भगवान शिव की कितनी पत्नियां और संतानें है, जानिए कैसा है भोले बाबा का परिवार

Bhagwan Shiv ka pariwar
भगवान शिव की कितनी पत्नियां और संतानें है, जानिए कैसा है भोले बाबा का परिवार

लखनऊ। भगवान सदाशिव, आदि शंकर, भोले नाथ अपने भक्तों पर असीम कृपा के लिए जाने जाते हैं। भगवान शिव बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते है और अपने भक्तों को इच्छित वरदान प्रदान करते हैं। हलाहल विष को अपने गले में धारण करने वाले तीनों लोकों के स्वामी भगवान भोलनाथ ही एक ऐसे देवता है जो इस ब्रम्हांड की उत्पत्ति के पहले से इस सृष्टि में विद्यमान है। भगवान शिव की कुछ संताने का जन्म चमत्कारिक रूप से और किसी महत्वपूर्ण कार्य की पूर्ति के लिए भी हुआ। आज हम आपको भोले शंकर के परिवार के बारे में रोचक बातें बताएंगे।

Lord Shiva Has So Many Wives And Children Know How Bhole Babas Family Is :

भगवान शिव की पत्नियाँ
भगवान शंकर की पहली पत्नी देवी सती थी जो की राजा दक्ष की पुत्री थीं। उन्होंने भगवान शिव की कठोर तपस्या करके उनको प्रसन्न किया और अपने साथ विवाह करने का वर माँगा। किन्तु देवी सती ने अपने पिता द्वारा भगवान शिव का अपमान करने के कारण योगाग्नि में जलकर देह त्याग कर दिया। दूसरे जन्म में देवी सती ने हिमालय और उनकी पत्नी मैयना के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया और फिर शिवजी से विवाह किया। इस तरह देवी पार्वती भगवान शिव की दूसरी पत्नी हुई। भगवान शिव की तीसरी पत्नी काली, चौथी उमा और पांचवीं गंगा माता को कहा जाता है।

भगवान शिव की तीन पुत्रियां

भगवान शिव की तीन पुत्रियां भी हैं। भगवान शिव जी की सबसे बड़ी बेटी अशोक सुंदरी को देवी पार्वती ने अपना अकेलापन दूर करने के लिए जन्‍म दिया था। उनका नाम अशोक इसलिए पड़ा क्‍योंकि वह देवी पार्वती के अकेलेपन का शोक दूर करने आई थीं। माना जाता है कि शिव की यह पुत्री देवी पार्वती के समान ही बहुत रूपवान थी। इसलिए उनके नाम में सुंदरी आया। अशोक सुंदरी की पूजा खासतौर पर गुजरात प्रदेश में होती है। एक बार जब भगवान शिव ने अपने पुत्र भगवान गणेश का सिर काट दिया था, तब देवी अशोक सुन्दरी डर कर नमक के बोरे में छिप गई थीं। इस वजह से उनको नमक के महत्‍व के साथ भी जोड़ा जाता है।

दूसरी बेटी मां ज्‍वालामुखी
भगवान शिव की दूसरी पुत्री का नाम माँ ज्‍वालामुखी (ज्योति) है। देवी ज्‍योति का जन्‍म भगवान शिव के तेज से हुआ था और वह उनके प्रभामंडल का स्‍वरूप हैं। एक अन्य मान्‍यता के अनुसार देवी ज्‍योति का जन्‍म देवी पार्वती के माथे से निकले तेज से हुआ था। देवी ज्योति को ज्‍वालामुखी देवी के नाम से भी जानते है और तमिलनाडु मंदिरों में उनकी पूजा होती है।

तीसरी बेटी देवी वासुकी (मनसा)
देवी वासुकी (मनसा) का जन्‍म भी कार्तिकेय की तरह देवी पार्वती के गर्भ से नहीं हुआ था। देवी वासुकी (मनसा) का जन्‍म भगवान शिव का वीर्य कद्रु, जिनको सांपों की मां कहा जाता है, के बनाए एक पुतले को छू गया था। इसलिए उनको शिव की पुत्री कहा जाता है लेकिन पार्वती की नहीं। मां पार्वती पति द्वारा उपेक्ष‍ित होने की वजह से देवी वासुकी (मनसा) का स्‍वभाव काफी गुस्‍से वाला माना जाता है। आमतौर पर उनकी पूजा बिना किसी प्रतिमा या तस्‍वीर के होती है। इसकी जगह पर पेड़ की कोई डाल, मिट्टी का घड़ा या फिर मिट्टी का सांप बनाकर पूजा जाता है। बंगाल के कई मंदिरों इनका पूजन किया जाता है।

