सीएम साहब! इस महिला के साथ कोई घटना घटी तो कौन होगा जिम्मेदार?

लखनऊ: सूबे में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर प्रदेश और केंद्र सरकार तमाम योजनाएं चला रही हैं। लेकिन इसका कितना लाभ गर्भवती महिलाओं को मिलता है इसकी एक बानगी मंगलवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में देखने को मिली जहां एक गर्भवती महिला के पेट में पल रहा उसका भ्रूण सड़ गया था। महिला के पेट में तेज दर्द हुआ तो परिजन उसे इंदिरानगर स्थित बीएमसी अस्पताल ले गए जहां उसे डॉक्टरों ने उसे टारा बताकर लोहिया अस्पताल भेज दिया। लोहिया अस्पताल वालो ने अगले दिन ओपीडी में आने को कहकर चलता कर दिया। उसके बाद महिला को डफरिन अस्पताल ले जाया गया वहां भी भर्ती नहीं किया गया। यदि इस दौरान महिला के साथ कोई घटना घट जाती तो उसका जिम्मेदार कौन होगा?



गर्भवती महिला सहरबानो मोहनलालगंज की रहने वाली है। दो अक्टूबर के दिन सहरबानो के पेट में तेज दर्द होने के साथ उसे उल्टियाँ हुईं। जिसके बाद उसके घर वालें घबरा गए और उसी वक़्त उसे नजदीकी हॉस्पिटल लेकर गए। जहां पर उसका अल्ट्रासाउंड कराया गया। रिपोर्ट देखकर डॉक्टर ने बताया कि उसका बच्चा सड़ गया है। सहरबानो के पेट का दर्द कम न होने पर उसके परिवारिजन तीन अक्टूबर को उसे इंदिरानगर बीएमसी अस्पताल ले गए जहां उसे डॉक्टर ने दवा देकर वापस घर भेज दिया।

महिला की तबियत बिगड़ती देख उसके परिवार वाले उसे रात 10 बजे लोहिया अस्पताल के इमरजेंसी में लेकर पहुंचे। वहाँ उसे यह कहकर भगा दिया गया कि सुबह ओपीड़े में लेकर आएं। पीड़ित महिला की परेशानी को बढ़ता देख उसके घर वाले उसे मंगलवार की सुबह फिर इंदिरानगर बीएमसी लेकर पहुंचे तो डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड न हो पाने का बहाना बताकर गर्भवती को वापस कर दिया। आखिर थक-हारकर जब घर वाले उसे डफरिन अस्पताल लेकर पहुंचे तो वहां डॉक्टर ने उसे जांच करवाने को कह कर भर्ती होने को कहा। जब वे जांच करवाने इमरजेंसी गए तो वहां स्टाफ ने जांच करने से मना करते हुए कहा कि जांच कल होगी और भर्ती भी हम तभी लेंगे। अभी बेड खाली नहीं है। इस पर डफरिन अस्पताल की चिकित्सा अधिक्षिका डॉक्टर खुर्शीद जेहरा जैदी का कहना है कि अस्पताल में पूरे दिन में 200 से अधिक मरीज आते हैं जिसके चलते सभी की जांच कर पाना मुमकिन नहीं है।



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