‘इंदू सरकार’ को लेकर भंडारकर की कांग्रेस को दो टूक, रिलीज से पहले नहीं दिखाएंगे फिल्म

मुंबई। देश की सबसे बड़ी राजनीतिक घटनाओं में से एक 1975 में लगी 22 महीनों की इमरजेंसी की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म ‘इंदू सरकार’ रिलीज के लिए तैयार है। फिल्म का ट्रेलर रिलीज हो चुका है, जिसने कांग्रेसी नेताओं की नींद उड़ा दी है। महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष संजय निरूपम, जगदीश टाइटलर और प्रिया सिंह पॉल ने सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष पहलाज निहलानी को पत्र लिखकर अपील की है कि फिल्म को सर्टिफिकेट देने से पहले फिल्म उन्हें दिखाई जाए। कांग्रेस के इन नेताओं का कहना है कि वे स्पष्ट करना चाहते है कि ये फिल्म कहीं उनकी पार्टी के दिवंगत नेता इंदिरा गांधी और संजय गांधी की छवि को नकारात्मक तरीके से पेश तो नहीं कर रही।

कांग्रेसी नेताओं की ओर से रखी गई मांग को जब ​इंदू सरकार के निर्माता व  निर्देशक मधुर भंडारकर के सामने रखा गया तो, उन्होंने फिल्म को रिलीज से पहले किसी को भी दिखाने से मना कर दिया है। भंडारकर का कहना है कि फिल्म निश्चित ही इमरजेंसी के कालखंड पर आधारित है ​लेकिन इसमें 30 प्रतिशत वा​स्तविकता है जबकि 70 फीसदी काल्पनिक है। यह पहला मौका नहीं है जब​ इमरजेंसी का जिक्र हो रहा है। इससे पहले भी इमरजेंसी को लेकर कई डाक्यूमेंट्री फिल्मस और किताबें लिखीं जा चुकी हैं। उन्हें ऐसा नहीं लगता इंदु सरकार से पूर्व किसी डाक्यूमेंट्री या किताब को लेकर इस तरह के सवाल किए गए हों।

मधुर भंडारकर ने कहा कि इंदू सरकार को लेकर उन पर दबाव बनाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर उन्हें तरह तरह की धमकियां मिल रहीं हैं। एक धमकी का जिक्र करते हुए भंडारकर ने कहा कि मुझे मुंह पर कालिख पोतने की धमकी मिली है, लेकिन वह इन सब बातों से डरने वाले नहीं हैं।

आपने पाठकों की जानकारी के लिए बता दें कि यह पहला मौका नहीं जब कांग्रेस ने अपने नेताओं को लेकर बन रही फिल्म पर आपत्ति दर्ज करवाई है। इमरजेंसी के तुरंत बाद 1977 में रिलीज हुई मशहूर फिल्म निर्माता निर्देशक ​गुलजार की फिल्म आंधी को भी बैन का सामना करना पड़ा था। ऐसा कहा जाता था कि आंधी की कहानी इंदिरा गांधी के जीवन पर आधारित थी।