भगवान शिव के छह पुत्र

कार्तिकेय
कार्तिकेय को भगवान शिव के पहले पुत्र के रूप पूजा जाता है। कार्तिकेय को सुब्रमण्यम, मुरुगन और स्कंद भी कहा जाता है। पुराणों के अनुसार षष्ठी तिथि को कार्तिकेय भगवान का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन उनकी पूजा का विशेष महत्व है।

गणेश
भगवान गणेश जी को भगवान शिव के दुसरे पुत्र के रूप में पूजा जाता है। भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देव भी कहा जाता है। पुराणों के अनुसार गणेशजी की उत्पत्ति भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मध्याह्न के समय हुई थी। गणेश की उत्पत्ति पार्वती जी ने चंदन के उबटन मिश्रण से की थी।

सुकेश
शिव का एक तीसरा पुत्र था जिसका नाम था सुकेश। दो राक्षस भाई थे- ‘हेति’ और ‘प्रहेति’। प्रहेति धर्मात्मा हो गया और हेति ने राजपाट संभालकर अपने साम्राज्य विस्तार हेतु ‘काल’ की पुत्री ‘भया’ से विवाह किया। भया से उसके विद्युत्केश नामक एक पुत्र का जन्म हुआ। विद्युत्केश का विवाह संध्या की पुत्री ‘सालकटंकटा’ से हुआ। माना जाता है कि ‘सालकटंकटा’ व्यभिचारिणी थी। इस कारण जब उसका पुत्र जन्मा तो उसे लावारिस छोड़ दिया गया। विद्युत्केश ने भी उस पुत्र की यह जानकर कोई परवाह नहीं की कि यह न मालूम किसका पुत्र है। पुराणों के अनुसार भगवान शिव और मां पार्वती की उस अनाथ बालक पर नजर पड़ी और उन्होंने उसको सुरक्षा प्रदान ‍की। इसका नाम उन्होंने सुकेश रखा। इस सुकेश से ही राक्षसों का कुल चला।

जलंधर
शिवजी का एक चौथा पुत्र था जिसका नाम था जलंधर। श्रीमद्मदेवी भागवत पुराण के अनुसार एक बार भगवान शिव ने अपना तेज समुद्र में फेंक दिया इससे जलंधर उत्पन्न हुआ। माना जाता है कि जलंधर में अपार शक्ति थी और उसकी शक्ति का कारण थी उसकी पत्नी वृंदा। वृंदा के पतिव्रत धर्म के कारण सभी देवी-देवता मिलकर भी जलंधर को पराजित नहीं कर पा रहे थे। जलंधर ने विष्णु को परास्त कर देवी लक्ष्मी को विष्णु से छीन लेने की योजना बनाई थी। तब विष्णु ने वृंदा का पतिव्रत धर्म खंडित कर दिया। वृंदा का पतिव्रत धर्म टूट गया और शिव ने जलंधर का वध कर दिया।

अयप्पा
भगवान अयप्पा के पिता शिव और माता मोहिनी हैं। विष्णु का मोहिनी रूप देखकर भगवान शिव का वीर्यपात हो गया था। उनके वीर्य को पारद कहा गया और उनके वीर्य से ही बाद में सस्तव नामक पुत्र का जन्म का हुआ जिन्हें दक्षिण भारत में अयप्पा कहा गया। शिव और विष्णु से उत्पन होने के कारण उनको ‘हरिहरपुत्र’ कहा जाता है। केरल में शबरीमलई में अयप्पा स्वामी का प्रसिद्ध मंदिर है, जहां विश्‍वभर से लोग शिव के इस पुत्र के मंदिर में दर्शन करने के लिए आते हैं। इस मंदिर के पास मकर संक्रांति की रात घने अंधेरे में रह-रहकर यहां एक ज्योति दिखती है। इस ज्योति के दर्शन के लिए दुनियाभर से करोड़ों श्रद्धालु हर साल आते हैं।

भूमा

एक समय जब कैलाश पर्वत पर भगवान शिव समाधि में ध्यान लगाये बैठे थे, उस समय उनके ललाट से तीन पसीने की बूंदें पृथ्वी पर गिरीं। इन बूंदों से पृथ्वी ने एक सुंदर और प्यारे बालक को जन्म दिया, जिसके चार भुजाएं थीं और वय रक्त वर्ण का था। इस पुत्र को पृथ्वी ने पालन पोषण करना शुरु किया। तभी भूमि का पुत्र होने के कारण यह भौम कहलाया। कुछ बड़ा होने पर मंगल काशी पहुंचा और भगवान शिव की कड़ी तपस्या की। तब भगवान शिव ने प्रसन्न होकर उसे मंगल लोक प्रदान किया।

