हो कि राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने मोदी सरकार पर राफेल डील (Rafale Deal) में बड़ा घोटाला करने का आरोप लगाया है। उन्होंने आरोप लगाया था कि भाजपा सरकार ने जानबूझकर रिलायंस को यह ठेका दिया था। राहुल गांधी ने कुछ दिन पहले ही छत्तीसगढ़ में कहा कि राफेल सौदे से जनता का तीस हजार करोड़ रुपये का घोटाले की भेंट चढ़ गया। उन्होने कहा कि हमारी(यूपीए) सरकार ने 136 राफेल जहाज खरीदने का सौदा किया था। तय हुआ था कि एक जहाज की कीमत 526 करोड़ होगी और यह विमान हिंदुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड (HAL) से बनवाएंगे। मगर सत्ता में आने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं सौदे के रेट बदल दिए.526 करोड़ का हवाई जहाज 1600 करोड़ में खरीदा.राहुल गांधी ने सभा में मौजूद जनता से सवाल करते हुए कहा था कि आप पूछोगे कि भईया 526 करोड़ का जहाज 1600 करोड़ में क्यों खरीदा ? इसलिए क्योंकि एचएएल से कांट्रैक्ट छीनकर अनिल अंबानी को दिला दिया। डील को लेकर जवाब दे चुके हैं दैसो के सीईओ राफेल बनाने वाली कंपनी दैसो के सीईओ एरिक ट्रेपिए डील में गड़बड़ी के आरोपों को पहले ही नकार चुके हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू में ट्रेपिए ने कहा था कि रिलायंस डिफेंस को दैसो ने खुद ही पार्टनर चुना। उन्होंने बताया था कि रिलायंस के अलावा हमारे 30 दूसरे पार्टनर भी हैं। राहुल ने आरोप लगाया था कि राफेल सौदे के लिए दैसो और रिलायंस के ज्वाइंट वेंचर के बारे में ट्रेपिए ने झूठ बोला था। राहुल ने कहा था, “मोदी सरकार ने पक्षपात कर अनिल अंबानी की घाटे में चल रही कंपनी को राफेल डील दिलवाई। उन्होंने कंपनी पर मोदी सरकार के साथ मिलीभगत का आरोप भी लगाया था।'' ट्रेपिए ने इन आरोपों पर दुख जताते हुए कहा था कि उनकी कंपनी किसी पार्टी के लिए काम नहीं करती। भारत-फ्रांस के बीच 36 राफेल की डील भारत-फ्रांस सरकार के बीच सितंबर 2016 में राफेल डील हुई थी। इसके तहत फ्रांस भारत को 36 अत्याधुनिक लड़ाकू विमान देगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह सौदा 7.8 करोड़ यूरो (करीब 58 हजार करोड़ रु.) का है। पहला राफेल सितंबर 2019 में मिलेगा।