दोषी इंजीनियरों पर कार्रवाई के बजाय मेहरबान है नगर निगम, भड़के पार्षद

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दोषी इंजीनियरों पर कार्रवाई के बजाय मेहरबान है नगर निगम, भड़के पार्षद

लखनऊ। सूबे की राजधानी लखनऊ में निर्माणाधीन नाले के निर्माण में लापरवाही को लेकर चीफ इंजीनियर और तत्कालीन नगर अभियंता को दोषी माना गया, बावजूद इसके आरोपी अधिकारी आने पदों पर तैनात हैं। इसे लेकर नगर निगम मुख्यालय के सदन में पार्षदों ने जमकर हंगामा किया और दोषी अधिकारियों की रिपोर्ट भी पेश की गयी। पार्षदों ने नगर आयुक्त से दोषी इंजीनियरों को पद से हटाने की मांग की है।

दरअसल, पॉलिटेक्निक चौराहे से कलेवा की तरफ निर्माणाधीन नाला ढहने के मामले की जांच में चीफ इंजिनियर एसपी सिंह, तत्कालीन नगर अभियंता देशराज सिंह, एई डीएस त्रिपाठी और जेई आलोक कुमार को दोषी माना गया। इसे लेकर नगर निगम सदन में रिपोर्ट भी पेश की गयी। वहीं इस मामले पर जब नगर आयुक्त इंद्रमणि त्रिपाठी से बात की गयी तो उन्होने कहा कि नाले का काम कर रही एजेंसी ब्लैक लिस्टेड कर दी गई है और रिपोर्ट शासन को भेजी गई है, दोषी इंजिनियरों के बारे में वहीं से फैसला होगा।

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निगम बना घोटालों का गढ़-

जिस नगर निगम पर लखनऊ को संवारने की जिम्मेदारी है, वो घोटालों का हब बनता जा रहा है। यहां आए दिन एक नए घोटाले का राजफाश हो रहा है। अब 100 स्मार्ट सिटी के प्रतिनिधियों की कार्यशाला और प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर हो रही तैयारियों के दौरान एक नया घोटाला सामने आया। शहर को जगमग करने के लिए तीन हजार खम्भो पर लगने वाली एलईडी स्ट्रिप का काम टेंडर होने से पहले शुरु होने पर उठे सवालों के बाद टेंडर खुला। जिसमें एक कंपनी ने पंद्रह लाख रूपए में एलईडी स्ट्रिप सप्लाई करने के लिए एग्रीमेंट कर लिया।

इसके बाद विरोधी दल के पार्षद नेता यावर हुसैन रेशू ने आरोप लगाया कि बीते फरवरी माह में लखनऊ में इन्वेस्टर्स समिट में जिस एलईडी का 35 लाख रूपए नगर निगम ने किराया दिया था, वही एलईडी पंद्रह लाख रूपए में खरीदी जा रही है। ऐसे में सवाल ये उठाया कि एलईडी स्ट्रिप की कीमत से दो गुने से ज्यादा किराया कैसे दिया गया। उन्होने नगर निगम के अधिकारियों पर गबन का आरोप लगाया है।

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इसके साथ ही उन्होने आरोप लगाया कि जिस कंपनी को टेंडर दिया गया है, उसके इसके पहले ही एक करोड़ रूपए बकाए का भुगतान किया गया है। कार्यकारिणी सदस्य गिरीश मिश्रा ने कहा कि कंपनी के साथ पहले ही करार कर लिया गया था, जिसको लेकर उन्होने जांच की मांग की है।

लखनऊ। सूबे की राजधानी लखनऊ में निर्माणाधीन नाले के निर्माण में लापरवाही को लेकर चीफ इंजीनियर और तत्कालीन नगर अभियंता को दोषी माना गया, बावजूद इसके आरोपी अधिकारी आने पदों पर तैनात हैं। इसे लेकर नगर निगम मुख्यालय के सदन में पार्षदों ने जमकर हंगामा किया और दोषी अधिकारियों की रिपोर्ट भी पेश की गयी। पार्षदों ने नगर आयुक्त से दोषी इंजीनियरों को पद से हटाने की मांग की है। दरअसल, पॉलिटेक्निक चौराहे से कलेवा की तरफ निर्माणाधीन नाला ढहने…
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