लखनऊ। भगवान सदाशिव, आदि शंकर, भोले नाथ अपने भक्तों पर असीम कृपा के लिए जाने जाते हैं। भगवान शिव बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते है और अपने भक्तों को इच्छित वरदान प्रदान करते हैं। हलाहल विष को अपने गले में धारण करने वाले तीनों लोकों के स्वामी भगवान भोलनाथ ही एक ऐसे देवता है जो इस ब्रम्हांड की उत्पत्ति के पहले से इस सृष्टि में विद्यमान है। भगवान शिव की कुछ संताने का जन्म चमत्कारिक रूप से और किसी महत्वपूर्ण कार्य की पूर्ति के लिए भी हुआ। आज हम आपको भोले शंकर के परिवार के बारे में रोचक बातें बताएंगे। भगवान शिव की पत्नियाँ भगवान शंकर की पहली पत्नी देवी सती थी जो की राजा दक्ष की पुत्री थीं। उन्होंने भगवान शिव की कठोर तपस्या करके उनको प्रसन्न किया और अपने साथ विवाह करने का वर माँगा। किन्तु देवी सती ने अपने पिता द्वारा भगवान शिव का अपमान करने के कारण योगाग्नि में जलकर देह त्याग कर दिया। दूसरे जन्म में देवी सती ने हिमालय और उनकी पत्नी मैयना के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया और फिर शिवजी से विवाह किया। इस तरह देवी पार्वती भगवान शिव की दूसरी पत्नी हुई। भगवान शिव की तीसरी पत्नी काली, चौथी उमा और पांचवीं गंगा माता को कहा जाता है।

भगवान शिव की तीन पुत्रियां

भगवान शिव की तीन पुत्रियां भी हैं। भगवान शिव जी की सबसे बड़ी बेटी अशोक सुंदरी को देवी पार्वती ने अपना अकेलापन दूर करने के लिए जन्‍म दिया था। उनका नाम अशोक इसलिए पड़ा क्‍योंकि वह देवी पार्वती के अकेलेपन का शोक दूर करने आई थीं। माना जाता है कि शिव की यह पुत्री देवी पार्वती के समान ही बहुत रूपवान थी। इसलिए उनके नाम में सुंदरी आया। अशोक सुंदरी की पूजा खासतौर पर गुजरात प्रदेश में होती है। एक बार जब भगवान शिव ने अपने पुत्र भगवान गणेश का सिर काट दिया था, तब देवी अशोक सुन्दरी डर कर नमक के बोरे में छिप गई थीं। इस वजह से उनको नमक के महत्‍व के साथ भी जोड़ा जाता है। दूसरी बेटी मां ज्‍वालामुखी भगवान शिव की दूसरी पुत्री का नाम माँ ज्‍वालामुखी (ज्योति) है। देवी ज्‍योति का जन्‍म भगवान शिव के तेज से हुआ था और वह उनके प्रभामंडल का स्‍वरूप हैं। एक अन्य मान्‍यता के अनुसार देवी ज्‍योति का जन्‍म देवी पार्वती के माथे से निकले तेज से हुआ था। देवी ज्योति को ज्‍वालामुखी देवी के नाम से भी जानते है और तमिलनाडु मंदिरों में उनकी पूजा होती है। तीसरी बेटी देवी वासुकी (मनसा) देवी वासुकी (मनसा) का जन्‍म भी कार्तिकेय की तरह देवी पार्वती के गर्भ से नहीं हुआ था। देवी वासुकी (मनसा) का जन्‍म भगवान शिव का वीर्य कद्रु, जिनको सांपों की मां कहा जाता है, के बनाए एक पुतले को छू गया था। इसलिए उनको शिव की पुत्री कहा जाता है लेकिन पार्वती की नहीं। मां पार्वती पति द्वारा उपेक्ष‍ित होने की वजह से देवी वासुकी (मनसा) का स्‍वभाव काफी गुस्‍से वाला माना जाता है। आमतौर पर उनकी पूजा बिना किसी प्रतिमा या तस्‍वीर के होती है। इसकी जगह पर पेड़ की कोई डाल, मिट्टी का घड़ा या फिर मिट्टी का सांप बनाकर पूजा जाता है। बंगाल के कई मंदिरों इनका पूजन किया जाता है।

