लखनऊ पुलिस कुत्ते की मौत की जांच में जुटी, अलीगंज थाने में दर्ज हुई एफआईआर

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रहने वाले एक सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी ने अपने पालतू बाक्सर कुत्ते की मौत के मामले में पेट क्लीनिक संचालक और डाक्टर के खिलाफ अलीगंज थाने में एफआईआर दर्ज करायी है। उनका कहना कि उनके कुत्ते की पिटाई से मौत हुई है। फिलहाल पुलिस मामले की छानबीन में जुट गयी है।

Lucknow Police Investigationg Death Case Of A Pet Dog :

अलीगंज के प्रियदर्शनी कालोनी निवासी चंद्रपाल सिंह पत्नी और बेटे के साथ 21 मई को दिल्ली गये थे। परिवार के शहर बाहर होने की वजह से उन्होंने बाक्सर कुत्ते की देखभाल के लिये अलीगंज स्थित पेट क्लीनिक पर सम्पर्क किया था। प्रतिदिन पांच सौ रुपये के हिसाब से चंद्रपाल ने क्लीनिक संचालक को भुगतान भी किया था। 23 मई को उन्हें बाक्सर को बुखार होने की जानकारी मिली।

चंद्रपाल सिंह ने परिचित सुरेश को बाक्सर के बारे में जानकारी जुटाने के लिये कहा। उनके क्लीनिक पहुंचने पर वहां मौजूद मैनेजर ने बाक्सर को दिखाने से इनकार कर दिया। पूछताछ करने पर बताया कि डाक्टर इलाज कर रहे हैं और बाक्सर जल्द ठीक हो जायेगा। सुरेश ने यह बात पता चलने पर चंद्रपाल सिंह ने पेट क्लीनिक पर फोन किया। पशु चिकित्सक डाक्टर एसए खान से उनकी बात हुई।

डाक्टर ने चंद्रपाल को बताया कि बाक्सर की हालत में पहले से काफी ज्यादा सुधार है। उन्होंने डाक्टर से वीडियो काल के जरिये बाक्सर को दिखाने के लिये कहा। इस पर एसए खान ने चंद सेकेण्ड के लिये कुत्ते को एक तरफ से दिखा दिया। 24 मई को उन्होंने दोबारा से काल करने पर उन्हें बताया गया कि बाक्सर की मौत हो गई है। चंद्रपाल ने पेट क्लीनिक कर्मियों से बाक्सर की मौत का कारण पूछा तो वह लोग जवाब नहीं दे सके।

काफी कहने के बाद बाक्सर को दफन करते वक्त का वीडियो तैयार कर पेट क्लीनिक कर्मियों ने चंद्रपाल सिंह के मोबाइल पर भेजा। जिसमें बाक्सर की गर्दन और आंख के पास जख्म दिखाई पड़ रहे थे। दिल्ली से लौटने के बाद पेट क्लीनिक पहुंच कर मौत का कारण पूछने पर डाण् एसए खान भड़क गये।

इस बीच क्लीनिक संचालक रामजी भी वहां आ गये। दोनों लोगों ने चंद्रपाल सिंह को ज्यादा पूछताछ करने पर गम्भीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दे डाली। इतना ही नहीं क्लीनिक संचालक ने बाक्सर का कार्ड और लाइसेंस भी वापस नहीं किया। इंस्पेक्टर अलीगंज फरीद अहमद ने बताया कि रामजी और डा एसए खान पर क्रुरूरता करने का आरोप है। मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रहने वाले एक सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी ने अपने पालतू बाक्सर कुत्ते की मौत के मामले में पेट क्लीनिक संचालक और डाक्टर के खिलाफ अलीगंज थाने में एफआईआर दर्ज करायी है। उनका कहना कि उनके कुत्ते की पिटाई से मौत हुई है। फिलहाल पुलिस मामले की छानबीन में जुट गयी है। अलीगंज के प्रियदर्शनी कालोनी निवासी चंद्रपाल सिंह पत्नी और बेटे के साथ 21 मई को दिल्ली गये थे। परिवार के शहर बाहर होने की वजह से उन्होंने बाक्सर कुत्ते की देखभाल के लिये अलीगंज स्थित पेट क्लीनिक पर सम्पर्क किया था। प्रतिदिन पांच सौ रुपये के हिसाब से चंद्रपाल ने क्लीनिक संचालक को भुगतान भी किया था। 23 मई को उन्हें बाक्सर को बुखार होने की जानकारी मिली। चंद्रपाल सिंह ने परिचित सुरेश को बाक्सर के बारे में जानकारी जुटाने के लिये कहा। उनके क्लीनिक पहुंचने पर वहां मौजूद मैनेजर ने बाक्सर को दिखाने से इनकार कर दिया। पूछताछ करने पर बताया कि डाक्टर इलाज कर रहे हैं और बाक्सर जल्द ठीक हो जायेगा। सुरेश ने यह बात पता चलने पर चंद्रपाल सिंह ने पेट क्लीनिक पर फोन किया। पशु चिकित्सक डाक्टर एसए खान से उनकी बात हुई। डाक्टर ने चंद्रपाल को बताया कि बाक्सर की हालत में पहले से काफी ज्यादा सुधार है। उन्होंने डाक्टर से वीडियो काल के जरिये बाक्सर को दिखाने के लिये कहा। इस पर एसए खान ने चंद सेकेण्ड के लिये कुत्ते को एक तरफ से दिखा दिया। 24 मई को उन्होंने दोबारा से काल करने पर उन्हें बताया गया कि बाक्सर की मौत हो गई है। चंद्रपाल ने पेट क्लीनिक कर्मियों से बाक्सर की मौत का कारण पूछा तो वह लोग जवाब नहीं दे सके। काफी कहने के बाद बाक्सर को दफन करते वक्त का वीडियो तैयार कर पेट क्लीनिक कर्मियों ने चंद्रपाल सिंह के मोबाइल पर भेजा। जिसमें बाक्सर की गर्दन और आंख के पास जख्म दिखाई पड़ रहे थे। दिल्ली से लौटने के बाद पेट क्लीनिक पहुंच कर मौत का कारण पूछने पर डाण् एसए खान भड़क गये। इस बीच क्लीनिक संचालक रामजी भी वहां आ गये। दोनों लोगों ने चंद्रपाल सिंह को ज्यादा पूछताछ करने पर गम्भीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दे डाली। इतना ही नहीं क्लीनिक संचालक ने बाक्सर का कार्ड और लाइसेंस भी वापस नहीं किया। इंस्पेक्टर अलीगंज फरीद अहमद ने बताया कि रामजी और डा एसए खान पर क्रुरूरता करने का आरोप है। मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।