NBW के बाद भी खुलेआम घूम रहे दहेजलोभी, पुलिस बेबस

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NBW के बाद भी खुलेआम घूम रहे दहेजलोभी, पुलिस बेबस

लखनऊ। यूपी पुलिस की कार्यशैली हमेशा सवालों के घेरे में रही है, चाहे वो अपराधियों पर कार्रवाई का मामला हो या पीड़ित पक्ष को इंसाफ दिलाने की बात हो। हाल ही में यूपी की राजधानी लखनऊ के इंटौजा थाने का एक मामला प्रकाश में आया, जहां दहेज एक्ट के तहत एक मुकदमा बीते साल दर्ज किया गया था। इस मामले में कोर्ट ने वर पक्ष की माता और उसके बड़े बेटे के खिलाफ एनबीडबल्यू जारी कर दिया, लेकिन पुलिस ने कोर्ट के आदेश को दरकिनार कर आला अफसरों को गुमराह करना शुरू कर दिया। हालात ये हैं कि आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और पुलिस उनकी गिरफ्तारी करने से गुरेज कर रही है।

Lucknow Police Ka Itaunja Thana :

दरअसल,  इंटौजा थाने में बीते साल 26 दिसंबर को पीड़िता रेशमी ने ससुरालीजनों के खिलाफ आईपीसी की धारा 498A, 377, 323, 506 और डीपी एक्ट की धारा 3 व 4 के तहत मुकदमा दर्ज कराया था। पीड़िता की मानें तो इंटौजा पुलिस ने पहले मुकदमा लिखने से ही इंकार कर दिया था। हालांकि आला अधिकारियों के दबाव में पुलिस को मुकदमा दर्ज करना पड़ा। मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने हीलाहवाली करनी शुरू कर दी और आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। पुलिस की लापरवाही और आरोपी पक्ष से मिली भगत के चलते जितेंद्र ने 13 मार्च को कोर्ट में सरेंडर कर दिया। कोर्ट के आदेश के बाद आरोपी पति को पुलिस को गिरफ्तार करना पड़ा।

सास और बड़े बेटे के खिलाफ जारी हो चुका है गैर जमानती वारंट

इस मामले में कोर्ट ने 25 सितंबर को पीड़िता की सास सुमनलता और धर्मेंद्र के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया है। जब पुलिस से पीड़ित पक्ष ने इस संबंध में जानकारी लेनी चाही तो उनका कहना था कि लगातार छापेमारी की जा रही है, दोनों घर से फरार हैं। वहीं स्थानीय लोगों की मानें तो आरोपी पक्ष खुलेआम गांव में घूम रहे हैं, यहां तक सास सुमनलता जो प्राथमिक विद्यालय में अध्यापक हैं, उनकी अटेंडेंस भी रजिस्टर में लग रही है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार 

जब इस संदर्भ में अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण विक्रांत वीर से बात की गयी तो उन्होने कहा कि अगर कोर्ट ने एनबीडबल्यू जारी किया है तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

लखनऊ। यूपी पुलिस की कार्यशैली हमेशा सवालों के घेरे में रही है, चाहे वो अपराधियों पर कार्रवाई का मामला हो या पीड़ित पक्ष को इंसाफ दिलाने की बात हो। हाल ही में यूपी की राजधानी लखनऊ के इंटौजा थाने का एक मामला प्रकाश में आया, जहां दहेज एक्ट के तहत एक मुकदमा बीते साल दर्ज किया गया था। इस मामले में कोर्ट ने वर पक्ष की माता और उसके बड़े बेटे के खिलाफ एनबीडबल्यू जारी कर दिया, लेकिन पुलिस ने कोर्ट के आदेश को दरकिनार कर आला अफसरों को गुमराह करना शुरू कर दिया। हालात ये हैं कि आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और पुलिस उनकी गिरफ्तारी करने से गुरेज कर रही है। दरअसल,  इंटौजा थाने में बीते साल 26 दिसंबर को पीड़िता रेशमी ने ससुरालीजनों के खिलाफ आईपीसी की धारा 498A, 377, 323, 506 और डीपी एक्ट की धारा 3 व 4 के तहत मुकदमा दर्ज कराया था। पीड़िता की मानें तो इंटौजा पुलिस ने पहले मुकदमा लिखने से ही इंकार कर दिया था। हालांकि आला अधिकारियों के दबाव में पुलिस को मुकदमा दर्ज करना पड़ा। मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने हीलाहवाली करनी शुरू कर दी और आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। पुलिस की लापरवाही और आरोपी पक्ष से मिली भगत के चलते जितेंद्र ने 13 मार्च को कोर्ट में सरेंडर कर दिया। कोर्ट के आदेश के बाद आरोपी पति को पुलिस को गिरफ्तार करना पड़ा।

सास और बड़े बेटे के खिलाफ जारी हो चुका है गैर जमानती वारंट

इस मामले में कोर्ट ने 25 सितंबर को पीड़िता की सास सुमनलता और धर्मेंद्र के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया है। जब पुलिस से पीड़ित पक्ष ने इस संबंध में जानकारी लेनी चाही तो उनका कहना था कि लगातार छापेमारी की जा रही है, दोनों घर से फरार हैं। वहीं स्थानीय लोगों की मानें तो आरोपी पक्ष खुलेआम गांव में घूम रहे हैं, यहां तक सास सुमनलता जो प्राथमिक विद्यालय में अध्यापक हैं, उनकी अटेंडेंस भी रजिस्टर में लग रही है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार 

जब इस संदर्भ में अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण विक्रांत वीर से बात की गयी तो उन्होने कहा कि अगर कोर्ट ने एनबीडबल्यू जारी किया है तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।