500-1000 की नोट ने ले ली युवक की जान

लखनऊ: बैंक में समय से रुपये न बदले जाने से निजी अस्पताल में इलाज के अभाव में गोलागोकरणनाथ खीरी से आये मरीज की राजधानी में मौत हो गयी। डाक्टर ने उन्हें तत्काल डायलिसिस की सलाह दी थी और वह हो नहीं पाया जब तक परिजन नये नोट की व्यवस्था करते तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। किंग जार्ज चिकित्सा विविद्यालय समेत अन्य सरकारी अस्पतालों में पुराने नोट को जमा तो किए जा रहे थे, लेकिन छोटे नोटों की कमी होने से मरीजों को परेशान हो रहे हैं।




गोलागोकरण नाथ खीरी के शौकत अली का काफी दिनों से किडनी का इलाज राजधानी में अलीगंज स्थित निजी डाक्टर के यहां चल रहा था। अचानक पांच व एक हजार रुपये के नोट बंद होने से उसे इलाज के लिए आने में दिक्कत होने लगी। एटीएम से रुपये न निकाल पाने से परेशान शौकत अली ने किसी प्रकार बैंक से चार हजार रुपये बदल कर नये नोट लिये और राजधानी के अलीगंज स्थित निजी क्लीनिक में पहुंचा। डाक्टर ने जांच पड़ताल के बाद तत्काल डायलिसिस कराने का परामर्श दिया। डायलिसिस के लिए शैाकत अली के पास नकदी नहीं थी। बताया जाता है कि उसके तीमारदारों ने डायलिसिस के बाद रुपये उपलब्ध कराने या पुराने नोट लेने का अनुरोध भी किया, लेकिन बात नहीं बनी। इस बीच तेजी से उसकी तबियत बिगड़ी और मौत हो गयी।



परिजनों का आरोप है कि समय पर बैंक से नोट न बदल पाने से दिक्कत हो रही थी। उधर किंग जार्ज चिकित्सा विविद्यालय में कैश काउंटर पर लगातार पुराने नोट लिए तो जा रहे हैं, लेकिन सौ, पचास के नोट न होने से शेष रुपये वापस करने में दिक्कत आ रही है। कुछ काउंटर पर टोकन पर शेष रुपये लिख कर दे दिया जाता है अगर मरीज भर्ती है तो बाद में ले लें या अन्य शुल्क में जोड़ लिया जाएगा। कमोबेश सिविल अस्पताल में भी आज आईसीयू से मरीज को भगा दिया गया। बाहर से पुराने नोट न मिलने का कारण बताया जाता है। बलरामपुर अस्पताल, लोहिया अस्पताल सहित अन्य अस्पतालों में भी पुराने नोट तो चल रहे है लेकिन छोटे नोट न होने के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।