रियल लाइफ बजरंगी भाईजान बना मनोवैज्ञानिक, बिछड़ी तरजीना को 22 साल बाद परिवार से मिलाया

lost woman tarjeena
रियल लाइफ बजरंगी भाईजान बना मनोवैज्ञानिक, बिछड़ी तरजीना को 22 साल बाद परिवार से मिलाया

लखनऊ। फिल्म बजरंगी भाईजान जैसे सलमान खान ने परिवार से बिछड़ी मुन्नी को उसके परिवार से मिलाया, वैसे ही बरेली के मनोचिकित्सक शौलेश वर्मा ने 22 साल पहले परिवार से बिछड़ी तरजीनाको को उसके परिजनों से मिला दिया। पूरे परिवार से मिलकर तरजीना के खुशी के आंसू काफी देर तक थमे ही नहीं। उधर, परिवारीजनों का भी कुछ ऐसा ही हाल था। परिजन तरजीना को मृत मान चुके थे। वो बीते 22 वर्ष से लखनऊ के ममता विद्यालय में लावारिस हालत में रह रही थी।

Lost Woman Meets With Her Family After 22 Years :

बताया जा रहा है कि मूलरूप से पश्चिम बंगाल के इटाहार के कोअरपुर गांव निवासी तरजीना 9 फरवरी 1997 में हजरतगंज स्थित महिला सहायता प्रकोष्ठ एंड मिसिंग पर्सन स्कवायड को लावारिस मिली थी। तब अपर सिटी मजिस्ट्रेट प्रथम के आदेश पर उसे लखनऊ के सिटी स्टेशन के पास बने अविकसित बालक-बालिका विद्यालय में भर्ती करा दिया गया। वो बंगाली भाषा बोल रही थी। उसने बताए गए पते पर कई बार पत्र भी भेजे गए, लेकिन कोई पुष्टि हो गई। बंगाली भाषा बोलने वाली तरजीना की ओर से कई बार उसके बताए पर पत्र भेजे गए, लेकिन कोई पुष्टि नहीं हो सकी।

कुछ दिन पहले राजकीय ममता विद्यालय की पूर्व अधीक्षिका डॉ. सुधा को दिव्यांगजन सशक्तिरण विभाग से बरेली के मनोवैज्ञानिक और समाजसेवी शैलेश शर्मा के बारे में पता चला। शैलेस लावारिश व मानसिक रोगियों के लिए काम रह रहे थे। जिसके बाद शैलेस अक्तूबर में यहां आए। उन्होने काफी लंबे समय तक तरजीना की काउंसलिंग करते रहे। फिर किसी तहर उसका पता हासिल कर 14 जुलाई को पश्चिम बंगाल निकल गए।

बता दें कि बीती 16 जुलाई को वो पश्चिम बंगाल पहुंच गए और किसी तरह तरजीना के परिजनों तक पहुंचे। उन्होने जैसे ही परिजनों को तरजीना की फोटो दिखाई तो पूरा परिवार फफक पड़ा। परिजनों ने बताया कि तरजीना की शादी पड़ोस के गांव से हुई थी,ले​किन शादी के तीन महीने बाद ही उसके पति की मौत हो गई। तरजीना जब घर पर ही थी, तभी उसके पिता की मौत हो चुकी थी, जबकि मां की मौत अभी एक वर्ष पहले हुई है।

फिलहाल शैलेश उसके परिजनों को लेकर लखनऊ पहुंचे और जिला दिव्यांग जन सशक्तिरण अधिकारी अमित राय और डिप्टी डायरेक्टर अनुपमा मौर्य से मिलवाया। बताया जा रहा है कि तरजीना को लेने उसकी बहन मनोवारा और बहनोई जरजिस अली तथा रब्बानी आए। जिसके बाद अपर सिटी मजिस्ट्रेट (प्रथम) के आदेश पर तरजीना को परिवारीजनों के सुपुर्द किया गया।

लखनऊ। फिल्म बजरंगी भाईजान जैसे सलमान खान ने परिवार से बिछड़ी मुन्नी को उसके परिवार से मिलाया, वैसे ही बरेली के मनोचिकित्सक शौलेश वर्मा ने 22 साल पहले परिवार से बिछड़ी तरजीनाको को उसके परिजनों से मिला दिया। पूरे परिवार से मिलकर तरजीना के खुशी के आंसू काफी देर तक थमे ही नहीं। उधर, परिवारीजनों का भी कुछ ऐसा ही हाल था। परिजन तरजीना को मृत मान चुके थे। वो बीते 22 वर्ष से लखनऊ के ममता विद्यालय में लावारिस हालत में रह रही थी।बताया जा रहा है कि मूलरूप से पश्चिम बंगाल के इटाहार के कोअरपुर गांव निवासी तरजीना 9 फरवरी 1997 में हजरतगंज स्थित महिला सहायता प्रकोष्ठ एंड मिसिंग पर्सन स्कवायड को लावारिस मिली थी। तब अपर सिटी मजिस्ट्रेट प्रथम के आदेश पर उसे लखनऊ के सिटी स्टेशन के पास बने अविकसित बालक-बालिका विद्यालय में भर्ती करा दिया गया। वो बंगाली भाषा बोल रही थी। उसने बताए गए पते पर कई बार पत्र भी भेजे गए, लेकिन कोई पुष्टि हो गई। बंगाली भाषा बोलने वाली तरजीना की ओर से कई बार उसके बताए पर पत्र भेजे गए, लेकिन कोई पुष्टि नहीं हो सकी।कुछ दिन पहले राजकीय ममता विद्यालय की पूर्व अधीक्षिका डॉ. सुधा को दिव्यांगजन सशक्तिरण विभाग से बरेली के मनोवैज्ञानिक और समाजसेवी शैलेश शर्मा के बारे में पता चला। शैलेस लावारिश व मानसिक रोगियों के लिए काम रह रहे थे। जिसके बाद शैलेस अक्तूबर में यहां आए। उन्होने काफी लंबे समय तक तरजीना की काउंसलिंग करते रहे। फिर किसी तहर उसका पता हासिल कर 14 जुलाई को पश्चिम बंगाल निकल गए।बता दें कि बीती 16 जुलाई को वो पश्चिम बंगाल पहुंच गए और किसी तरह तरजीना के परिजनों तक पहुंचे। उन्होने जैसे ही परिजनों को तरजीना की फोटो दिखाई तो पूरा परिवार फफक पड़ा। परिजनों ने बताया कि तरजीना की शादी पड़ोस के गांव से हुई थी,ले​किन शादी के तीन महीने बाद ही उसके पति की मौत हो गई। तरजीना जब घर पर ही थी, तभी उसके पिता की मौत हो चुकी थी, जबकि मां की मौत अभी एक वर्ष पहले हुई है।फिलहाल शैलेश उसके परिजनों को लेकर लखनऊ पहुंचे और जिला दिव्यांग जन सशक्तिरण अधिकारी अमित राय और डिप्टी डायरेक्टर अनुपमा मौर्य से मिलवाया। बताया जा रहा है कि तरजीना को लेने उसकी बहन मनोवारा और बहनोई जरजिस अली तथा रब्बानी आए। जिसके बाद अपर सिटी मजिस्ट्रेट (प्रथम) के आदेश पर तरजीना को परिवारीजनों के सुपुर्द किया गया।