ये सरकारी स्कूल है या तबेला…बाउंड्रीवाल न होने की वजह से घूमते हैं मवेशी

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ये सरकारी स्कूल है या तबेला...बाउंड्रीवाल न होने की वजह से घूमते हैं मवेशी

Lucknow Ka Sarkari School Bana Tabela

लखनऊ। विकास खंड गोसाईगंज के प्राथमिक विद्यालय का हाल देखकर ऐसा लगता है कि वो शिक्षा का मंदिर नहीं बल्कि मवेशियों का तबेला है। सुबह स्कूल खुलते ही स्कूल का एक शिक्षक विद्यालय प्रांगड़ से मवेशियों को खदेड़ने का काम करता है। मवेशी बार बार वापस आ जाते है। जिनसे शिक्षको के साथ बच्चे भी डरते है कि कही मार न दें। मवेशी विद्यालय के कमरे के नजदीक तक चले जाते है। विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे डर के साये में पढ़ते है। इसी विद्यालय प्रांगण में आंगनबाड़ी केंद्र भी चलता है उन बच्चों को भी जानवरों के कारण बाहर नही निकालने दिया जाता है।

इस समस्या पर विद्यालय की शिक्षिकाएं बताती है कि आसपास के गांवों के लोग सुबह दूध निकालने के बाद अपने मवेशी खोल कर बाहर भगा देते है। जिसके बाद वह मवेशी स्कूल परिसर और आस पास विचरण करते रहते है और स्कूली बच्चों के साथ राहगीरो के लिए मुसीबत बनते है। विद्यालय के चारो ओर बाउंड्रीवाल ना होने के कारण स्कूल के अंदर तक मवेशी पहुंच जाते हैं। ग्रामीणो से कई बार शिकायत की लेकिन ग्रामीणों ने शिक्षिकाओं की बात को अनसुना कर दिया। विद्यालय की तस्वीर को देखकर साफतौर पर लगता है कि विद्यालय कम मवेशियों का तबेला ज्यादा दिखता है।

पंचायत व शिक्षा विभाग के पास नहीं है बजट

विद्यालय के चारों ओर बाउंड्रीवाल बनवाने के लिए ना तो शिक्षा विभाग के पास बजट है और न ही पंचायत के पास। दोनों ही विभाग चाहे तो कुछ दिनों में ही बाउंड्रीवाल बनकर तैयार हो जाये और बच्चे दहशत से निकलकर पढ़ाई में मन लगा सके। जानकारों व ब्लाक के जिम्मेदार अधिकारियों की माने तो पंचायत विद्यालय के विकास के लिए चौदहवें वित्त आयोग के बजट से पांच लाख रुपए व उससे अधिक काम पंचायत में प्रस्ताव के माध्यम से स्कूलों में पंचायत करा सकती है लेकिन इस ओर पंचायत के जिम्मेदार लोग ध्यान नही दे रहे है।

विद्यालय की फर्श भी टूटी

गोसाईगंज के मिर्जापुर प्राथमिक विद्यालय की फर्श भी टूट गई है जगह जगह गड्ढे हो चुके है। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका आभा सोनकर बताती है कि विद्यालय की रंगाई पुताई के लिए आठ हजार रुपया आया था जिससे विद्यालय की पुताई करवा दी गई। फर्श के लिए कई बार विभाग के अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है।

न चेते तो होगा बड़ा हादसा

मिर्जापुर विद्यालय की स्थित को देखकर शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी यदि न चेते तो किसी दिन बच्चों के साथ बड़ा हादसा हो सकता है। किसी दिन कोई जानवर भड़का तो बच्चे या किसी के साथ बड़ा हादसा हो सकता है।

लखनऊ। विकास खंड गोसाईगंज के प्राथमिक विद्यालय का हाल देखकर ऐसा लगता है कि वो शिक्षा का मंदिर नहीं बल्कि मवेशियों का तबेला है। सुबह स्कूल खुलते ही स्कूल का एक शिक्षक विद्यालय प्रांगड़ से मवेशियों को खदेड़ने का काम करता है। मवेशी बार बार वापस आ जाते है। जिनसे शिक्षको के साथ बच्चे भी डरते है कि कही मार न दें। मवेशी विद्यालय के कमरे के नजदीक तक चले जाते है। विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे डर के साये…