यूपी पुलिस की घिसी-पिटी एवं लचर कार्रवाई पर कोर्ट ने जताई चिंता

लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने आपराधिक मामलों में प्रदेश पुलिस की घिसी-पिटी एवं लचर कार्रवाई तथा लेट-लतीफ विवेचना पर गहरी चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि पुलिस महत्वपूर्ण आपराधिक मामलों में जिस तरह से लापरवाही व गैरजिम्मेदराना तरीके से विवेचना करती है इससे यह प्रतीत होता है कि पुलिस का आचरण न्याय व्यवस्था में सहयोग देने का नहीं रहता है। अदालत ने कहा कि गोंडा जिले के इस मामले में पुलिस की कार्यशैली इशारा करती है कि अपराधियों को सजा दिलाने तथा केसों की विवेचना में यूपी पुलिस कितनी ढिलाई कर रही है।



अदालत ने आदेश की प्रति प्रमुख सचिव गृह व पुलिस महानिदेशक को भेजते हुए उनसे कहा है कि वह पुलिस की विवेचना मामलों में सतर्कता बरतें और विवेचना के मामलों में विवेचक पर निगाह रखें।यह आदेश न्यायमूर्ति अजय लाम्बा व न्यायमूर्ति विजयलक्ष्मी की पीठ ने याची श्रीमती अंतिमा देवी की ओर से अधिवक्ता राज बख्श सिंह द्वारा दायर याचिका पर दिए है। पुन: विवेचना के बाद मामले की केस डायरी मार्च-2014 में गायब हो गयी।




कहा गया याचिका पर आदेश के बाद एसपी गोंडा ने शपथ पत्र प्रस्तुत किया और बताया कि इस मामले में विवेचक के खिलाफ कार्रवाई की गयी है और शीघ्र ही मामले की विवेचना पूरी कर ली जाएगी । अदालत ने कहा कि मार्च-2014 से केस डायरी गायब है और पुलिस के अधिकारी हाईकोर्ट में याचिका दायर होने के बाद व हाईकोर्ट के आदेश के बाद ऐसे गंभीर मामलों पर ध्यान देते हैं। एसपी गोंडा के आश्वासन के बाद अदालत ने याचिका निस्तारित कर दी है।