कमिश्नरी लागू होते ही लखनऊ व नोएडा पुलिस दे सकती है बंदूक लाइसेंस…

dgp op singh
कमिश्नरी लागू होते ही लखनऊ व नोएडा पुलिस दे सकती है बंदूक लाइसेंस...

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने हाल ही में प्रदेश के कई जिलों में कप्तानो का तबादला किया है वहीं नोएडा और लखनऊ में अब कमिश्नरी सिस्टम लागू किया जा रहा है जिसके चलते इन दोनो जिलों में पुलिस अधिक्षकों की नियुक्ति नही की गयी। वहीं अब डीजीपी ओपी सिंह ने एक महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया कि कमिश्नरी लागू होते ही इन दोनो जिलों की पुलिस के पास बंदूक लाइसेंस देने का भी अधिकार प्राप्त हो जायेगा।

Lucknow And Noida Police Can Give Gun License As Soon As Commissioner Is Implemented :

यूपी पुलिस के डायल 112 के तीसरे स्थापना दिवस पर हुई प्रेस वार्ता के दौरान उत्तर प्रदेश के डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि लखनऊ और नोएडा में पुलिस कमिश्नर सिस्टम बनाने को लेकर शासन में मंथन चल रहा है, जल्द ही इसपर अंतिम फैसला लिया जायेगा। उन्होने बताया कि कमिश्नरी सिस्टम लागू होते ही इन दोनो जिलों के पास हथियारों के लाइसेंस देने के साथ साथ कई महत्पूर्ण अधिकार प्राप्त हो जायेंगे जो अभी तक सिर्फ डीएम के पास होते थे।

आपको बता दें कि हाल ही में नोएडा के पूर्व एसएसपी वैभव कृष्णा को लेकर एक विवाद खड़ा हो गया था। दरअसल वैभव कृष्णा ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक रिपोर्ट बनायी थी जिसमें 5 आईपीएस समेत कुछ शासन के अधिकारियों व दलालों के नाम थे। वो रिपोर्ट सोशल मीडिया पर लीक हुई तो सरकार की किरकिरी होने लगी, वहीं इसके बाद वैभव कृष्ण का एक लड़की से अश्लील बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। मामला सीएम के संज्ञान में आया तो जांच करवाई गयी। वैभव कृष्ण का वीडियो सही था इसलिए उन्हे सस्पेंड कर दिया गया वहीं उनकी रिपोर्ट में आरोपित आईपीएस को हटा दिया गया और एक एसआईटी टीम द्वारा जांच का आदेश दे दिया गया।

बताया जाता है कि पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू होने के बाद पुलिस के पास मजिस्ट्रेट के अधिकार आ जाते हैं। कानून व्यवस्था पर सिर्फ एक ही अधिकारी की जबाबदेही होती है जो कि कमिश्नर होता है। कमिश्नर को किसी दंगे में फायरिंग के लिए मजिस्ट्रेट से इजाज़त लेने की जरूरत नही होती। पुलिस को किसी अपराधी पर जिला बदर, गैंगस्टर जैसी कार्रवाई करने के लिए मजिस्ट्रेट के आदेश की जरूरत नही होती। पार्किंग- बार, असलहे के लाइसेंस से जुड़े मामलों में भी इजाज़त देने और निपटाने के अधिकार होते हें। धारा 144 और शांति भंग 151 जैसी धाराओं को लगाने का अधिकार भी अब कमिश्नर के पास होगा।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने हाल ही में प्रदेश के कई जिलों में कप्तानो का तबादला किया है वहीं नोएडा और लखनऊ में अब कमिश्नरी सिस्टम लागू किया जा रहा है जिसके चलते इन दोनो जिलों में पुलिस अधिक्षकों की नियुक्ति नही की गयी। वहीं अब डीजीपी ओपी सिंह ने एक महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया कि कमिश्नरी लागू होते ही इन दोनो जिलों की पुलिस के पास बंदूक लाइसेंस देने का भी अधिकार प्राप्त हो जायेगा। यूपी पुलिस के डायल 112 के तीसरे स्थापना दिवस पर हुई प्रेस वार्ता के दौरान उत्तर प्रदेश के डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि लखनऊ और नोएडा में पुलिस कमिश्नर सिस्टम बनाने को लेकर शासन में मंथन चल रहा है, जल्द ही इसपर अंतिम फैसला लिया जायेगा। उन्होने बताया कि कमिश्नरी सिस्टम लागू होते ही इन दोनो जिलों के पास हथियारों के लाइसेंस देने के साथ साथ कई महत्पूर्ण अधिकार प्राप्त हो जायेंगे जो अभी तक सिर्फ डीएम के पास होते थे। आपको बता दें कि हाल ही में नोएडा के पूर्व एसएसपी वैभव कृष्णा को लेकर एक विवाद खड़ा हो गया था। दरअसल वैभव कृष्णा ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक रिपोर्ट बनायी थी जिसमें 5 आईपीएस समेत कुछ शासन के अधिकारियों व दलालों के नाम थे। वो रिपोर्ट सोशल मीडिया पर लीक हुई तो सरकार की किरकिरी होने लगी, वहीं इसके बाद वैभव कृष्ण का एक लड़की से अश्लील बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। मामला सीएम के संज्ञान में आया तो जांच करवाई गयी। वैभव कृष्ण का वीडियो सही था इसलिए उन्हे सस्पेंड कर दिया गया वहीं उनकी रिपोर्ट में आरोपित आईपीएस को हटा दिया गया और एक एसआईटी टीम द्वारा जांच का आदेश दे दिया गया। बताया जाता है कि पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू होने के बाद पुलिस के पास मजिस्ट्रेट के अधिकार आ जाते हैं। कानून व्यवस्था पर सिर्फ एक ही अधिकारी की जबाबदेही होती है जो कि कमिश्नर होता है। कमिश्नर को किसी दंगे में फायरिंग के लिए मजिस्ट्रेट से इजाज़त लेने की जरूरत नही होती। पुलिस को किसी अपराधी पर जिला बदर, गैंगस्टर जैसी कार्रवाई करने के लिए मजिस्ट्रेट के आदेश की जरूरत नही होती। पार्किंग- बार, असलहे के लाइसेंस से जुड़े मामलों में भी इजाज़त देने और निपटाने के अधिकार होते हें। धारा 144 और शांति भंग 151 जैसी धाराओं को लगाने का अधिकार भी अब कमिश्नर के पास होगा।