भगवान शिव के छह पुत्र

कार्तिकेय कार्तिकेय को भगवान शिव के पहले पुत्र के रूप पूजा जाता है। कार्तिकेय को सुब्रमण्यम, मुरुगन और स्कंद भी कहा जाता है। पुराणों के अनुसार षष्ठी तिथि को कार्तिकेय भगवान का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन उनकी पूजा का विशेष महत्व है। गणेश भगवान गणेश जी को भगवान शिव के दुसरे पुत्र के रूप में पूजा जाता है। भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देव भी कहा जाता है। पुराणों के अनुसार गणेशजी की उत्पत्ति भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मध्याह्न के समय हुई थी। गणेश की उत्पत्ति पार्वती जी ने चंदन के उबटन मिश्रण से की थी। सुकेश शिव का एक तीसरा पुत्र था जिसका नाम था सुकेश। दो राक्षस भाई थे- ‘हेति’ और ‘प्रहेति’। प्रहेति धर्मात्मा हो गया और हेति ने राजपाट संभालकर अपने साम्राज्य विस्तार हेतु ‘काल’ की पुत्री ‘भया’ से विवाह किया। भया से उसके विद्युत्केश नामक एक पुत्र का जन्म हुआ। विद्युत्केश का विवाह संध्या की पुत्री ‘सालकटंकटा’ से हुआ। माना जाता है कि ‘सालकटंकटा’ व्यभिचारिणी थी। इस कारण जब उसका पुत्र जन्मा तो उसे लावारिस छोड़ दिया गया। विद्युत्केश ने भी उस पुत्र की यह जानकर कोई परवाह नहीं की कि यह न मालूम किसका पुत्र है। पुराणों के अनुसार भगवान शिव और मां पार्वती की उस अनाथ बालक पर नजर पड़ी और उन्होंने उसको सुरक्षा प्रदान ‍की। इसका नाम उन्होंने सुकेश रखा। इस सुकेश से ही राक्षसों का कुल चला। जलंधर शिवजी का एक चौथा पुत्र था जिसका नाम था जलंधर। श्रीमद्मदेवी भागवत पुराण के अनुसार एक बार भगवान शिव ने अपना तेज समुद्र में फेंक दिया इससे जलंधर उत्पन्न हुआ। माना जाता है कि जलंधर में अपार शक्ति थी और उसकी शक्ति का कारण थी उसकी पत्नी वृंदा। वृंदा के पतिव्रत धर्म के कारण सभी देवी-देवता मिलकर भी जलंधर को पराजित नहीं कर पा रहे थे। जलंधर ने विष्णु को परास्त कर देवी लक्ष्मी को विष्णु से छीन लेने की योजना बनाई थी। तब विष्णु ने वृंदा का पतिव्रत धर्म खंडित कर दिया। वृंदा का पतिव्रत धर्म टूट गया और शिव ने जलंधर का वध कर दिया। अयप्पा भगवान अयप्पा के पिता शिव और माता मोहिनी हैं। विष्णु का मोहिनी रूप देखकर भगवान शिव का वीर्यपात हो गया था। उनके वीर्य को पारद कहा गया और उनके वीर्य से ही बाद में सस्तव नामक पुत्र का जन्म का हुआ जिन्हें दक्षिण भारत में अयप्पा कहा गया। शिव और विष्णु से उत्पन होने के कारण उनको ‘हरिहरपुत्र’ कहा जाता है। केरल में शबरीमलई में अयप्पा स्वामी का प्रसिद्ध मंदिर है, जहां विश्‍वभर से लोग शिव के इस पुत्र के मंदिर में दर्शन करने के लिए आते हैं। इस मंदिर के पास मकर संक्रांति की रात घने अंधेरे में रह-रहकर यहां एक ज्योति दिखती है। इस ज्योति के दर्शन के लिए दुनियाभर से करोड़ों श्रद्धालु हर साल आते हैं। भूमा एक समय जब कैलाश पर्वत पर भगवान शिव समाधि में ध्यान लगाये बैठे थे, उस समय उनके ललाट से तीन पसीने की बूंदें पृथ्वी पर गिरीं। इन बूंदों से पृथ्वी ने एक सुंदर और प्यारे बालक को जन्म दिया, जिसके चार भुजाएं थीं और वय रक्त वर्ण का था। इस पुत्र को पृथ्वी ने पालन पोषण करना शुरु किया। तभी भूमि का पुत्र होने के कारण यह भौम कहलाया। कुछ बड़ा होने पर मंगल काशी पहुंचा और भगवान शिव की कड़ी तपस्या की। तब भगवान शिव ने प्रसन्न होकर उसे मंगल लोक प्रदान किया।