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Lucknow : शिवपाल यादव पांच मई को भतीजे अखिलेश के खिलाफ करेंगे नई जंग का ऐलान

प्रसपा प्रमुख शिवपाल यादव ने बीते यूपी विधानसभा चुनाव में एक सीट पर चुनाव लड़कर अपमान का कड़वा घूंट पिया था, जबकि उनको जगह-जगह भतीजे अखिलेश यादव अपमानित कर रहे थे। यह बात शिवपाल यादव ने विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद खुलकर अपनी भावना का इजहार सार्वजनिक मंच से किया था।

By संतोष सिंह 
Updated Date

लखनऊ। प्रसपा प्रमुख शिवपाल यादव (PSP Chief Shivpal Yadav) ने बीते यूपी विधानसभा चुनाव (UP Assembly Elections) में एक सीट पर चुनाव लड़कर अपमान का कड़वा घूंट पिया था, जबकि उनको जगह-जगह भतीजे अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) अपमानित कर रहे थे। यह बात शिवपाल यादव (Shivpal Yadav)ने विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद खुलकर अपनी भावना का इजहार सार्वजनिक मंच से किया था।

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इसके बाद से ही वह भतीजे अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav)  के खिलाफ बगावत का झंडा लिए घूम रहे है। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (Progressive Samajwadi Party) के प्रमुख शिवपाल यादव (Shivpal Yadav) को जिस उचित समय का इंतजार था। वह अब दिन अब बेहद करीब आ गया है। शिवपाल यादव (Shivpal Yadav) ने गुरुवार को लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है। सूत्रों के मुताबिक, प्रसपा प्रमुख इस दौरान भतीजे अखिलेश के खिलाफ नई जंग का ऐलान करने वाले हैं, जिन पर वह अपमानित करने का आरोप लगा रहे हैं।

बता दें कि काफी दिनों से अटकलें हैं कि शिवपाल यादव (Shivpal Yadav) भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम सकते हैं। हालांकि, उनकी तरह सपा से नाराज चल रहे आजम खान (Aazam Khan)से मुलाकात के बाद से यह भी चर्चा है कि वह दिग्गज मुस्लिम नेता के साथ मिलकर कोई नया मोर्चा बना सकते हैं। पिछले कुछ दिनों में जिस तरह उन्होंने योगी सरकार (Yogi Government) को निशाने पर लिया है, उससे यह काफी हद तक साफ हो गया है कि वह भाजपा (BJP) में शामिल नहीं होने जा रहे हैं।

मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) की विरासत को लेकर अखिलेश और शिवपाल के बीच 2017 विधानसभा चुनाव (2017 Assembly Election) से पहले ही फूट पड़ गई थी। उन्होंने सपा को छोड़कर अपनी नई पार्टी बना ली। लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) में बड़े भाई मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) के कहने पर वह भतीजे अखिलेश का साथ देने को तैयार हो गए। हालांकि, इस बार भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी और गठबंधन के बदले महज एक ही सीट दी गई। उन्हें सपा के सिंबल पर ही जसवंतनगर से लड़ाया गया। इसके बाद सपा गठबंधन में सक्रिय भूमिका या नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने की मांग भी ठुकरा दी गई। इससे आहत शिवपाल ने बागी रुख अपना लिया है।

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